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महाराष्ट्र: राज ठाकरे और आदित्य के बाद अब कांग्रेस भी दौड़ी अयोध्या की ओर!

महाराष्ट्र में इस समय सभी राजनीतिक दल अयोध्या जाने की होड़ में लगे हैं. हाल ही में हनुमान चालीसा विवाद के बाद से राज्य की सियासत में हिंदुत्व का मुद्दा फिर गरमा गया है.

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महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी जाएंगे अयोध्या (फाइल फोटो) महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष भी जाएंगे अयोध्या (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अब अयोध्या जाने की होड़
  • महाराष्ट्र में हिंदुत्व का मुद्दा छाया

महाराष्ट्र में लाउडस्पीकर और हनुमान चालीसा विवाद में उलझे सभी राजनीतिक दल अब अयोध्या की ओर दौड़ पड़े हैं. 5 जून को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे अयोध्या जा रहे हैं तो शनिवार को खबर आई कि महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और सीएम उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे 10 जून को राम की नगरी अयोध्या पहुंच रहे हैं. लेकिन अब अयोध्या जाने की होड़ में कांग्रेस भी शामिल हो गई है. 

महाराष्ट्र के कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले भी जल्द ही आपको अयोध्या में नजर आने वाले हैं. मिली खबर के मुताबिक अयोध्या के दशरथ गद्दी के महंत बृज मोहन दास ने नाना पटोले के अयोध्या आने का न्योता दिया है. महंत ने महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यालय में जाकर नाना पटोले से मुलाकात भी की है. हालांकि पटोले की अयोध्या यात्रा की तारीख अभी तय नहीं हुई है. बता दें कि  एनसीपी प्रमुख शरद पवार के पोते रोहित पवार भी पिछले हफ्ते अयोध्या जाकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं.

महाराष्ट्र में अचानक क्यों बना 'हिंदुत्व' फिर मुद्दा 
मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने हाल ही में मस्जिदों पर लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाया और जवाब में हनुमान चालीसा के पाठ का ऐलान किया था. उसके बाद से हिंदुत्व का मुद्दा एक बार महाराष्ट्र में फिर चरम पर पहुंच गया है. निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और रवि राणा तो हनुमान चालीसा के मुद्दे पर जेल तक भी हो आए हैं. इसकी एक वजह शिवसेना का एनसीपी और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना भी हो सकता है. ये दोनों दल हमेशा से खुद को सेक्युलर दल दिखाने की कोशिश करते आए हैं. अब इन दोनों के साथ सरकार बनाने के बाद से शिवसेना की हिंदुत्व वाली धार कमजोर होती दिख रही है जिस पर कभी महाराष्ट्र में उसका एकक्षत्र अधिकार रहा है. 

ऐसे में राज ठाकरे की पूरी कोशिश है कि इस गैप को उनकी पार्टी आक्रामक तरीके से भर सकती है. लेकिन इस अंदेशा बाकी दलों को भी है. यही वजह है कि कोई महाराष्ट्र में कोई भी दल कम से कम खुद को हिंदुत्व के साथ न सही लेकिन विरोधी भी नहीं दिखना चाहता है. यही वजह है कि हनुमान चालीसा विवाद के बाद हिंदुत्व के ट्रैक पर जिस तरह से राज ठाकरे ने बढ़त ली है महाराष्ट्र में उनके विरोधी दल अयोध्या की रेस लगाकर उसकी भरपाई में जुटे हैं. 
 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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