कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर अपने बयान और अंदाज को लेकर सियासी चर्चा में आ गए हैं. सिर पर गमछा, हाथ में कुदाल और मंच से मजदूरों के बीच खड़े होकर राहुल गांधी ने खुद को श्रमिकों के संघर्ष से जोड़ने की कोशिश की, लेकिन इसी दौरान उनके एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया. उन्होंने खुले मंच से कहा, “मुझे नहीं पता G-RAM-G क्या है.” इसके बाद भाजपा ने उन पर तीखा हमला बोला है.
राहुल गांधी रचनात्मक कांग्रेस के बैनर तले आयोजित राष्ट्रीय मनरेगा श्रमिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उनका पहनावा और प्रतीकात्मक अंदाज साफ तौर पर मजदूरों और ग्रामीण भारत से जुड़ाव दिखाने वाला था. भाषण के दौरान जब नए कानून का जिक्र आया, तो राहुल गांधी उसका नाम नहीं ले सके और उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि उन्हें इसका नाम नहीं पता.
अपने संबोधन में राहुल गांधी ने मनरेगा की मूल अवधारणा को विस्तार से समझाया. उन्होंने कहा कि मनरेगा का मकसद गरीबों को अधिकार, सम्मान और गरिमा देना था. इस योजना ने पहली बार यह सुनिश्चित किया कि देश का कोई भी गरीब व्यक्ति काम की मांग कर सकता है और सरकार उसे रोजगार देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है. उन्होंने कहा कि पंचायत राज व्यवस्था के जरिए इसे लागू किया गया, ताकि मजदूरों की आवाज सीधे व्यवस्था तक पहुंचे.
हालांकि, नए कानून को लेकर राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि सरकार लोकतंत्र को कमजोर कर रही है और फैसले अब दिल्ली में बैठकर किए जाएंगे- कहां पैसा जाएगा, कितना जाएगा और किन राज्यों को ज्यादा मिलेगा. उनका आरोप था कि भाजपा शासित राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी और मजदूरों को मिलने वाला सीधा लाभ अब ठेकेदारों व नौकरशाही के हाथों में चला जाएगा.
भाजपा का तीखा पलटवार
राहुल गांधी के 'G-RAM-G' वाले बयान पर भाजपा ने सोशल मीडिया पर जोरदार हमला किया. पार्टी ने कहा कि जो नेता किसी कानून का नाम तक नहीं जानता, वह उसका विरोध कैसे कर सकता है. भाजपा ने इसे कांग्रेस की मानसिक और राजनीतिक दिवालियापन करार दिया.
राहुल गांधी ने अपने भाषण में किसानों का मुद्दा भी उठाया और कहा कि पहले सरकार ने तीन काले कृषि कानून लाए थे, लेकिन किसानों की एकजुटता के आगे सरकार को झुकना पड़ा. उन्होंने दावा किया कि अब वही तरीका मजदूरों के खिलाफ अपनाया जा रहा है. अंत में राहुल गांधी ने मजदूरों और किसानों से एकजुट होने की अपील करते हुए कहा कि अगर लोग साथ खड़े हुए तो सरकार को पीछे हटना पड़ेगा और मनरेगा जैसी योजनाएं बचाई जा सकेंगी.