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संविधान दिवस के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया- कैसे मजबूत है हमारा लोकतंत्र

संविधान दिवस के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आजतक से खास बातचीत की. चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने हमारे संविधान की तमाम विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि 17 आम चुनावों के बाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं और मजबूत हुई हैं साथ ही साथ लोकतंत्र पर लोगों का विश्वास भी बढ़ा है.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई मुद्दों पर की बात (फाइल फोटो: PTI) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई मुद्दों पर की बात (फाइल फोटो: PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कहा- लोकतंत्र पर लोगों का विश्वास बढ़ा
  • लोकसभा अध्यक्ष बिरला बोले- सीएए पर 7 घंटे 28 मिनट चर्चा हुई
  • ओम बिरला ने कहा- धारा 370 पर पर 8 घंटे 22 मिनट चर्चा कराई

संविधान दिवस के मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आजतक से खास बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर जहां सरकार का पक्ष रखा वहीं यह भी बताया कि पिछले कुछ सालों में उन्होंने किस तरह पूरी निष्पक्षता के साथ सदन को चलाने की कोशिश की है. चर्चा के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने संविधान की तमाम विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला और कहा कि 17 आम चुनावों के बाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं और मजबूत हुई हैं साथ ही साथ लोकतंत्र पर लोगों का विश्वास भी बढ़ा है.

केवड़िया में संविधान दिवस के आयोजन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि देश का संविधान बनाने वाले मनुष्यों ने जब संविधान बनाया था तो सभी पलों का विचार किया था, आज की परिस्थिति और भविष्य की परिस्थिति, इसीलिए हमारा संविधान जहां दृढ़ता भी रखता है वहीं लचीलापन भी रखता है. इसीलिए भारत का संविधान कभी खतरे में नहीं हो सकता है. ये भारत के हर व्यक्ति को जीने का अधिकार देता है, स्वतंत्रता का अधिकार देता है. हमारे लोकतंत्र में 17 आम चुनावों के अंतर्गत हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं और मजबूत हुई हैं. लोकतंत्र पर लोगों का विश्वास बढ़ा है.

संविधान दिवास के आयोजन को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि केवड़िया में यह आयोजन इसलिए हो रहा है क्योंकि हम 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं. ऐसे सम्मेलन हर साल होते आए हैं. यह शताब्दी वर्ष है इसलिए यह आयोजन अनूठा है.

ओम बिरला ने आगे कहा कि केवड़िया की धरती महात्मा गांधी और सरदार बल्लभ भाई पटेल की धरती है, वहां पर नर्मदा का तट भी है, सरदार पटेल की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा भी है. कई बार स्थान का बड़ा महत्व होता है इसलिए विचार बना कि इस बार केवड़िया में ही सम्मेलन आयोजित किया जाए और 26 नवंबर को संविधान दिवास वहां मनाया जाए.

विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए ओम बिरला ने कहा कि इस देश के अंदर आज भी संविधान के प्रति हमारा विश्वास है. और हमारी लोकतांत्रिक शक्तियां मजबूत हुई हैं. 17 आम चुनाव हुए हैं. 17 आम चुनावों के अंदर मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ी है. 300 विधानसभा चुनाव हुए हैं. सबमें ही मतदाताओं ने जो विश्वास जताया है वो सहज रूप से, मैं कह सकता हूं कि ये भारत का ही लोकतंत्र है जहां सहज रूप से सत्ता हस्तांतरित हुई है.

ओम बिरला ने आगे कहा कि 8 बार देश की सत्ता का हस्तांतरण सहज रूप से हुआ है. राज्य के विधानसभा चुनावों में भी आप देखते हैं कि कभी एक दल की सरकार होती है और कभी उसी दल को बहुमत नहीं मिलता तो सत्ता हस्तांतरण होता है. यही तो लोकतंत्र की विशेषता है. संविधान बनाते समय यह व्यवस्था दी गई थी कि संविधान और लोकतंत्र के अंदर जनता मूल में रहेगी.

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संविधान में संशोधन पर बात करते हुए ओम बिरला ने कहा कि अभी तक संविधान में 104 संशोधन हुए हैं लेकिन संविधान के मूल स्वरूप से कभी छेड़खानी नहीं हो सकती है. मूल स्वरूप में संशोधन के लिए भी एक प्रक्रिया दी गई है. इसके अलावा संविधान संशोधन की न्यायिक समीक्षा की भी व्यवस्था की गई है ताकि एक सत्ता और एक दल निरंकुश न हो जाएं इसके लिए वैधानिक व्यवस्थाएं की गई हैं.

नागरिक संशोधन कानून से जुड़े सवाल पर ओम बिरला ने कहा कि सरकार अगर कोई विधेयक लाती है तो उस पर बहस होती है. जिस विधेयक की आप बात कर रहे हैं उस पर 7 घंटे 28 मिनट चर्चा हुई थी. अनुमानित तौर पर एक विधेयक पर करीब 4 घंटे चर्चा होती है इस पर तो 3 घंटे अतिरिक्त चर्चा हुई है. जब बिना चर्चा के कोई विधेयक पास हो तो आप आरोप लगा सकते हैं लेकिन सदन में जिस सरकार का बहुमत होता है वो विधेयक आसानी से पास हो जाता है. हम प्रतिपक्ष को ही संवाद का अधिक अवसर देते हैं. ताकि उनकी आवाज सुनी जा सके. सभी राजनीतिक दलों को अवसर दिया जाता है. सदन में चर्चा होनी ही चाहिए.

तीन तलाक पर बात करते हुए ओम बिरला ने कहा कि इस विधेयक के दौरान भी खुलकर चर्चा हुई थी, मत विभाजन की स्थिति पैदा हुई तो मत विभाजन भी हुआ. कुछ दल पक्ष में भी थे कुछ विपक्ष में भी थे. संसद लोकतंत्र का मंदिर है. सदस्यों को पर्याप्त समय मिलना चाहिए इसलिए मैंने कोशिश की कि सभी को अवसर मिले.

अनुच्छेद 370 पर बात करते हुए ओम बिरला ने कहा कि मैंने इस पर 8 घंटे 22 मिनट चर्चा कराई. चर्चा होने के बाद मत विभाजन हुआ और मत विभाजन के बाद जो संकल्प हुआ वो आज देश के सामने है. इसलिए यह कहना कि सत्ता में आने के बाद हम ये कानून बदल देंगे, ये राजनीतिक दलों की अपनी विचारधारा है, मैं इसमें नहीं पड़ूंगा. सदन चलाते हुए मैंने एक कोशिश की कि सभी दलों को पर्याप्त समय दिया जाए, मत विभाजन उनका अधिकार था इसलिए मत विभाजन भी कराया गया.

 

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