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चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक! तीन लाख में बुक किया था कोच, रेलवे ने दी ये सफाई

सोशल मीडिया पर वायरल ट्रेन में रुद्राभिषेक के वीडियो पर उत्तर रेलवे ने सफाई दी है. रेलवे के मुताबिक, पूजा किसी सामान्य कोच में नहीं बल्कि आईआरसीटीसी के माध्यम से 3 लाख 08 हजार 580 रुपये में व्यावसायिक रूप से बुक किए गए सैलून कोच में हुई थी. यह कोच 10 जुलाई को पश्चिम एक्सप्रेस से नई दिल्ली से मुंबई भेजा गया था. रेलवे ने कहा कि सुरक्षा और परिचालन नियमों से कोई समझौता नहीं किया गया.

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चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक का वीडियो खूब वायरल हाे रहा है (Photo ITG)
चलती ट्रेन में रुद्राभिषेक का वीडियो खूब वायरल हाे रहा है (Photo ITG)

सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय रेलवे के एक सैलून कोच का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में ट्रेन के अंदर विधि-विधान से रुद्राभिषेक और पूजा-अर्चना होती दिखाई दे रही है. वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि क्या अब चलती ट्रेन में धार्मिक अनुष्ठान भी कराए जा सकते हैं? क्या रेलवे ने इसकी अनुमति दी थी या यह नियमों का उल्लंघन था?

विवाद बढ़ने के बाद उत्तर रेलवे को आधिकारिक सफाई जारी करनी पड़ी. रेलवे ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो किसी सामान्य यात्री कोच का नहीं, बल्कि व्यावसायिक रूप से बुक किए गए विशेष सैलून कोच का है. संबंधित पार्टी ने इस कोच को आईआरसीटीसी के माध्यम से करीब 3.08 लाख रुपये का भुगतान कर विधिवत बुक कराया था. रेलवे ने यह भी कहा कि इस पूरी घटना में सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया और किसी यात्री को कोई नुकसान नहीं पहुंचा.

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ रुद्राभिषेक का वीडियो

वायरल वीडियो में एक पुजारी विशेष पूजा-पाठ और रुद्राभिषेक करते नजर आते हैं. कोच के अंदर धार्मिक अनुष्ठान की पूरी व्यवस्था दिखाई देती है. वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि क्या रेलवे ने ट्रेन के अंदर इस तरह के धार्मिक आयोजन की अनुमति दी है. कुछ लोगों ने इसे आस्था से जोड़कर देखा, जबकि कुछ ने रेलवे के नियमों और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए. मामला बढ़ने के बाद रेलवे ने पूरे घटनाक्रम पर अपना पक्ष सार्वजनिक किया.

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रेलवे बोला- यह सामान्य कोच नहीं, बुक किया गया सैलून था

उत्तर रेलवे ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई दे रहा कोच कोई सामान्य यात्री डिब्बा नहीं था. रेलवे के अनुसार, यह विशेष सैलून कोच था, जिसे 8 जुलाई 2026 को आईआरसीटीसी (IRCTC) के माध्यम से व्यावसायिक आधार पर बुक किया गया था. रेलवे ने बताया कि संबंधित पार्टी ने इस बुकिंग के लिए 3,08,580 रुपये का अग्रिम भुगतान किया था. सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद ही सैलून कोच उपलब्ध कराया गया था. रेलवे के मुताबिक, इस विशेष सैलून कोच को 10 जुलाई 2026 को ट्रेन संख्या 12926 पश्चिम एक्सप्रेस के साथ जोड़ा जाना था. यह यात्रा नई दिल्ली (NDLS) से बांद्रा टर्मिनस (BDTS), मुंबई तक एकतरफा निर्धारित थी. उत्तर रेलवे ने बताया कि परिचालन की व्यवहारिकता (Operational Feasibility) के आधार पर 10 जुलाई को इस सैलून कोच के व्यावसायिक संचालन की अनुमति जारी की गई थी.

रेलवे ने सुरक्षा पर दिया जोर

रेलवे ने अपने बयान में साफ कहा कि उसकी पहली प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा, समयबद्ध यात्रा और सुविधा सुनिश्चित करना है. रेलवे ने कहा कि किसी भी व्यावसायिक बुकिंग के बावजूद सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाता. बयान में यह भी स्पष्ट किया गया कि वायरल वीडियो में दिख रहा रुद्राभिषेक उसी पार्टी द्वारा बुक किए गए सैलून कोच के भीतर कराया गया था और इस पूरी घटना में किसी भी व्यक्ति को कोई चोट नहीं आई.

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क्या होता है रेलवे का सैलून कोच?

भारतीय रेलवे में सैलून कोच एक विशेष श्रेणी का डिब्बा होता है, जिसे निर्धारित नियमों और शुल्क के तहत विशेष अवसरों बुक कराया जा सकता है. ऐसे कोच सामान्य यात्री डिब्बों से अलग होते हैं और इनमें सीमित लोगों के लिए यात्रा की सुविधा उपलब्ध रहती है. निर्धारित शुल्क जमा करने और रेलवे की स्वीकृति मिलने के बाद इनका उपयोग किया जा सकता है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, वायरल वीडियो भी ऐसे ही एक अधिकृत रूप से बुक किए गए सैलून कोच का है.

कुछ दिन पहले हनीमून सूट बना था फर्स्ट एसी कोच

रुद्राभिषेक वाला वीडियो सामने आने से पहले भारतीय रेलवे एक अन्य वायरल वीडियो को लेकर भी चर्चा में रहा था. मामला दक्षिण मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाली ट्रेन संख्या 11002 नांदीग्राम एक्सप्रेस का था. 6 जुलाई 2026 को यात्रा कर रहे एक नवविवाहित दंपति ने ऑनलाइन एक निजी डेकोरेटर को बुक किया था. उद्देश्य था कि फर्स्ट एसी कूपे को विशेष अंदाज में सजाकर यात्रा को यादगार बनाया जाए. फूल, गुब्बारे और 'आई लव यू' से सज गया था पूरा कूपा.  जब ट्रेन महाराष्ट्र के जालना स्टेशन पर पहुंची, तब डेकोरेटर बिना रेलवे की अधिकृत अनुमति के ट्रेन में प्रवेश कर गया. कुछ ही मिनटों में उसने पूरे फर्स्ट एसी कूपे को फूलों, गुलाब की पंखुड़ियों, लाल-सफेद गुब्बारों और रंगीन लाइटों से सजा दिया. सामने बड़े अक्षरों में I Love You भी लिखा गया. सजावट का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड होते ही वायरल हो गया. शुरुआत में लोगों ने इसे रोमांटिक सरप्राइज बताया, लेकिन बाद में मामला रेलवे प्रशासन तक पहुंच गया.

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रेलवे ने बताया क्यों लिया था एक्शन 

दक्षिण मध्य रेलवे ने बाद में स्पष्ट किया कि विवाद सजावट का नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक का था. रेलवे के अनुसार, डेकोरेटर का ट्रेन में प्रवेश पूरी तरह अनधिकृत था. बिना अनुमति किसी बाहरी व्यक्ति का ट्रेन के अंदर जाकर व्यावसायिक गतिविधि करना गंभीर सुरक्षा उल्लंघन माना गया. रेलवे ने कहा कि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. इस मामले में रेलवे ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ड्यूटी पर मौजूद संबंधित कर्मचारी को निलंबित कर दिया. साथ ही विभागीय जांच के आदेश दिए गए ताकि यह पता लगाया जा सके कि डेकोरेटर ट्रेन तक कैसे पहुंचा, उसे कोच में प्रवेश किसकी जानकारी में मिला और सुरक्षा जांच के दौरान उसे क्यों नहीं रोका गया. रेलवे ने निजी डेकोरेटर के खिलाफ भी रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया. उस पर ट्रेन में अनधिकृत प्रवेश, बिना टिकट यात्रा और रेलवे परिसर में ट्रेसपासिंग जैसे आरोप लगाए गए.

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