MP News: उज्जैन महाकाल मंदिर के पुजारियों ने फिल्म ओह माय गॉड-2 (OMG-2) के अभिनेता अक्षय कुमार को कानूनी नोटिस भेजा है. पुजारियों का कहना है कि फिल्म में भगवान शिव को दुकान से कचौड़ी खरीदते दिखाया गया है. यह दृश्य श्रद्धालुओं को आहत करता है. साथ ही अंदेशा जताया है कि फिल्म में कई जगह भगवान के रूप को गलत तरीके से प्रदर्शित किया गया है. वहीं, सेंसर बोर्ड ने फिल्म को 'ए' सर्टिफिकेट दिया है. इसको लेकर महाकाल मंदिर के पुजारियों का मानना है कि ओएमजी 2 में अश्लील फिल्मों की भरमार है.
महाकाल मंदिर के महेश पुजारी ने विरोध जताते हुए कहा कि महाकालेश्वर मंदिर पर फिल्माई गई OMG-2 पर कुछ दृश्य ऐसे हैं जिनके कारण धार्मिक भावना आहत हो रही है. इसको लेकर जिला कलेक्टर और जिला अदालत में भी एक आवेदन लगाया है.
पुजारियों ने कहा कि OMG2 के ट्रेलर में शिव के स्वरूप को एक कचौड़ी खरीदने वाले के रूप में दिखाया गया है. यही नहीं, दुकानदार उनसे रुपए मांगता है और कहता है कि 'आशीर्वाद से काम नहीं चलेगा, रुपए दीजिए.' इस दृश्य से हमें ठेस पहुंची है. साथ ही सनातन धर्म की भावनाएं आहत हुई हैं. इसलिए हम इस फिल्म का विरोध करते हुए यह मांग करते हैं कि जितने भी महाकाल से संबंधित दृश्य हैं, वो सारे इस फिल्म में से हटाया जाएं.
महाकाल मंदिर के पुजारियों का कहना है कि इस फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिला है और यह फिल्म केवल वयस्क लोग देख सकते हैं. इसमें शिवजी और महाकाल से संबंधित जो भी दृश्य हैं, उन्हें हटाया जाना चाहिए. इसके लिए उज्जैन में होने वाली जनसुनवाई में भी आवेदन दिया है. साथ ही फिल्म मेकर्स को लीगल नोटिस भिजवाया है. मामले में जब उज्जैन एडीएम अनुकूल जैन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि तथ्यात्मक जांच की जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई करेंगे.
काशी के विद्वानों ने कचौड़ी को लेकर क्या कहा?
कचौड़ी के दृश्य को लेकर उज्जैन के महाकाल मंदिर की तरफ से अक्षय कुमार सहित फिल्म यूनिट को लीगल नोटिस भेजा गया है. ऐसे में वाराणसी के पंडित-पुजारियों और विद्वानों से राय ली गई. जहां दिन की शुरुआत ही पूड़ी-कचौड़ी और जलेबी के साथ होती है. भोले शंकर को पूड़ी-कचौड़ी का भोग भी लगाया जाता है. काशी के विद्वानों और आम लोगों से जब इस विषय पर बात की गई तो सभी की मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली.
मंदाकिनी तट काशी पर स्थित महादेवी काली मंदिर के महंत अश्विनी पांडेय ने कहा, काशी विश्वनाथ मंदिर में तो यह परंपरा है कि दोपहर की आरती के समय भोग में कच्चे भोजन यानी दाल-चावल, रोटी का भोग लगता है और पूर्णमासी के दिन पक्के भोजन यानी पूड़ी-सब्जी-हलवा इत्यादि का भोग लगता है. वहीं, एकादशी के दिन भगवान को फलाहार चढ़ाया जाता है. भगवान के भोजन में सिर्फ प्याज-लहसुन जैसी तामसिक खाद्य सामग्री का उपयोग नहीं होता है. इसलिए कचौड़ी को लेकर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. भगवान तो केवल भाव के भूखे हैं.
हालांकि, मंदिर के महंत ने आगे कहा कि फिल्म में भगवान को दुकान से कचौड़ी खरीदते दिखाया जाना जरूर आपत्तिजनक है. यह भावनाओं को ठेस पहुंचाता है. फिल्म इंडस्ट्री को सोच समझकर ही भगवान से जुड़े दृश्यों को फिल्माना चाहिए.