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कृषि मंत्री बोले- कानून वापसी के अलावा कोई विकल्प बताएं, किसानों का जवाब- रद्द ही करना होगा

सरकार के पुराने रूख पर लौटते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने कहा कि हम कानून के हर बिंदू पर क्लॉज वाइज (बिंदूवार) चर्चा करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि अब हमें उम्मीद है कि 19 जनवरी को किसान बिंदूवार चर्चा करेंगे और सरकार को बताएंगे कि कृषि कानून रद्द करने के अलावा वे और क्या चाहते हैं.

BKU नेता राकेश टिकैत (फोटो- पीटीआई) BKU नेता राकेश टिकैत (फोटो- पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कानून रद्द के अलावा विकल्प बताएं किसान-तोमर
  • सरकार को कानून ही रद्द करना पड़ेगा-टिकैत
  • सरकार ने फिर से बिंदूवार वार्ता करने का न्यौता दिया

कृषि कानून रद्द करने को लेकर किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच गतिरोध जारी है. रविवार को किसान आंदोलन का 53वां दिन था, लेकिन समाधान की गुंजाइश नहीं नजर आई. इस बीच केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने एक बार फिर कहा कि किसान कृषि कानून को रद्द करने की मांग को छोड़कर कोई दूसरा विकल्प बताएं. वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने एक बार फिर कहा कि सरकार को कृषि कानून वापस लेना ही पड़ेगा, तभी किसान घर जाएंगे. 

SC के दखल के बाद कानून रद्द करने की मांग का मतलब नहीं

रविवार को कृषि मंत्री ने कहा कि हमने किसान संगठनों को एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें हम उनकी मंडी से जुड़ी समस्याओं, व्यापारियों के पंजीकरण और दूसरे मुद्दों पर चर्चा के लिए राजी हो गए थे, सरकार पराली और बिजली से जुड़ी समस्याओं पर भी चर्चा करने को तैयार थी, लेकिन किसान सिर्फ कानून को रद्द कराना चाहते हैं, लेकिन ज्यादातर किसान और विशेषज्ञ कृषि कानूनों के पक्ष में हैं. अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कानून को लागू नहीं किया जा सकता है, ऐसे में अब कानून को रद्द करने की मांग का कोई मतलब नहीं रह गया है. 

कानून पर बिंदुवार चर्चा करने को तैयार

सरकार के पुराने रुख पर लौटते हुए कृषि मंत्री ने कहा कि हम कानून के हर बिंदु पर क्लॉज वाइज चर्चा करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि अब हमें उम्मीद है कि 19 जनवरी को किसान बिंदुवार चर्चा करेंगे और सरकार को बताएंगे कि कृषि कानून रद्द करने के अलावा वे और क्या चाहते हैं. नरेंद्र तोमर ने कहा, "कानून रद्द करने के अलावा कोई दूसरी मांग है तो किसान बताएं, सरकार इस पर चर्चा करेगी."

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बिल वापस लेना पड़ेगा-टिकैत

वहीं दिल्ली से दूर नागपुर में किसानों के लिए समर्थन तलाश रहे भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार किसान इन कानूनों को वापस नहीं लेती है किसानों का आंदोलन जारी रहेगा. राकेश टिकैत ने कहा कि लाखं किसान दिल्ली के बॉर्डर पर दो महीने से जमे हुए हैं. लेकिन सरकार नए कृषि कानूनों को रद्द नहीं कर रही है? टिकैत ने कहा कि सरकार हठधर्मिता दिखा रही है. इससे ऐसा प्रतीत होता है कि आंदोलन अब लंबा खिंचने जा रहा है. 

MSP को कानून की गारंटी मिले

राकेश टिकैत ने कहा कि ये एक वैचारिक क्रांति है जो दिल्ली में शुरू में हुई है इससे गांव के लोग जुड़े हैं और ये क्रांति फेल नहीं होगी. टिकैत ने कहा कि एक भी किसान नहीं चाहता है कि हम समझौता करें या सिलसिलेवार बात करें. टिकैत ने कहा कि सरकार तीनों कानून वापस ले और देश में MSP कानूनी रूप से लागू हो.

बता दें कि 19 जनवरी को सरकार और किसानों के बीच अगले दौर की वार्ता है. 15 जनवरी को दोनों पक्षों के बीच वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला था. इससे पहले 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कानूनों के लागू करने पर रोक लगा दी थी और ये एक कमेटी गठित की थी.

 

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