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क्या रजनीकांत तमिलनाडु में बनेंगे बीजेपी का चेहरा? इस वजह से लगाए जा रहे कयास

रजनीकांत ने 2017 में 31 दिसंबर को राजनीति में आने की बात कही थी. उस वक्त रजनीकांत ने कहा था कि जब सही समय आएगा, तब वे राजनीति में आ जाएंगे.

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रजनीकांत से अमित शाह की हो सकती है मुलाकात?
रजनीकांत से अमित शाह की हो सकती है मुलाकात?
स्टोरी हाइलाइट्स
  • चेन्नई दौरे पर हैं गृह मंत्री अमित शाह
  • आरएसएस विचारक एस गुरुमूर्ति से की मुलाकात
  • रजनीकांत के राजनीतिक पदार्पण को लेकर हुई चर्चा

तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को चेन्नई दौरे पर पहुंचे हैं. इतना ही नहीं उन्होंने पहुंचते ही सत्ताधारी AIADMK के साथ आगामी चुनाव के लिए गठबंधन भी पक्का कर लिया है. स्पष्ट है कि तमिलनाडु में इस बार बीजेपी की रणनीति आक्रामक रहने वाली है. जानकारी मिली है कि गृह मंत्री शाह ने शनिवार रात को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) विचारक एस. गुरुमूर्ति से लीला प्लेस में मुलाकात की है. 

यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि गुरुमूर्ति ने पिछले दिनों फिल्म सुपरस्टार रजनीकांत से मुलाकात की थी. सूत्रों के अनुसार अमित शाह और आरएसएस नेता के बीच हुई मुलाकात में रजनीकांत के राजनीतिक मुद्दों को लेकर भी बात हुई है. फिल्म अभिनेता रजनीकांत से अमित शाह की मुलाकात होगी या नहीं, इसको लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है.

बता दें, रजनीकांत ने 2017 में 31 दिसंबर को राजनीति में आने की बात कही थी. उस वक्त रजनीकांत ने कहा था कि जब सही समय आएगा, तब वे राजनीति में आ जाएंगे. इसके विपरीत इस साल मार्च महीने में रजनीकांत ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की चाहत कभी नहीं रखी और न ही बनना चाहते हैं. ऐसे में अमित शाह और एस. गुरुमूर्ति की मुलाकात के बाद रजनीकांत की राजनीति में पदार्पण की बात कही जा रही है.   

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तमिलनाडु में बीजेपी को चेहरे की तलाश  

अमित शाह ने डीएमके पर सीधा हमला कर बीजेपी की नीति साफ कर दी है कि पार्टी राज्य में बड़ी भूमिका की तैयारी में है. हालांकि पार्टी की राह में सबसे बड़ी बाधा अपना कैडर तैयार करना और एक ऐसा स्थानीय नेता ढूंढ़ना है, जिसका चेहरा आगे कर मोदी-शाह की जोड़ी जनता से वोट मांग सके. इसके अभाव में बीजेपी को फिलहाल दिल्ली के नेताओं से ही चेन्नई की राजनीति करनी होगी. 

नहीं चली थी मोदी लहर 

साल 2016 के चुनाव में 2014 की मोदी लहर तमिलनाडु में देखने को नहीं मिली थी.  बीजेपी ने राज्य की 234 में से 188 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन राज्य में बीजेपी का खाता भी नहीं खुला था. राज्य में बीजेपी को 2.84 फीसदी वोट मिले थे. लेकिन बीजेपी इस बार हर हाल में राज्य में अपनी दमदार मौजूदगी चाहती है.

 

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