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'यूपी के 17 लाख लोगों का रद्द हो सकता है राशन कार्ड', एसपी सांसद का दावा, उठाई ये मांग

समाजवादी पार्टी सांसद जावेद अली खान ने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन कार्ड के आय मानदंड में संशोधन की मांग की है. उन्होंने कहा कि पिछले 13 सालों में महंगाई और आय बढ़ने के बावजूद आय सीमा नहीं बदली है, जिससे उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोग राशन कार्ड खोने के खतरे में हैं.

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सपा सांसद ने राशन कार्ड की आय सीमा बढ़ाने की मांग की. (Photo/FB-Javed Ali Khan)
सपा सांसद ने राशन कार्ड की आय सीमा बढ़ाने की मांग की. (Photo/FB-Javed Ali Khan)

समाजवादी पार्टी सांसद जावेद अली खान ने सरकार से खाद्य सुरक्षा अधिनियम (FSA) के तहत मुफ्त राशन पाने वालों के लिए आय मानदंड में संशोधन की मांग की. उन्होंने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान ये मुद्दा उठाया.

गुरुवार को जावेद अली ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 17 लाख लोग अपना राशन कार्ड खोने के खतरे में हैं, क्योंकि उनकी आय निर्धारित सीमा से ज्यादा हो गई है. सपा सांसद ने कहा कि ये अधिनियम लोगों के लिए, खास तौर पर कोविड संकट के दौरान, वरदान साबित हुआ.  

जावेद अली वे कहा, 'अधिनियम पारित हुए 13 साल हो गए हैं, लेकिन एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया अभी भी वही हैं. 2013 में जब एक्स पारित हुआ था, तब 2 लाख रुपये तक की आय वाले लोगों को गरीब माना गया था और उन्हें लाभार्थी बनाया गया था. शहरों में, 3 लाख रुपये की सालाना आय वाले लोगों को लाभार्थी बनाया गया था.'

एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया बढ़ाने की मांग

सपा सांसद ने आगे कहा, 'पिछले 13 सालों में बहुत कुछ बदल गया है, महंगाई बढ़ी है. हमने दूसरे उद्देश्यों के लिए आय सीमा में संशोधन किया है... आयकर स्लैब बदले हैं, 2016 का वेतन आयोग लागू हुआ है, और लोगों की आय बढ़ी है... मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ी है, यहां तक ​​कि सांसदों की सैलरी भी बढ़ी है, लेकिन हमने FSA के तहत एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया नहीं बदले हैं.'

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जावेद अली ने कहा, 'मैंने एक अर्थशास्त्री से पूछा कि 2013 में 2 लाख रुपये की आय आज के हिसाब से कितनी होगी, उन्होंने कहा कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के मुताबिक, 2013 में ग्रामीण क्षेत्रों में 2 लाख रुपये आज के हिसाब से 3.60 लाख रुपये के बराबर होंगे और शहरी क्षेत्रों में 3 लाख रुपये आज के हिसाब से 5.40 लाख रुपये के बराबर होंगे. यही आय मानदंड होना चाहिए.'

उन्होंने अपील की, 'मैं आपसे एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया बढ़ाने की अपील करता हूं, क्योंकि अकेले उत्तर प्रदेश में ही 17 लाख राशन कार्ड रद्द होने वाले हैं क्योंकि उन्होंने आय सीमा पार कर ली है. ये गरीबों के साथ अन्याय होगा.'

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के बारे में

बता दें कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) 5 जुलाई, 2013 को लागू हुआ था. ये देश की 1.4 अरब आबादी के लगभग दो-तिहाई हिस्से को रियायती खाद्यान्न उपलब्ध कराता है, जिसमें प्राथमिकता प्राप्त परिवारों (पीएचएच) के लिए हर व्यक्ति को हर महीने 5 किलोग्राम अनाज और अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) के तहत हर परिवार को 35 किलोग्राम अनाज दिया जाता है.

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