scorecardresearch
 

बीरेन सिंह से धामी तक....सीएम पद पर 'प्रयोग' से क्यों बच गई बीजेपी?

बीजेपी चार राज्यों में एक बार फिर से सत्ता में वापसी की है और किसी तरह का सियासी और नए प्रयोग करने के बजाय पुराने नेताओं पर भी भरोसा जताया है. बीजेपी ने ऐसे ही यह फैसला नहीं किया बल्कि सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.

X
4 states cm 4 states cm
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बीजेपी की नजर 2024 के लोकसभा चुनाव पर है
  • पुष्कर सिंह धामी को हार के बाद भी मिली सत्ता
  • योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी सत्ता में लौटी

देश के पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के जब नतीजे आए तो पंजाब पर आम आदमी पार्टी के कब्जे के अलावा बाकी चार राज्यों में बीजेपी ने जीत का परचम लहराया. अब बारी आई सरकार बनाने की तो धीरे-धीरे मुख्यमंत्रियों के नाम की घोषणा होने लगी. मुख्यमंत्री पदों पर हर बार नए नाम देकर चौंकाने वाली बीजेपी ने इस बार ऐसा नहीं किया. उत्तर प्रदेश में तो योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर चुनाव लड़ा गया था, लेकिन अन्य तीन राज्यों में सामूहिक नेतृत्व में उतरी थी. इसके बावजूद बीजेपी ने चारों ही राज्यों में नया सियासी प्रयोग करने की बजाय सरकार के पुराने मुखिया पर भरोसा जताया है. एक ऐसी पार्टी ने जिसने हाल ही में एक साथ तीन राज्यों के सीएम बदल दिए उसका 2022 में किसी तरह के बदलाव से बचना यूं ही उठाया गया कदम नहीं है.

उत्तराखंड की कमान एक बार फिर से पुष्कर सिंह धामी को सौंपी गई. उन्होंने दूसरी बार बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. गोवा में प्रमोद सावंत के नाम पर मुहर लग चुकी है और 28 मार्च को सीएम के रूप में उनकी ताजपोशी होगी. एन बीरेन सिंह ने रविवार को लगातार दूसरी बार मणिपुर के सीएम पद की शपथ ली. वहीं, यूपी में विधायक दल की बैठक आज यानि गुरुवार को है, जिसमें योगी आदित्यनाथ का नाम चुना जाना लगभग तय है. ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी ने आखिर चारों राज्यों अपने पुराने मुख्यमंत्रियों पर ही क्यों भरोसा जताया है.

'मुख्यमंत्रियों को दोहराने के पीछे बीजेपी का मिशन 2024'

चार राज्यों के विधानसभा चुनाव बीजेपी भले भारी बहुमत से जीत गई हो, लेकिन बीजेपी ने अपनी उन कमजोरियों को भी समझ लिया है जो उसके सामने खड़ी हैं. केंद्र में दो बार के बाद लगातार तीसरी बार की सत्ता में वापसी बहुत मुश्किल होती है. यही वजह है कि देश के चार राज्यों के विधानसभा चुनाव जीतने के साथ ही बीजेपी ने 2024 लोकसभा चुनाव के लिए एक्शन प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है. बीजेपी लोकसभा चुनाव की चुनौतियों को समझते हुए अपने पुराने चेहरों पर ही दांव लगाना बेहतर समझा है. 

उत्तर प्रदेश, मणिपुर, गोवा और उत्तराखंड में कुल 89 संसदीय सीटें आती हैं, जिनमें से 71 सीटें बीजेपी और 3 सीट उसके गठबंधन के सहयोगी दल के पास हैं. 2019 में बीजेपी ने कुल 301 सीटें जीती थीं, उनमें से 23 फीसदी सीटें इन्हीं चारों राज्यों से हासिल की थीं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान साफ तौर पर कहा था कि 2022 का चुनाव 2024 का भविष्य को तय करने वाला है. ऐसे में सरकार गठन और नया मंत्रिमंडल 2024 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. खासकर यूपी में जहां पर 80 सीटें हैं, जिसमें से 2019 में बीजेपी ने 62 सीटें और 2014 में 71 सीटों पर कब्जा जमाया था. ऐसे में यूपी में योगी आदित्यनाथ सहित बाकी राज्यों में पुराने और अनुभवी मुख्यमंत्रियों पर ही दांव खेलना पसंद किया है.

Modi and Yogi

सत्ता में वापसी कराने में सीएम का योगादान

विधानसभा चुनाव में चारों राज्यों में बीजेपी को सत्ता में वापसी कराने में पीएम मोदी के साथ-साथ चारों मुख्यमंत्रियों की भी अहम भूमिका रही है. योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर यूपी में चुनाव लड़ा गया था तो उत्तराखंड में बीजेपी पुष्कर सिंह धामी की अगुवाई में विधानसभा चुनाव मैदान में उतरी थी. ऐसे ही गोवा और मणिपुर में भी बीजेपी पुराने सीएम को भले ही चेहरा न बनाया हो, लेकिन उन्हीं के कामों पर चुनाव लड़ी थी. चारों सीएम ने चुनाव प्रचार में जबरदस्त भूमिका निभाई और लोगों के बीच काम करने वाले नेता के रूप में छवि बनाई. 

यूपी में योगी और उत्तराखंड में धामी ने बीजेपी को सत्ता में वापसी कराकर यह मिथक तोड़ दिया है कि हर पांच साल में सरकारें बदल जाती हैं. इसीलिए धामी को अपनी सीट हारने के बाद भी सीएम बनाया गया है तो यूपी में आजादी के बाद पहली बार किसी सीएम की पांच साल तक सत्ता में रहने के बाद ताजपोशी होने जा रही है. वहीं, मणिपुर और गोवा में सीटें पिछली बार से ज्यादा बढ़ी हैं. गोवा में बहुमत से महज एक सीटें कम आई हैं जबकि मणिपुर में बहुमत से ज्यादा सीटें मिली है. 2017 के चुनाव में गोवा और मणिपुर में कांग्रेस से कम सीटें बीजेपी को मिली थी, लेकिन इस बार पार्टी नंबर एक पर रही. यही वजह है कि मणिपर में बीरेन सिंह और गोवा में प्रमोद सावंत को सत्ता की कमान एक फिर सौंपी गई है. 

केंद्रीय नेतृत्व के उम्मीदों पर खरे उतरे सीएम

बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने पांच साल पहले यूपी में सीएम योगी और मणिपुर में बीरेन सिंह को सत्ता की कमान सौंपी थी. जबकि, गोवा में मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद 2019 में प्रमोद सावंत को सीएम बनाया गया था तो उत्तराखंड में छह महीने पहले ही पुष्कर सिंह धामी को सीएम बनाया गया था. ऐसे में बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए मोदी सरकार की नीतियों और योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम बाखूबी तरीके से किया है, जिसका चुनाव में सियासी फायदा भी बीजेपी को मिला है.  पीएम मोदी ने चुनाव प्रचार में इस बात का उल्लेख भी करते दिखे हैं और मौजूदा सीएम की तरीफ भी की थी, जिसके बाद ही तय हो गया था कि सत्ता में वापसी पर ताजपोशी तय है. 

Modi and Dhami

बीजेपी फ्यूचर की लीडरशिप खड़ी कर रही

बीजेपी भविष्य के हिसाब से अपने नेतृत्व को तैयार के लिए सेकंड लाइन के नेताओं को मजबूत करने और उन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है. उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में नई सरकार के गठन के जरिए बीजेपी राज्यों में युवा और मजबूत क्षत्रप तैयार करने में जुटी है. बीजेपी को चार राज्यों में सत्ता मिली है, उसमें से तीन सीएम की उम्र 50 साल से कम है. उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की उम्र 49 साल,  उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी की उम्र 46 साल और गोवा में प्रमोद सावंत की उम्र 48 साल है जबकि मणिपुर में बीरेन सिंह की उम्र 61 साल है. इनमें धामी की ताजपोशी चुनाव हारने के बाद भी की गई है. 

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह कोई संयोग नहीं बल्कि एक प्रयोग है जो कि 50 साल से कम उम्र के इन नेताओं को दूसरी बार उनके राज्य की सत्ता सौंपी जा रही है. भविष्य को देखते हुए बीजेपी अपने युवा नेताओं के कद तराशने और इन्हें मजबूत बनाने की है. वह इसलिए कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर ये क्षत्रप अपने दम पर चुनावी गाड़ी खींच पाएं. बीजेपी से जुड़े लोग भी मानते हैं कि बीजेपी की सेकंड लाइन लीडरशिप को मजबूती से तैयार करने का दौर चल रहा है, जिसके तहत मोदी कैबिनेट में भी मंत्रियों की औसत उम्र 58 साल है. 

2024 से पहले कोई विरोध नहीं चाहती बीजेपी

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बीजेपी 2024 के चुनाव तक किसी तरह का कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाना चाहती है. इसीलिए विधानसभा चुनाव के बाद किसी तरह का कोई नया सियासी प्रयोग करने के बजाय पुराने चेहरों को ही सत्ता की कमान सौंपने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि बीजेपी मौजूदा सीएम को हटाकर किसी दूसरे नए चेहरे को मुख्यमंत्री बनाने की फैसला करती तो पार्टी में गुटबाजी और सियासी टकराव बढ़ सकता था. 2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुई बीजेपी अभी इस तरह का कोई भी फैसला नहीं करना चाहती, जिससे कि किसी तरह का मनमुटाव हो सके. इसीलिए पुष्कर धामी को चुनाव हारने के बाद भी सीएम की कुर्सी सौंपी गई है.

 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें