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अमित शाह के नाम से सोशल मीडिया पर फैलाया फर्जी दस्तावेज... दार्जिलिंग-सिक्किम के विलय का किया गया दावा, FIR दर्ज

सिक्किम सरकार ने सोशल मीडिया पर वायरल एक फर्जी दस्तावेज को लेकर FIR दर्ज कराई है, जिसमें अमित शाह के नाम से सिक्किम और दार्जिलिंग के विलय का दावा किया गया था. सरकार ने इसे अफवाह और शांति भंग करने की कोशिश बताते हुए साइबर क्राइम पुलिस को जांच सौंपी है.

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सिक्किम-दार्जिलिंग विलय का फर्जी पत्र वायरल होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई है (Photo: ITG)
सिक्किम-दार्जिलिंग विलय का फर्जी पत्र वायरल होने के बाद एफआईआर दर्ज की गई है (Photo: ITG)

सिक्किम पुलिस ने एक फर्जी डॉक्यूमेंट के मामले में FIR दर्ज की है. इस डॉक्यूमेंट में झूठा दावा किया गया था कि सिक्किम और दार्जिलिंग का आपस में विलय होने वाला है. यह डॉक्यूमेंट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर बनाया गया था और सोशल मीडिया पर खूब फैलाया गया. अब सरकार ने इसे बेहद गंभीरता से लिया है और कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है.

किसी शख्स या लोगों ने एक नकली सरकारी कागज बनाया. उस कागज पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का नाम लिखा था. उसमें दावा किया गया था कि सिक्किम राज्य और पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग इलाके को मिलाकर एक कर दिया जाएगा. यानी दोनों का विलय होगा. यह बात पूरी तरह झूठी थी. ऐसा कोई फैसला हुआ ही नहीं था.

कैसे फैला यह फर्जी डॉक्यूमेंट?

इस झूठे कागज को सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर फैलाया गया. बहुत सारे लोगों तक यह पहुंचा. इसे फैलाने का मकसद था कि लोगों में डर पैदा हो, अफरा-तफरी मचे और अलग-अलग समुदायों के बीच तनाव बढ़े.

सिक्किम सरकार ने क्या किया?

सरकार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया. सिक्किम के गृह विभाग ने खुद आगे बढ़कर शुक्रवार यानी 22 मई को FIR दर्ज कराई. यह FIR गैंगटोक के सदर पुलिस थाने में दर्ज हुई. FIR उन अनजान लोगों के खिलाफ है जिन्होंने यह नकली डॉक्यूमेंट बनाया और फैलाया.

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किन कानूनों के तहत केस दर्ज हुआ?

यह मामला दो कानूनों के तहत दर्ज किया गया है. पहला है भारतीय न्याय संहिता यानी BNS, जो देश का नया आपराधिक कानून है. दूसरा है इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट यानी IT कानून, जो इंटरनेट और डिजिटल अपराधों से जुड़ा है.

यह भी पढ़ें: RAW ने रचा ऐसा सीक्रेट व्यूह, चीन को भनक तक नहीं लगी और भारत में मिल गया सिक्किम

जांच किसे सौंपी गई?

इस पूरे मामले की जांच साइबर क्राइम पुलिस थाने को दी गई है. साइबर क्राइम की टीम तकनीकी तरीकों से यह पता लगाएगी कि यह फर्जी डॉक्यूमेंट सबसे पहले कहां से बना. कौन-कौन से IP एड्रेस यानी इंटरनेट पते इससे जुड़े हैं. और कौन-कौन लोग इसे बनाने और फैलाने में शामिल थे.

सोशल मीडिया से हटाने की कोशिश

सरकार ने यह भी कदम उठाया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर इस झूठे कंटेंट को हटाया जाए और ब्लॉक किया जाए. यानी जहां-जहां यह फर्जी डॉक्यूमेंट दिख रहा है, उसे इंटरनेट से हटाने की कोशिश हो रही है.

आगे ऐसा न हो, इसके लिए क्या कदम उठाए?

सरकार ने ऑनलाइन निगरानी और भी कड़ी कर दी है ताकि आगे इस तरह की झूठी खबरें या भड़काऊ सामग्री न फैले.

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लोगों से क्या अपील की गई?

सरकार ने आम जनता से साफ कहा है कि ऐसी कोई भी खबर या डॉक्यूमेंट जो बिना जांचे-परखे सोशल मीडिया पर आए, उसे न मानें, न शेयर करें और न ही आगे भेजें. खासकर ऐसी जानकारी से दूर रहें जो राज्य में शांति और भाईचारे को नुकसान पहुंचा सकती हो.

इनपुट: पीटीआई

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