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भारत

हर साल 31 मई को मनाया जाता है ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’

हर साल 31 मई को मनाया जाता है ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’
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1987 में विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एक प्रस्ताव के तहत विश्व तंबाकू निषेध दिवस (वर्ल्ड नो टोबैको डे) मनाने का निर्णय लिया गया था. निर्णय के तहत ही हर साल 31 मई को अंतरराष्ट्रीय तंबाकू निषेध दिवस के रूप में मनाया जाता है.
हर साल 31 मई को मनाया जाता है ‘वर्ल्ड नो टोबैको डे’
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भारत सरकार ने 2003 में एक अधिनियम पारित किया था, जिसके तहत कहा गया था कि कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान नहीं करेगा. इनमें सभागृह, भवनों, रेलवे स्टेशन, पुस्तकालय, अस्पताल, रेस्तरां, कोर्ट, स्कूल, कॉलेज आदि आते हैं. समय-समय पर इन नियमों में सुधार किए जाते रहे हैं. आजकल सभी सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध है.
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2003 में बने अधिनियम के तहत सार्वजनिक स्थलों पर भारतीय भाषाओं में बड़े अक्षरों में गैर-धूम्रपान क्षेत्र के बोर्ड लगाए जाएं. सिगरेट और तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन नहीं किया जाएगा. तीस कमरों के होटल या तीस से अधिक लोगों के बैठने की रेस्तरां में मालिक या मैनेजर ये तय करें कि धूम्रपान व गैर-धूम्रपान क्षेत्र अलग हों. लोगों को गैर-धूम्रपान क्षेत्र में जाने के लिए धूम्रपान वाले इलाके से न गुजरना पड़े.
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तंबाकू एवं अन्य तंबाकू उत्पाद- गुटखा, खैनी, जर्दा, तंबाकू वाले मसाले, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चुरट, सिगार 18 साल से कम के लोगों के लिए प्रतिबंधित है.
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क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान मनुष्य के लिए कितना हानिकारक है? 450 ग्राम तम्बाकू में निकोटीन नामक जहर की मात्रा लगभग 22 ग्राम से ज्यादा होती है. इसकी 6 ग्राम मात्रा से एक कुत्ता 3 मिनट में मर जाता है.
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डॉक्टरों का मानना है कि तम्बाकू से दांत कमजोर पड़ जाते हैं और समय से पहले ही गिर जाते हैं. इसके सेवन से दंत रोग हो जाते हैं. आंखों की ज्योति कम हो जाती है. आदमी बहरा और अन्धा हो जाता है. व्यक्ति नपुंसक भी हो सकता है. फेफड़ों की टीबी हो जाती है, जो मनुष्य को सब प्रकार से बर्बाद कर देती है और मृत्यु को निकट ला देती है. तम्बाकू के निकोटीन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, रक्त संचार मंद पड़ जाता है. अत: तम्बाकू निषेध दिवस पर प्रत्येक धूम्रपान करने वाले को उसका प्रयोग नहीं करने का संकल्प लेना ही चाहिए.

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जब धूम्रपान करते हैं तो उसका धुंआ पूरे श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है. जिसका प्रभाव अन्धपन और श्रवण ह्रास के रूप में प्रकट हो सकता है.  इसका सीधा सम्बन्ध मुंह से ही होता है, इससे दांतों में विकार, मसूड़ों में विकार और मुख कैंसर होने की पूरी-पूरी संभावना बन जाती है.
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अगर आप तंबाकू का उपयोग करते हैं और अपने मुंह को खोल कर देखें अगर वह पूरा नहीं खुल रहा है तो उसके लिए तुरंत डॉक्टर के पास जाकर सलाह ले सकते हैं. अगर मुंह के अन्दर दोनों ओर सफेद लाइनें या फिर सफेदी आ रही हैं तब भी आप कैंसर की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, लेकिन इसे रोका जा सकता है.
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भारत के लिए धूम्रपान कोई नई चीज नहीं है. आयुर्वेद के चरक तथा सुश्रुत जैसे हजारों वर्ष पूर्व रचे गए ग्रन्थों में धूम्रपान का विधान है. वहां पर उसका वर्णन औषधि के रूप में हुआ है. जैसे कहा गया है कि आम के सूखे पत्ते को चिलम जैसी किसी उपकरण में रखकर धुआं खींचने से गले के रोगों में आराम होता है. दमा तथा श्वास संबंधी रोगों में वासा के सूखे पत्तों को चिलम में रखकर पीना एक प्रभावशाली उपाय माना गया है.हमारे देश में भांग या विजया का चलन काफी प्राचीनकाल से है.
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पुराण और स्मृतियों में भी धूम्रपान को निषेध और उसके प्रयोग करने वाले के लिए लौकिक या पारलौकिक दण्ड मिलने का उल्लेख है. स्कन्द पुराण में एक स्थान पर कहा गया है, ‘स्वधर्म का आचरण करके जो पुण्य प्राप्त किया जाता है, वह धूम्रपान से नष्ट हो जाता है. इस कारण समस्त ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य आदि को इसका सेवन कदापि नहीं करना चाहिए.’
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शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग, जिससे कि सम्पूर्ण शरीर का संचालन होता है, वह है मष्तिष्क. तंबाकू में अवस्थित निकोटिन मनुष्य को अपना आदी बना लेता है. ये जब मष्तिष्क में प्रवेश करता है तो आपको लगता है की आप बहुत ही अच्छा अनुभव कर रहे हैं, तनाव मुक्त हो रहे हैं जब कि वह आपके मष्तिष्क को शिथिल कर देता है. इसके बाद की स्थिति में आप व्यग्र, उत्तेजित और हतोत्साहित हो जाते हैं.
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नवयुवकों में तम्बाकू के प्रयोग को रोकने का सबसे प्रभावकारी तरीका है कि तम्बाकू के भ्रामक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष विज्ञापनों पर पूर्णतय: प्रतिबन्ध लगा दिया जाए तथा तम्बाकू कंपनियों द्वारा प्रायोजित किसी भी सार्वजनिक समारोह पर भी प्रतिबन्ध लगा हो.
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भारत में तंबाकू एक अहम कृषि उत्पाद है और अर्थव्यवस्था में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. इसके राजनीतिक आयाम भी है. सबसे ज़्यादा तंबाकू की खेती करने वाले दो राज्यों आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में ये राजनीतिक मुद्दा भी है.
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तम्बाकू सेवन करने वाली महिलाओं में गर्भपात की दर सामान्य महिलाओं से तक़रीबन 15 फीसदी अधिक होती है. तम्बाकू सेवन के कारण महिलाओं में फेफड़ो का कैंसर,दिल का दौरा, सांस की बीमारी ,प्रजनन सम्बन्धी विकार, निमोनिया ,माहवारी से जुडी समस्याएं अधिक उग्र हो जाती है. तम्बाकू सेवन करने वाली महिलाओं में प्रसव समय से काफी पहले हो जाता है उनके बच्चे सामान्य औसत वजन से करीब 400 से 500 ग्राम कम वजन के पैदा होते है.
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हालांकि भारत सरकार ने व्यापक तम्बाकू नियंत्रण कानून बनाया है लेकिन आज के परिप्रेक्ष्य को देखते हुए हमें लिंग आधारित तम्बाकू नियंत्रण नीतिया बनाना होंगी और इसके लिए इन नीतियों में महिलाओ की तरफ विशेष ध्यान देने की जरुरत है साथ ही महिलाओ को निष्क्रिय धुम्रपान से बचाने के लिए सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध का कढ़ाई से पालन करवाना होगा और महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्थाओं को भी इस विषय से अवगत करना होगा.
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तंबाकू बोर्ड के अनुसार भारत में 72,50,00,00 किलो तंबाकू की पैदावार होती है. यह भी जान लें कि भारत तंबाकू निर्यात के मामले में ब्राज़ील,चीन, अमरीका, मलावी और इटली के बाद छठे स्थान पर है.
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एक ओर भारत समेत दुनियाभर के देशों में इसके ख़िलाफ़ अभियान चलाया जा रहा है, तो दूसरी ओर कंपनियां तंबाकू उत्पादों को युवाओं और महिलाओं में लोकप्रिय करने की कोशिश कर रही हैं. तंबाकू कंपनियां चबाए जाने, सूंघे जाने और हुक्कों में उपयोग किए जाने वाले उत्पादों को सिगरेट से कम नुक़सानदेह बता कर बेच रही हैं. तंबाकू विरोधी अभियानों पर दुनिया के देश जितना खर्च करते हैं, उससे पांच गुना ज्यादा वे तंबाकू पर टैक्स लगाकर कमाते हैं.
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चीन के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू निर्माता और उपभोक्ता देश है जहां करीब 24.1 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार से तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं.
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ग्लोबल एडल्ट टोबेको सर्वे (गैट्स) 2009-10 के अनुसार करीब 35 प्रतिशत भारतीय किसी न किसी प्रकार से तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं जिनमें 47 प्रतिशत पुरुष और 20.2 प्रतिशत महिलाएं हैं. भारत में धूम्रपान करने या तंबाकू खाने वाला कोई व्यक्ति हर साल इन उत्पादों को खरीदने में करीब 3600 रुपये खर्च करता है.
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अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान ने डब्ल्यूएचओ व स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के साथ मिलकर सर्वेक्षण किया है. जिसके मुताबिक भारत में 14 प्रतिशत वयस्क धूम्रपान करते हैं वहीं 25.9 प्रतिशत लोग तंबाकू चबाते हैं. डब्ल्यूएचओ का आंकलन है, ‘2030 तक इससे 80 लाख लोग मारे जा सकते हैं.’
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