नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार रविवार को अपने गृहनगर वडनगर के दौरे पर पहुंचे. पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा कि वडनगर 2500 साल से जीवित शहर रहा है. आइए, वडनगर के समृद्ध इतिहास के बारे में आपको बताते हैं...
वडनगर गुजरात का अत्यधिक प्राचीन शहर है. इसका इतिहास करीब 2500 साल पुराना है. पुरातत्ववेत्ताओं के मुताबिक, यहां हजारों साल पहले खेती होती थी. खुदाई के दौरान यहां से मिट्टी के बर्तन, गहने और तरह-तरह के हथियार बरामद किए गए हैं.
कई पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है कि यह हड़प्पा सभ्यता के पुरात्तत्वस्थलों में से एक है. हड़प्पा सभ्यता भारत की सबसे प्राचीनतम सभ्यता मानी जाती है.
वडनगर का जिक्र पुराणों में भी कई बार आया है. 7वीं शताब्दी में भारत आए चीनी यात्री ह्वेन त्सांग के यात्रा विवरण में भी वडनगर का भी उल्लेख मिलता है. इतिहास में वडनगर के कई नाम मिलते हैं. इनमें आनन्दपुर, स्नेहपुर और विमलपुर शामिल हैं.
ऐसा कहा जाता है कि प्राचीन समय में वडनगर गुजरात की राजधानी थी. यह
प्राचीन शहर अर्जुन बारी, नादीओल, अरथोल, घसकोल, पिथोरी और अमरथोल नाम के 6
गेटों से घिरा था. इनमें सबसे प्राचीन गेट अमरथोल है. कपिला नदी भी वडनगर
से होकर गुजरती है.
वडनगर में बौद्ध धर्म का भी प्रभाव दिखता है. यहां जैन गुफाएं और सोलंकी
शासकों के बनवाए स्मारक भी हैं. यहां एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक शर्मिष्ठा झील
है.
वडनगर में ही गायिका ताना और रीरी का जन्म भी हुआ था. जब तानसेन ने अकबर दरबार में राग दीपक गाया था तो उनका शरीर पूरी तरह से झुलस गया था. तब इन दोनों बहनों के गाए राग मलहार के बाद उनका ताप कम हुआ था.
वडनगर में कई ऐतिहासिक स्थल भी हैं. यहां कई देवी-देवताओं के मंदिर हैं. 15वीं शताब्दी में बना हुआ हाटकेश्वर मंदिर काफी प्रसिद्ध है.