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देश में 'टिकैत फॉर्मूला' लागू करें, 3 क्विंटल गेहूं की कीमत हो 1 तोले सोने के बराबर: राकेश

राकेश टिकैत ने आज तक के विशेष कार्यक्रम 'सीधी बात' में कहा कि 3 क्विंटल गेहूं (300 किलोग्राम) की कीमत 1 तोले (10 ग्राम) सोने के बराबर कर दी जाए.

किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो) किसान नेता राकेश टिकैत (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • किसान आंदोलन का केंद्र बन चुके हैं राकेश टिकैत
  • MSP के लिए महेंद्र टिकैत फ़ॉर्मूला की मांग
  • 'सोने की दर से बांध दी जाए अनाज की कीमत'

आंदोलन के बीच किसानों का सबसे बड़ा चेहरा बन चुके राकेश टिकैत ने MSP को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. राकेश टिकैत ने आजतक के विशेष कार्यक्रम 'सीधी बात' में कहा है कि MSP के लिए महेंद्र टिकैत का 'टिकैत फ़ॉर्मूला' लागू किया जाए. टिकैत फ़ॉर्मूला के अंतर्गत उन्होंने गेहूं का दाम सोने के साथ जोड़ दिया और कहा कि जिस गति में सोने की कीमत बढ़े, उसी दर से गेहूं के दाम भी बढ़ें. टिकैत ने सीधी बात में वरिष्ठ पत्रकार 'प्रभु चावला' से बातचीत में कहा कि '3 क्विंटल गेहूं (300 किलोग्राम) की कीमत 1 तोले (10 ग्राम) सोने के बराबर कर दी जाए.'' आपको बता दें कि आजतक का ये विशेष प्रोग्राम 'सीधी बात' शनिवार रात 8 बजे प्रसारित किया जाएगा. जिसे आप आजतक की वेबसाईट पर लाइव देख सकते हैं.

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26 जनवरी की घटना के बाद से किसान आंदोलन का केंद्र सिंघु बॉर्डर से अब गाजीपुर बॉर्डर की ओर स्थानांतरित हो गया है. जिसके नेता अघोषित और घोषित तौर पर महेंद्र टिकैत के बेटे 'राकेश टिकैत' ही हैं. ऐसे में MSP को लेकर दिया गया उनका बयान काफी वजन रखता है.

आजतक के 'सीधी बात' कार्यक्रम में किसान नेता 'राकेश टिकैत' ने कहा, 'एमएसपी को लेकर महेंद्र टिकैत का फ़ॉर्मूला लागू कर दिया जाए. 1967 में भारत सरकार ने MSP तय किया था, तब गेहूं की कीमत 76 रुपये प्रति क्विंटल हुआ करती रही, जो प्राइमरी स्कूल के अध्यापक थे उनकी सैलरी 70 रुपया महीने थी, अध्यापक एक महीने की सैलरी से 1 क्विंटल गेहूं नहीं खरीद सकता था, हम 1 क्विंटल गेहूं की कीमत से भट्टे की ढाई हजार ईंटें खरीद सकते थे. तब 30 रुपये की 1 हजार ईंट आती थीं. ''

राकेश टिकैत ने आगे कहा, ''तब सोने का भाव 200 रुपये प्रति तोला था. जो तीन क्विंटल गेहूं से खरीदा जा सकता था. हमको अब तीन क्विंटल गेहूं के बदले 1 तोले सोना दे दो, और उसी हिसाब से कीमतें तय की जाएं. जितना कीमत और चीजों की बढ़े, उतनी ही कीमत गेहूं की भी बढ़नी चाहिए.''

जब राकेश टिकैत से पूछा गया कि वे किसान हैं या नेता हैं तो उन्होंने जवाब दिया कि ''गन्ने उगाता हूं. ट्रैक्टर चलाने का शौक है, नेता तो चमचमाते घरों में रहते हैं. मखमली में सोते हैं. बुवाई के दिनों में पूरे-पूरे दिन ट्रैक्टर चलाता हूं, आगे चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है.''

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि 'देश में घाटे की खेती रुकनी चाहिए. सरकार एमएसपी की गारंटी दे'. राकेश टिकैत से जब ये पूछा गया कि वे प्रधानमंत्री पर विश्वास करते हैं कि नहीं और प्रधानमंत्री ने तो कहा है कि वे किसानों से केवल एक कॉल की दूरी पर है. फिर क्या दिक्कत है तो इस प्रश्न का जवाब देते हुए राकेश टिकैत ने कहा कि ''हम प्रधानमंत्री पर विश्वास करते हैं, तभी तो बैठे हैं. प्रधानमंत्री एक कॉल पर बात करने की कहते हैं, हमें तो पता ही नहीं है उनका नम्बर कौन सा है. प्रधानमंत्री का कौन सा नम्बर है, वो नम्बर हमें दे दो.''

 

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