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Vice President Jagdeep Dhankhar: वकालत से सियासत में आए, बंगाल की राजनीति में रहा अहम रोल, जानें कौन हैं नए उपराष्ट्रपति

71 वर्षीय जगदीप धनखड़ देश के अगले उपराष्ट्रपति चुनाव होंगे. उपराष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को पराजित कर दिया. आंकड़ों के लिहाज से राष्ट्रपति चुनाव की तरह ये चुनाव भी एकतरफा नजर आ रहा था. किसानी से लेकर वकालत तक का सफर तय करने वाले धनखड़ देश के पहले ओबीसी उपराष्ट्रपति होंगे.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • राजस्थान के झुंझुनू जिले के कैथाना गांव में हुआ था जन्म
  • देश के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार रहे धनखड़
  • 1989 में पहली बार चुने गए थे सांसद

Vice President Jagdeep Dhankhar: देश को आज नया उपराष्ट्रपति (Vice President of India) मिल गया है. एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने शानदार और बड़े अंतर से जीत दर्ज की है. उपराष्ट्रपति (Vice President) पद के लिए 6 अगस्त यानी कि शनिवार को मतदान और इसी दिन मतगणना भी हुई. इस दौरान 725 वोट डाले गए, जिनमें से 528 वोट एनडीए उम्मीदवार जगदीप धनखड़ को मिले और 182 वोट विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को मिले, जबकि 15 वोट अमान्य पाए गए. आंकड़ों के लिहाज से राष्ट्रपति चुनाव की तरह ये चुनाव भी एकतरफा नजर आ रहा था. 71 वर्षीय धनखड़ की जीत शुरू से ही सुनिश्चित लग रही थी. वह राजस्थान के प्रभावशाली जाट समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और राजस्थान में जाट बिरादरी को आरक्षण दिलाने में इनकी अहम भूमिका रही थी.

18 मई 1951 को राजस्थान के छोटे से जिले झुनझुनू के कैथाना गांव में जन्मे जगदीप धनखड़ के देश के दूसरे सबसे सर्वोच्च पद तक पहुंचने तक का सफर काफी दिलचस्प है. उनके पिता का नाम गोकल चंद और मां का नाम केसरी देवी है. जगदीप अपने चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आते हैं. उन्होंने गांव के ही सरकारी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की. फिर सैनिक स्कूल में पढ़ाई के बाद उन्होंने राजस्थान के प्रतिष्ठित महाराज कॉलेज, जयपुर से ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर फिजिक्स में BSE की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने साल 1978 में जयपुर यूनिवर्सिटी में एलएलबी कोर्स में एडमिशन लिया.

देश के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार रहे धनखड़

जगदीप धनखड़ ने कानून की डिग्री लेने के लेने बाद वकालत शुरू कर दी और साल 1990 में उन्हें राजस्थान हाईकोर्ट में सीनियर एडवोकेट का ओहदा दिया गया. धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट से लेकर देश की कई हाईकोर्ट में वकालत की प्रैक्टिस की है. साल 1988 तक वह देश के प्रतिष्ठित वकीलों में शुमार हो गए थे. 

1989 में पहली बार बने थे सांसद

धनखड़ का राजनीतिक करियर करीब 30 वर्षों का है. साल 1989 में वह सक्रिय राजनीति में आए और इसी वर्ष 9वीं लोकसभा के लिए झुनझुनू से जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतकर पहली बार सांसद चुने गए. 1990 में वह चंद्रशेखर की सरकार में संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. इसके बाद उन्होंने राजस्थान की राजनीति में भी हाथ आजमाए. 1993 से लेकर 1998 तक वह विधायक भी रहे. 

2019 में बने पश्चिम बंगाल के गवर्नर

केंद्र सरकार ने 20 जुलाई 2019 को धनखड़ को पश्चिम बंगाल का गवर्नर नियुक्त किया था. अपने बयानों और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ '36 के आंकड़ों' के लिए वह लगातार सुर्खियों में रहे हैं. उनके और ममता बनर्जी के बीच खुलकर मतभेद नजर आए थे. पश्चिम बंगाल सरकार बतौर राज्यपाल जगदीप धनखड़ को राज्य के निजी विश्वविद्यालयों में 'अतिथि' या 'विजिटर' के तौर पर हटाने के लिए कानून में संशोधन करने के बाद उन्हें उस पद से हटा दिया था.  

बीजेपी ने क्यों बनाए था एनडीए के उम्मीदवार?

राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो अगामी विधानसभा चुनाव और 2024 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए बीजेपी ने जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार घोषित किया था. भाजपा किसानों को यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उनकी पार्टी किसान समर्थक है. इसके अलावा पार्टी ने जाट फैक्टर के मद्देनजर भी धनखड़ को चुना. कारण, 2023 और 2024 में राजस्थान और हरियाणा विधानसभा चुनाव होने हैं, जहां जाट मतदाताओं की बड़ी संख्या है. जिसके जरिए बीजेपी का जाट वोटरों को भी साधने का प्रयास है.

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