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24 घंटे में बना डाली 500 मीटर सड़क, रात-दिन चली JCB... गांववालों ने पूरी की शहीद की इच्छा, PHOTOS

शहीद विजय कुमार के भाई ने बताया कि रविवार सुबह परिजनों को विजय कुमार के शहीद होने की सूचना मिली थी. इसके बाद ग्रामीण इकट्ठे हुए और सभी ने श्मशान घाट तक सड़क बनाने का निर्णय लिया. इसके लिए ग्रामीण खुशी-खुशी जमीन देने को भी राजी हो गए. लेह-लद्दाख से शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने से पहले गांव वालों ने दिन-रात जेसीबी लगाकर सड़क तैयार कर दी. 

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सड़क का नाम 'शहीद विजय कुमार मार्ग' रखा गया
सड़क का नाम 'शहीद विजय कुमार मार्ग' रखा गया

हिमाचल प्रदेश के शिमला में शहीद के सम्मान में गांव वालों ने एक ऐसी मिसाल पेश की जिसकी चारों ओर चर्चा हो रही है. लोगों ने शहीद की अंतिम यात्रा के लिए गांव से श्मशान घाट तक न सिर्फ सड़क बनाई बल्कि इसके लिए अपनी जमीन भी दान दी. गौर करने वाली बात यह है कि सड़क बनाने का काम 24 घंटे के अंदर पूरा कर लिया गया. इस सड़क का नाम शहीद के नाम पर रखा गया है. शहीद की इच्छा थी कि गांव से श्मशान घाट तक सड़क का निर्माण हो जाए ताकि शव यात्रा के दौरान लोगों को तकलीफ न हो.  

लद्दाख हादसे में हुए थे शहीद 

दरअसल, तीन दिन पहले लद्दाख में सेना का वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जिसमें 9 जवान शहीद हुए थे. इन शहीदों में शिमला ग्रामीण के विजय कुमार भी शामिल थे. हवलदार विजय बेहद ही साधारण परिवार से थे. उन्होंने करीब 17 साल सेना में सेवा दी. जैसे ही उनके शहीद होने की खबर गांव तक पहुंची पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई. विजय कुमार अपने पीछे 75 वर्षीय पिता बाबूराम, 65 साल की माता कौशल्या, पत्नी नीलम और दो बच्चों को छोड़ गए हैं. 

'शहीद विजय कुमार मार्ग'

शिमला ग्रामीण के डिमन गांव के रहने वाले हवलदार विजय कुमार के सम्मान में ग्रामीणों ने मिसाल पेश की. ग्रामीणों ने शहीद की अंतिम यात्रा के लिए गांव से श्मशान घाट तक न केवल 500 मीटर लंबी सड़क बनाई, बल्कि इसके लिए अपनी जमीनें भी दान दीं. इस सड़क को बनाने का काम कुछ ही घंटों में पूरा किया गया. इसका नाम शहीद विजय कुमार मार्ग रखा गया है.  

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शहीद विजय कुमार का अंतिम संस्कार

शहीद विजय कुमार के भाई ने बताया कि रविवार सुबह परिजनों को विजय कुमार के शहीद होने की सूचना मिली थी. इसके बाद ग्रामीण इकट्ठे हुए और सभी ने श्मशान घाट तक सड़क बनाने का निर्णय लिया. इसके लिए ग्रामीण खुशी-खुशी जमीन देने को भी राजी हो गए. लेह-लद्दाख से शहीद का पार्थिव शरीर गांव पहुंचने से पहले ग्रामीणों ने दिन-रात जेसीबी लगाकर सड़क तैयार कर दी. 

शहीद की इच्छा को किया पूरा 

राजकुमार ने आगे बताया कि शहीद विजय कुमार की इच्छा थी कि उनके गांव से श्मशान घाट तक सड़क होनी चाहिए, ताकि किसी की भी अंतिम यात्रा कष्टकारी न हो. क्योंकि डिमन गांव से श्मशान घाट तक संकरी कच्ची अस्थाई सड़क थी. 

गांव वालों ने रातोरात बनाई सड़क

हालांकि, उनके जिंदा रहते हुए तो यह ख़्वाहिश पूरी नहीं हो सकी. मगर, शहादत के 24 घंटे के भीतर ग्रामीणों ने 500 मीटर से भी ज्यादा लंबी सड़क बना डाली. इससे विजय कुमार की शव यात्रा गांव की संकरी पगडंडी के बजाय सड़क से होते हुए श्मशान घाट तक पहुंची, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए. बीते दिन उनका अंतिम संस्कार किया गया. 


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