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'पब्लिसिटी के लिए मत डालिए याचिका...', न्यायिक सुधार की मांग वाली याचिका पर बोले CJI

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका में बदलाव और हर केस को एक साल में निपटाने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने से साफ मना कर दिया है. चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को समझाते हुए उनकी याचिका को पब्लिसिटी पाने का जरिया करार दिया है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में जांच एजेंसियों की भी अहम भूमिका होती है.

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जनहित याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार. (Photo: PTI)
जनहित याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार. (Photo: PTI)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से साफ इनकार कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ता ने न्यायिक सुधारों और कोर्ट में मामलों को तय समय-सीमा में निपटाने की मांग की थी. कोर्ट ने इस याचिका को पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन करार दिया और याचिकाकर्ता को निर्देश देते हुए कहा कि आप लॉन में मौजूद कैमरामैन से लिए याचिका मत डालिए, अगर आपके पास कोई सुझाव है तो भेज दीजिए.

याचिका दायर करने वाले व्यक्ति ने अपनी दलीलें पूरी तरह हिंदी में रखीं. उन्होंने मांग की थी कि सभी मामलों को एक निश्चित समय-सीमा (जैसे एक साल) में निपटाया जाए और न्यायपालिका में बड़े सुधार किए जाएं.

इस पर सीजेआई ने याचिकाकर्ता को हिंदी में ही समझाते हुए कहा कि ऐसी याचिका दायर करने की जरूरत नहीं है, बल्कि आप चाहें तो सीधे मुझे पत्र लिखकर अपने सुझाव भेज सकते हैं.

'कैमरामैन के लिए न डालाने याचिका'

कोर्ट ने इस याचिका को पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन (प्रचार के लिए दायर याचिका) करार देते हुए कहा, 'आप लॉन में मौजूद कैमरामैन के लिए याचिका मत डालिए, कुछ सुझाव है तो मुझे पत्र लिख दीजिए.'

चीफ जस्टिस ने ये भी कहा कि आप देश की न्यायपालिका में बदलाव चाहते हैं तो ऐसी PIL डालने की जरूरत नहीं है.आप बस एक पत्र मुझे लिखकर भेज दीजिए.

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'हर दिन SHO को कोर्ट नहीं बुला सकते'

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को समझाया कि न्याय में देरी के लिए केवल कोर्ट जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि इसमें जांच एजेंसियों की भी बड़ी भूमिका है. आप हर केस को समय सीमा में निपटाने की बात कर रहे हैं. आपको समझना होगा कि इसमें जांच एजेंसी का भी रोल है. पुलिस और कोर्ट का काम दोनों अलग-अलग होता है. हम हर दिन SHO को बुलाकर जांच के बारे में नहीं पूछ सकते. आप कह रहे हैं कि एक साल में हर कोर्ट फैसला दें. आपको अंदाजा भी नहीं है कि इसके लिए कितने कोर्ट की जरूरत होगी!'

बदलाव चाहिए तो पत्र लिखें
 

चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ता को सुझाव दिया कि अगर आप वाकई न्यायपालिका में बदलाव चाहते हैं, तो आपको इस तरह की जनहित याचिकाएं डालने की जरूरत नहीं है फुल स्टॉप आप बस एक पत्र मुझे लिखकर भेज दीजिए, हम उन सुझावों पर विचार करेंगे.

अंत कोर्ट ने उनकी याचिका को पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका करार देते हुए कहा कि आप लॉन में मौजूद कैमरामैन के लिए याचिका मत डालिए, कुछ सुझाव है तो मुझे पत्र लिख दीजिए.

वहीं, इस याचिका में भारत में न्यायपालिका की कार्यप्रणाली, लंबित मामलों की समस्या और जनहित याचिकाओं के दुरुपयोग पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है.

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