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रामदेव पर श्रीश्री बोले- जोश में बयान दिया गया, वैज्ञानिकों-डॉक्टरों का सम्मान होना चाहिए

उनकी नजरों में डॉक्टर और वैज्ञानिकों का सम्मान होना चाहिए और उनकी मेहनत की भी तारीफ होनी चाहिए. बाबा रामदेव को लेकर उन्होंने इशारों में कहा है- कभी-कभी जोश में आकर कुछ बयान दे दिए जाते हैं.

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बाबा रामदेव और श्रीश्री रविशंकर
बाबा रामदेव और श्रीश्री रविशंकर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • श्रीश्री बोले- आयुर्वेद-एलोपैथी जरूरी
  • रामदेव के बयान पर कहा ये

बाबा रामदेव ने जब से एलोपैथी को लेकर एक विवादित बयान दिया है, तमाम डॉक्टर उनके खिलाफ मोर्चा खोलकर खड़े हो गए हैं. उस एक बयान के बाद से ही बहस छिड़ गई है कि आयुर्वेद बेहतर है या फिर एलोपैथी. अब इस बहस पर आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने बाबा रामदेव को लेकर सीधे-सीधे तौर पर तो कुछ नहीं बोला लेकिन इशारों में भी काफी कुछ बयां कर गए.

बाबा रामदेव के बयान पर श्रीश्री

गुरुदेव ने साफ कर दिया है कि दोनों आयुर्वेद और एलोपैथी की अपनी महत्वता है और उसे कम नहीं किया जा सकता. वे मानते हैं कि अगर आयुर्वेद के जरिए इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है तो एलोपैथी भी इमरजेंसी के समय काफी कारगर है. उनकी नजरों में डॉक्टर और वैज्ञानिकों का सम्मान होना चाहिए और उनकी मेहनत की भी तारीफ होनी चाहिए.

बाबा रामदेव को लेकर उन्होंने इशारों में कहा है- कभी-कभी जोश में आकर कुछ बयान दे दिए जाते हैं, जिनका बाद में पछतावा होता है. उन्होंने भी बाद में अपने बयान को वापस लिया है. उन्होंने अपनी तरफ से सफाई पेश कर दी है. ऐसे में हमें अब इसे एक बड़ा विवाद नहीं बनाना चाहिए.

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आध्यात्मिक गुरू लेकिन पैसे क्यों चार्च करते?

वहीं क्योंकि श्रीश्री भी योग को काफी प्रमोट करते हैं, ऐसे में उनसे पूछा गया कि उन्होंने अपनी सेवाओं का गांवों तक विस्तार किया या नहीं. सवाल ये भी पूछा गया कि वे एक आध्यात्मिक गुरु हैं, ऐसे में वे अपने स्कूल में छात्रों से पैसे क्यों लेते हैं.

अब दोनों ही सवालों के जवाब में गुरुदेव ने कहा कि मैंने और मेरी टीम ने कोरोना काल गांवों में काफी काम किया है. त्रिपुरा के भी कई गांवों में योग और ध्यान का महत्व समझाया है.

हमारी तरफ से कई सारे मुफ्त में भी स्कूल चलाए जा रहे हैं. ये कहना कि हम सभी से चार्ज करते हैं, ये गलत है. अगर 100 स्कूल पैसे वाले हैं तो 600 ऐसे भी हैं जहां पर गरीब और आदिवासी समुदाय के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है, उन्हें खाना खिलाया जाता है.

श्रीश्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि दोनों आयुर्वेद और एलोपैथी पर टीका-टिप्पणी नहीं करनी चाहिए. वे मानते हैं कि ना एलोपैथी से सभी रोग ठीक हो सकते हैं और ना ही आयुर्वेद से सभी का इलाज संभव है. ऐसे में दोनों को कभी ना कभी एक दूसरे की जरूरत रहती है.

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