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‘मिट्टी बचाओ अभियान’ के 50 दिन पूरे, 2 अरब लोगों तक पहुंचा सद्गुरु का संदेश

सद्गुरु ने कहा है कि 52 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पहले ही खराब हो चुकी है. दुनिया में मिट्टी के संकट पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है

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सद्गुरु
सद्गुरु

सदगुरु जग्गी वासुदेव ने मार्च महीने में 100 दिन, 30 हजार किलोमीटर की मोटरसाइकिल यात्रा 'जर्नी टू सेव सॉइल' की शुरुआत की थी. सद्गुरु अपनी मोटरसाइकिल यात्रा की आधी दूरी तय कर चुके हैं. पिछले 50 दिन में सदगुरु ने यूरोप के अधिकांश हिस्से, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों के साथ-साथ मध्य पूर्व के हिस्से की यात्रा की और मिट्टी को बचाने की आवश्यकता जोर दिया.

उन्होंने कहा है कि 52 प्रतिशत कृषि योग्य भूमि पहले ही खराब हो चुकी है. दुनिया में मिट्टी के संकट पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है. सद्गुरु को अपनी यात्रा के दौरान प्रत्येक देश में राजनेताओं, मिट्टी के विशेषज्ञों, नागरिकों, मीडियाकर्मियों और प्रभावकारी व्यक्तियों से मुलाकात की है. सद्गुरु ने इन मुलाकातों के दौरान मिट्टी के संकट से निपटने की तत्काल आवश्यकता के बारे में जागरूक किया है.
 
मिट्टी बचाने के लिए काम करने को सहमत हुए 72 देश

मिट्टी बचाओ अभियान से करीब दो बिलियन से अधिक लोगों को प्रभवित हो चुके हैं और 72 देश मिट्टी बचाने के लिए कार्य करने के लिए सहमत हुए हैं. सदगुरु ने कहा, "मिट्टी हमारी संपत्ति नहीं है, यह एक विरासत है जो पिछली पीढ़ियों से हमारे पास आई है. हमें इसे जीवित मिट्टी के रूप में आने वाली पीढ़ियों को देना चाहिए."

इस समय सदगुरु मध्य पूर्व में हैं. सद्गुरु मई महीने के अंत में भारत पहुंचेंगे और 21 जून तक देश में यात्रा करेंगे. यहां मिट्टी बचाओ अभियान  के पहले 50 दिन की झलकियां हैं.

मिट्टी बचाओ यात्रा की अब तक की उपलब्धियां

1. सद्गुरु के इस अभियान के साथ इंटरनेशनल यूनियन ऑफ कंजर्वेशन ऑफ नेशंस (आईयूसीएन) और यूनाइटेड नेशंस (यूएन) की कई एजेंसियां भी साझेदारी पर सहमत हुई हैं. इनमें यूनाइटेड नेशंस कन्वेंशन टू कॉम्बैट डेजर्टिफिकेशन (यूएनसीसीडी), वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (डब्ल्यूएफपी) और यूनाइटेड नेशंस एनवायरनमेंटल प्रोग्राम  (यूएनईपी) साझेदारी करने के लिए आगे आए हैं.

2. पहले 50 दिन में अभियान के माध्यम से सात कैरिबियाई देशों, अजरबैजान, रोमानिया, यूएई सहित कई देशों को मिट्टी की सुरक्षा के लिए नीतियां बनाने के लिए 'मिट्टी बचाओ' अभियान के साथ के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं.

3. 54 राष्ट्रमंडल राष्ट्र और साथ ही यूरोपीय संघ और यूरोप के कई संगठन भी मिट्टी बचाओ अभियान के समर्थन में आगे आए.

4. चेक गणराज्य, स्लोवाकिया, बुल्गारिया, इटली, वेटिकन और सूरीनाम गणराज्य ने मिट्टी बचाओ अभियान के साथ समन्वय पर सहमति व्यक्त की है.

5. जर्मनी के शिक्षा मंत्रालय ने बच्चों को #SaveSoil मिट्टी बचाओ अभियान में भाग लेने के निर्देश दिए हैं. बच्चों की कलाकृतियों को 'मिट्टी बचाओ- कला और कविता की एक वैश्विक प्रदर्शनी' के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा.

6. गैर-सरकारी इस्लामिक संगठन मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने मिट्टी संकट को लेकर वैश्विक आंदोलन का समर्थन करने की बात कही है.

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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7. दुनियाभर के हजारों प्रभावकारी व्यक्ति, मशहूर हस्तियां, खिलाड़ी, पत्रकार और वैज्ञानिक अपनी आवाज उठाने और मिट्टी के विलुप्त होने के बारे में जागरुकता फैलाने के लिए आगे आए हैं.
 
8. जलवायु परिवर्तन और मिट्टी के पुनर्जीवन के माध्यम से खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए फ्रांसीसी सरकार की '4 प्रति 1000' पहल ने भी मिट्टी बचाओ के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं.
 
9. यात्रा के दौरान सभी शहरों में मिट्टी बचाओ कार्यक्रमों को कवर करने वाले 18 देशों के 250 से अधिक मीडिया आउटलेट्स के साथ ही इस आंदोलन को दुनिया भर के लोगों की ओर से प्रतिक्रिया मिली है.
 
10. देश में आधा मिलियन से अधिक छात्रों ने पत्र लिखकर मिट्टी के पुनर्जीवन के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध सरकार से किया है.
 
11. देश में कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मिट्टी बचाओ अभियान का समर्थन किया है.

12. सदगुरु ने मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी-15) के 15वें सत्र में 193 देशों को संबोधित किया. सदगुरु ने अपने संबोधन में एक व्यापक उद्देश्य पर जोर दिया- कृषि योग्य  मिट्टी में न्यूनतम 3 से 6% जैविक सामग्री सुनिश्चित करना और इसके लिए उन्होंने त्रि-स्तरीय रणनीति की बात की.

 

कावेरी नदी बेसिन में समाप्त होगी यात्रा

सदगुरु इस महीने के अंत में गुजरात के जामनगर पहुंचेंगे और 25 दिनों में 9 राज्यों की यात्रा करेंगे. मिट्टी बचाओ अभियान यात्रा कावेरी नदी के बेसिन में समाप्त होगी. यहां सदगुरु ने कावेरी कॉलिंग परियोजना शुरू की थी. इस परियोजना के तहत 1 लाख 25 हजार किसानों ने मिट्टी और कावेरी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 62 मिलियन पेड़ लगाए हैं.

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