जनगणना-2027 में जाति गणना को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है. कांग्रेस समेत कुछ राजनीतिक दलों ने हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना की प्रश्नावली में OBC श्रेणी का स्पष्ट उल्लेख न होने पर सवाल खड़े किए हैं. इस मुद्दे पर अब गृह मंत्रालय ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि जाति गणना को लेकर किसी भी तरह का भ्रम फैलाया जा रहा है और OBC सहित सभी जातियों की गणना जनगणना के दूसरे चरण में की जाएगी.
दरअसल, ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (OBC विभाग) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जय हिंद ने रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा कि जनगणना-2027 के पहले चरण की प्रश्नावली के प्रश्न संख्या 12 में केवल अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और 'अन्य' का उल्लेख है, जबकि ओबीसी का म स्पष्ट रूप से उल्लेख नहीं है. कांग्रेस ने इसे सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करने वाला बताया और आशंका जताई कि ओबीसी जाति गणना को कमजोर या विलंबित किया जा सकता है.
कांग्रेस का तर्क था कि सरकार ने सार्वजनिक रूप से यह घोषणा की है कि जनगणना-2027 में जाति गणना होगी, लेकिन पहले चरण की प्रश्नावली में इसका संकेत नहीं मिलता. पार्टी ने इस पर तत्काल लिखित स्पष्टीकरण, जाति गणना की कार्यप्रणाली सार्वजनिक करने और राजनीतिक दलों व राज्यों से परामर्श की मांग की.
इस बीच गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि जनगणना-2027 से जुड़ी पूरी जानकारी 12 दिसंबर 2025 को प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से पहले ही साझा की जा चुकी है. मंत्रालय ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह पहले से स्पष्ट है कि जनगणना दो चरणों में होगी.
गृह मंत्रालय ने दी जानकारी
गृह मंत्रालय के अनुसार, पहले चरण में हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना अप्रैल से सितंबर 2026 तक होगी, जिसमें मकानों, सुविधाओं और घरेलू स्थितियों से जुड़ा डेटा एकत्र किया जाएगा. वहीं दूसरा चरण में जनसंख्या गणना फरवरी 2027 में होगी और इसी चरण में जाति से संबंधित विस्तृत डेटा एकत्र किया जाएगा. बर्फीले और गैर-समकालिक क्षेत्रों में यह प्रक्रिया पहले कराई जाएगी.
डिजिटल जनगणना और नए कदम
मंत्रालय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से जनगणना-2027 को मंजूरी दी है. जनगणना 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है. यह भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें मोबाइल ऐप, सेंट्रल मॉनिटरिंग पोर्टल और ‘सेल्फ-एन्यूमरेशन’ जैसे प्रावधान शामिल होंगे. आम जनता को पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं भरने का विकल्प मिलेगा. पूरी प्रक्रिया की निगरानी 'सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम' (CMMS) पोर्टल के जरिए होगी.
30 लाख फील्ड कर्मचारी गणना में होंगे शामिल
सरकार ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने 30 अप्रैल 2025 को जनगणना-2027 के दूसरे चरण में जाति गणना को शामिल करने का निर्णय लिया था. ओबीसी, एससी, एसटी सहित सभी सामाजिक वर्गों का डेटा इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किया जाएगा. लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारी इस राष्ट्रीय महत्व की प्रक्रिया में शामिल होंगे. सरकार का दावा है कि इससे न केवल बेहतर और पारदर्शी डेटा मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा.