उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को आर्य समाज से अपील की कि वह फिर से घर वापसी अभियान शुरू करे. सीएम योगी ने कहा कि घर वापसी का जो अभियान आर्य समाज ने चलाया था, उसे फिर से शुरू किया जाए, ताकि हम इसे आगे बढ़ा सकें. सीएम योगी के इस बयान पर कांग्रेस और सपा ने उनपर निशाना साधा है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी को इन सब बातों के बजाय देश की सुरक्षा के बारे में सोचना चाहिए. वहीं, कांग्रेस ने कहा कि बीजेपी और सीएम योगी धर्मांतरण और घर वापसी जैसे मुद्दे पर तो बोलते हैं, लेकिन वे राज्य में अपराध और दलितों के उत्पीड़न पर नहीं बोलते.
क्या कहा था सीएम योगी ने?
दरअसल, सीएम योगी बुधवार को आर्य समाज के स्वर्ण जयंती कार्यक्रम में शामिल होने बस्ती पहुंचे थे. इस दौरान सीएम योगी ने कहा, देश में जब बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कराया जा रहा था, तो उस समय सबसे पहले आर्य समाज ने घर वापसी कराकर उसका जवाब दिया था. उन्होंने कहा, जब अंग्रेजों ने भारतीयों पर तुष्टीकरण की नीति थोपी, तब आर्य समाज ने देश में वैदिक आंदोलन की शुरुआत की. एक समय था जब बस्ती से कराची तक आर्य समाज का बोलबाला था.
सीएम योगी ने अपील की कि आर्य समाज फिर से घर वापसी का कार्यक्रम शुरू करे, ताकि वैदिक शिक्षा से अधिक से अधिक लोग जुड़ सकें. उन्होंने कहा, आर्य समाज ने धर्मांतरण जैसे घिनौने और अनैतिक कार्य को रोकने में अहम भूमिका निभाई थी.
सपा और कांग्रेस ने सीएम योगी पर साधा निशाना
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा, बीजेपी को समाज की चिंता कम करनी चाहिए, बल्कि देश और बॉर्डर की चिंता करनी चाहिए. उनको देखना चाहिए कि चीन की सेना की वापसी कब होगी. इन्हें ये सब बातें नहीं करनी चाहिए.
सपा सांसद सपा सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा, मुख्यमंत्री के इस बयान से उनकी एंटी समाज वाली सोच दिखाई देती है. बीजेपी पुरानी बातों को निकालकर चुनाव की तैयारी कर रही है. लेकिन इस बार बच नहीं पाएगी. इन लोगों के कामों से पूरे मुल्क में अफरा तफरी मची हुई है.
सपा नेता अमीक जामेई ने कहा, सीएम योगी को सनातन धर्म के बारे में और सीखने की जरूरत है. अगर वे नहीं सीखते है, तो समाजवादी पार्टी उन्हें सिखा देगी. उन्होंने कहा, सनातन धर्म पर मुस्लिम की भी मान्यता है. स्वामी दयानंद सरस्वती ने भी यह नहीं कहा था कि किसी और धर्म का न माने या उसकी बुराई करें.
कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा, योगी आदित्यनाथ और बीजेपी धर्मांतरण और घर वापसी की बात करते हैं, लेकिन वे दलित के उत्पीड़न, हत्या, नरसंहार जैसे मामलों पर क्यों नहीं बोलते? इन्होंने महिला आरक्षण के मुद्दे पर क्यों चुप्पी साध रखी है. बिल आने के बाद से इस पर चर्चा क्यों नहीं हुई. BJP सनातन धर्म के बारे में बात करती है, लेकिन उसके बारे में जानती नहीं. ये लोग इस तरह की बातें करके मुख्य मुद्दों से भटकाना चाहते हैं.