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ग्राउंड रिपोर्टः चीन से तनाव के बीच सेना की तैयारी, ठंड से पहले लद्दाख में जरूरी चीजों की स्टॉकिंग

भीषण रूप से पड़ने वाली ठंड के मौसम में किसी तरह की कमी न होने पाए इसे ध्यान में रखते हुए सेना ने पिछले चार महीनों में लद्दाख में बढ़ी हुई सैन्य तैनाती को देखते हुए एक साल के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक वस्तुओं की स्टॉकिंग कर ली है.

लद्दाख में भारतीय सैनिकों के लिए की जा रही खास तैयारी (फोटो-अभिषेक) लद्दाख में भारतीय सैनिकों के लिए की जा रही खास तैयारी (फोटो-अभिषेक)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पिछले 4 महीने से लद्दाख में दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति
  • ठंड शुरू होने से पहले भारतीय सेना कर रही एक साल की स्टॉकिंग
  • टेंट, गरम कपड़े, ईंधन और रसद पर्याप्त मात्रा में पहुंचाए गए

चीन के साथ लद्दाख में लंबे समय से बने तनावपूर्ण माहौल के जल्द खत्म होने के आसार नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में एलएसी पर सर्दियों का मौसम आने से पहले भारतीय सेना अपनी तरफ से पूरी तैयारी में जुटी हुई है. सेना ने इसके लिए राशन, गरम कपड़े, उच्च ऊंचाई वाले टेंट और ईंधन को बड़े पैमाने पर स्टॉक करना शुरू कर दिया है.

सूत्रों ने कहा कि भीषण रूप से पड़ने वाली ठंड के मौसम में किसी तरह की कमी न होने पाए इसे ध्यान में रखते हुए सेना ने पिछले चार महीनों में लद्दाख में बढ़ी हुई सैन्य तैनाती को देखते हुए एक साल के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक वस्तुओं की स्टॉकिंग कर ली है.

उच्च गुणवत्ता का राशन

लेह स्थित 14 कोर के चीफ ऑफ स्टाफ मेजर जनरल अरविंद कपूर ने कहा कि हमारा लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर इतने स्मार्ट तरीके से बनाया गया है कि बाहर से किसी तरह की सूचना मिलते ही प्लग एंड प्ले मोड के तहत प्रभावी तरीके से यूनिट में शामिल हो सकते हैं. आज फ्रंटलाइन पर तैनात हर जवान को अत्याधुनिक शीतकालीन कपड़े और तंबू दिए गए हैं.

उन्होंने कहा कि प्रत्येक अधिकारी, जूनियर कमीशन अधिकारी, जवान को सबसे अच्छी गुणवत्ता का राशन दिया जाता है जो अत्यधिक पोषण और उच्च कैलोरी वाले हैं. आज, पूर्वी लद्दाख में तैनात सैनिकों ने यहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है.

भारतीय वायुसेना के परिवहन विमानों की आपूर्ति बढ़ाने के लिए संचालन के एक हिस्से के रूप में सैनिकों और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति के लिए लेह एयरबेस पर लगातार लैंडिंग की जाती है जो आगे के स्थानों पर भेजे जाते हैं.

सर्दी शुरू होने से पहले तैयारी

चूंकि भारत और चीन दोनों के बीच तनावपूर्ण माहौल है जिस कारण टकराव की बनी हुई है, इसलिए भारतीय सेना यह सुनिश्चित करना चाहती है कि सर्दी के आने से पहले सभी जरूरी चीजों की आपूर्ति कर दी जाए.

वहीं भारतीय वायुसेना भी पूरी तैयारी में है, न केवल लोगों और सामग्री ले जाने के लिए बल्कि लड़ाकू जेट भी अक्सर उड़ान भरते देखे जाते हैं.

एयर कमाडोर डीपी हिरानी ने कहा कि सी- 17 और चिनूक भारी सैन्य उपकरणों और रसद के लिए उपयोग की जाने वाली संयुक्त कारीगरी के प्रतीक हैं. वायुसेना और सेना तालमेल के साथ काम कर रहे हैं और यह इन पहाड़ी इलाकों में पुरुषों और सामग्री की त्वरित गतिशीलता को दर्शाता है. सामानों को C- 17 ग्लोब मास्टर जैसे परिवहन विमान द्वारा लाया जाता है, फिर इसे अनलोड किया जाता है जबकि चिनूक हेलिकाप्टरों के जरिए आगे पहुंचाया जाता है.

सर्दियों के कपड़े, टेंट, हीटिंग उपकरण और राशन उन सामग्रियों में से हैं, जो भारतीय सेना के लोकेशन पर भेजे गए हैं. टेंट माइनस 50 डिग्री तक तापमान को झेलने की क्षमता रखते हैं. भारतीय सेना के राशन गोदाम एलएसी माउंट पर भरे हुए हैं.

सर्दियों के आने से पहले सैनिकों के लिए पर्याप्त मात्रा में खाद्य भंडार और उच्च ऊंचाई पर आवश्यक कपड़ों को लेकर चिंता जताई जा रही थी, लेकिन उन्हें तेजी से पहुंचाया जा रहा है. सामानों से भरे ट्रक लगातार गंतव्य पर पहुंचाए जा रहे हैं.

सिर्फ राशन ही नहीं है, बल्कि ईंधन भी है, जिसे बड़ी मात्रा में स्टोर किया जा रहा है. लेह में सेना का ईंधन डिपो ईंधन प्रदान करने के लिए दैनिक गतिविधि और तेल टैंकर लाइन से भरा हुआ है. 


 

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