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यूपी चुनाव: सियासत वही-कलेवर नया, बसपा ने बदला ब्राह्मण सम्मेलन का नाम

प्रबुद्ध वर्ग संवाद सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी के तहत 23 जुलाई से अयोध्या में बसपा का चुनावी कार्यक्रम शुरू हो रहा है. अयोध्या में बसपा राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश मिश्रा कई कार्यक्रम में शिरकत करेंगे.

बसपा ने बदला ब्राह्मण सम्मेलन का नाम (पीटीआई) बसपा ने बदला ब्राह्मण सम्मेलन का नाम (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बसपा ने बदला ब्राह्मण सम्मेलन का नाम
  • ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश
  • बीजेपी-सपा को चुनौती देने की तैयारी

उत्तर प्रदेश चुनाव (UP Election) में अपनी सियासी पारी को फिर शुरू करने के सपने देख रहीं बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) ने चुनाव से ठीक पहले ब्राह्मण कार्ड खेला है. वे पूरे राज्य में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन करने जा रही हैं. लेकिन अब पार्टी की तरफ से एक बड़ा बदलाव किया गया है. उन्होंने अपने ब्राह्मण सम्मेलन का नाम 'प्रबुद्ध वर्ग संवाद सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी' कर दिया है. मतलब सियासत वही लेकिन कलेवर नया.
 

बसपा ने बदला ब्राह्मण सम्मेलन का नाम

प्रबुद्ध वर्ग संवाद सुरक्षा सम्मान विचार गोष्ठी के तहत 23 जुलाई से अयोध्या में बसपा का चुनावी कार्यक्रम शुरू हो रहा है. अयोध्या में बसपा राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सदस्य सतीश मिश्रा कई कार्यक्रम में शिरकत करेंगे. सबसे पहले वे हनुमान गढ़ी में दर्शन पूजन करेंगे . हनुमान लला के दरबार मे माथा टेकने के बाद वे राम जन्मभूमि परिसर में जाकर रामलला की पूजा अर्चना भी करेंगे . इसके बाद वे सीधे सरयू के तट पर पहुंचकर 100 लीटर दूध से बाकायदा मंत्रोच्चार के बीच दुग्धाभिषेक करेंगे . वे मां सरयू की आरती में भी शामिल होंगे. बताया गया है कि सतीश मिश्रा अयोध्या के साधु संतों से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद भी लेंगे.

ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश

अयोध्या दौरे के बाद बसपा का अलगा ठिकाना अंबेडकर नगर होगा जहां पर 24 और 25 जुलाई को कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे. इसके बाद 26 को प्रयागराज तो 27 को कौशाम्बी में भी बड़े कार्यक्रम होंगे. फिर 28 जुलाई को प्रतापगढ़ और 29 जुलाई को सुल्तानपुर में सम्मेलन होगा. एक तय रणनीति पर चलते हुए सतीश मिश्रा यूपी के हर उस जिले का दौरा करेंगे जहां पर ब्राह्मण समाज का प्रभुत्व ज्यादा है.

बीजेपी-सपा को चुनौती देने की तैयारी

बसपा के समय समय पर बदलते रहे नारों के बीच उसकी कार्यशैली और चेहरा भी बदलता रहा. एक बार फिर 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव के पहले बदलाव का दौर है . अब ये बदलाव बहुजन समाज पार्टी को यूपी चुनाव में कितना फायदा पहुंचा सकता है, ये समय बताएगा लेकिन इस बदलाव का महज एक पक्ष देखना बसपा की रणनीति पर रोशनी नहीं डाल सकता है. यहीं वजह है कि बसपा भाजपा के वोट बैंक में ही सेंध नहीं लगा रही है बल्कि सपा को भी यूपी चुनाव में बड़ी चोट पहुंचाने की तैयारी कर रही है. 

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