मध्य प्रदेश में भारतीय वायुसेना के दो फाइटर जेट सुखोई-30 और मिराज-2000 दुर्घटनाग्रस्त हो गए जिसमें एक पायलट की मौके पर ही मौत हो गई. रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक यह हादसा हवा में दोनों लड़ाकू विमानों के बीच टक्कर की वजह से हुआ है.
हादसे को लेकर वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया है कि शुरुआती तौर पर यह पता चला है कि दोनों फाइटर जेट ने ग्वालियर एयरबेस से उड़ान भरी थी. सुखोई के पायलट दुर्घटना से करीब 120 किलोमीटर पहले इजेक्ट (विमान से बाहर निकलना) हो गए थे, पायलट के इजेक्ट कर जाने के बाद विमान नीचे आने तक हवा में उड़ता रहा और फिर मुरैना में दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
ऐसे में हम आपको बताते हैं कि जिन दो फाइटर जेट के बीच हवा में ये टक्कर हुई है उनकी क्षमता क्या है और वो कितने मारक हैं. सबसे पहले हम बात करते हैं मिराज-2000 फाइटर जेट की जिसे इंडियन एयरफोर्स का बेहतरीन लड़ाकू विमान माना जाता है. हमारे दोनों पड़ोसी पाकिस्तान और चीन इस फाइटर जेट से डरते हैं.
Mirage 2000 जिससे डरते है पाक-चीन
मिराज 2000 दुनिया के सबसे घातक फाइटर जेट्स में से एक है क्योंकि इसमें काफी ज्यादा मात्रा में हथियार लगाए जाते हैं. इसमें 30 मिलीमीटर की दो रिवॉल्वर कैनन लगती हैं. जो प्रति मिनट 125 राउंड फायर करती है. इसमें कुल मिलाकर 9 हार्ड प्वाइंट्स होते हैं, जिसमें से चार पंखों के नीचे और 5 ईंधन टैंक के नीचे.
मिराज 2000 (Mirage 2000) फाइटर जेट्स को उड़ाने के लिए सिर्फ एक पायलट की जरूरत होती है. इस जेट की लंबाई 47.1 फीट होती है. विंगस्पैन 29.11 फीट होती है. ऊंचाई 17.1 फीट होती है. हथियारों और ईंधन के साथ इसका वजन 13,800 किलोग्राम हो जाता है.

मिराज 2000 (Mirage 2000) फाइटर जेट में एक SNECMA M53-P2 आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगा होता है, जो इसे अधिकतम 95.1 किलोन्यूटन की ताकत देता है. जिसकी वजह से अधिकतम 2336 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति से उड़ता है. यह गति ही इसे घातक बनाती है.
यह फाइटर जेट एक बार में 1550 किलोमीटर की रेंज तक उड़ान भर सकता है. डॉग फाइट्स के दौरान यह वर्टिकल यानी सीधी उड़ान 56,100 फीट प्रति मिनट की दर से चढ़ता है. मिराज 2000 में 68 मिलिमीटर के Matra अनगाइडेड रॉकेट पॉड्स लगे होते हैं. हर पॉड्स में 18 रॉकेट होते हैं.
अब बात करते हैं हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (Air to Air Missiles) की. मिराज में 6 MBDA MICA इंफ्रारेड/रेडियो फ्रिकेंव्सी सीकर मिसाइलें, 2 Matra R550 Magic-2 या 2 मात्रा सुपर 530डी मिसाइलें या फिर भारत में बनी अस्त्र (Astra) मिसाइल लगा सकते हैं.

इसके अलावा मिराज 2000 (Mirage 2000) 2 एम.30 एक्सोसेट या 1 स्कैल्प ईजी मिसाइल तैनात कर सकते हैं. इसमें एमके.82 अनगाइडेड बम लगता है. जबकि Spice 2000 जैसे 8 गाइडेड बम लगाए जा सकते हैं. इसी स्पाइस बम से बालाकोट एयरस्ट्राइक को पूरा किया गया था. यानी बम को टारगेट दिखा दो बस उसके बाद उसका अंत तय है.
Sukhoi-30MKI फाइटर जेट की ताकत
अब बात करते हैं सुखोई 30MKI की जो सुखोई-30एमकेआई रूस के सुखोई-27 का एडवांस्ड वर्जन है. इंडियन एयरफोर्स के पास 272 सुखोई-30 एमकेआई हैं. तेजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर यह 2009 से तैनात हैं. यह इकलौता ऐसा फाइटर जेट है, जिसे अलग-अलग देश अपने हिसाब से ढाल लेते हैं. या बदलाव करवाते हैं. ताकि अपने देश की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से उसकी तैनाती कर सकें.
भारत में सुखोई-30 एमकेआई को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बनाती है. रूस के सुखोई कॉर्पोरेशन ने इस फाइटर जेट को 1995 में बनाना शुरू किया था. 1997 में HAL ने इसका लाइसेंस लिया था.
सुखोई-30 एमकेआई में 30mm की एक ग्रिजेव-शिपुनोव ऑटोकैनन लगी है जो एक मिनट में 150 राउंड फायर करती है. यानी दुश्मन का विमान, ड्रोन या हेलिकॉप्टर बच नहीं सकते. इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स लगे हैं यानी वो जगह जहां पर हथियार लगाया जाता है. इसमें 4 तरह के रॉकेट्स लगा सकते हैं. चार तरह की मिसाइल और 10 तरह के बम लग सकते हैं. या फिर इन सबका मिश्रण लगाया जा सकता है.
सुखोई-30एमकेआई के हार्डप्वाइंट्स में हथियारों को दागने की सुविधा ज्यादा है. अगर मल्टीपल रैक्स लगाए जाएं तो इसमें 14 हथियार लगा सकते हैं. यह कुल 8130 KG वजन का हथियार उठा सकता है. इस फाइटर जेट में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात हो सकती हैं.
सुखोई की लंबाई 72 फीट है. विंगस्पैन 48.3 फीट है. ऊंचाई 20.10 फीट है. इसका वजन 18,400 KG है. इसमें लीयुल्का एल-31एफपी आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगे हैं, जो उसे 123 किलोन्यूटन की ताकत देता है.