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गया में ट्रेन फूंकी, यूपी-बिहार में रेलवे की संपत्ति में तोड़फोड़, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर कितनी सजा?

आरआरबी एनटीपीसी के रिजल्ट में धांधली का आरोप लगाते हुए छात्रों का उग्र प्रदर्शन जारी है. रेल मंत्री ने छात्रों से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने की अपील की है. वहीं, रेलवे ने कहा है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के दोषी पाए जाने को आजीवन रेलवे में नौकरी नहीं दी जाएगी.

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प्रदर्शनकारियों ने रेलवे की बोगियां फूंक दी. (फोटो-PTI) प्रदर्शनकारियों ने रेलवे की बोगियां फूंक दी. (फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • रेल मंत्री की अपील, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट न करें
  • रेलवे ने कहा, नुकसान पहुंचाने वालों को नौकरी नहीं
  • सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने पर 5 साल की सजा

RRB NTPC Result Row: आरआरबी एनटीपीसी के रिजल्ट में धांधली का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों का उग्र प्रदर्शन जारी है. प्रदर्शनकारियों ने यूपी और बिहार में कई जगह रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ की. गया में ट्रेन फूंक डाली. नवादा में ट्रेन के इंजन को आग के हवाले कर दिया. रेलवे ट्रैक पर भी प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे हैं, जिससे सैकड़ों ट्रेनों की आवाजाही बाधित हुई और कई को रद्द करना पड़ा. 

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने प्रदर्शनकारियों से सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाने की अपील की है. उन्होंने कहा, 'ये उनकी अपनी संपत्ति है. वो अपनी खुद की संपत्ति को नुकसान क्यों पहुंचा रहे हैं?' उन्होंने ये भी कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने पर अधिकारी उचित प्रक्रिया का पालन करेंगे. 

प्रदर्शनकारियों को रेलवे ने भी चेतावनी दी गई है. रेलवे ने एक बयान जारी कर कहा, 'रेलवे की नौकरी पाने वाले अभ्यर्थियों ने पिछले दो दिनों में रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, ट्रैक उखाड़ दिए हैं और ट्रेनों की आवाजाही को बाधित किया है.'

आगे कहा गया है, 'जो भी अभ्यर्थी रेलवे स्टेशनों पर हिंसा और तोड़फोड़ में शामिल होते हैं और वीडियो में उनकी पहचान होती है तो उन्हें आजीवन रेलवे में नौकरी नहीं मिलेगी.'

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प्रदर्शनकारी छात्र रेलवे ट्रैक पर धरने पर बैठ गए हैं. (फोटो-PTI)

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर क्या एक्शन हो सकता है?

- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से निपटने के लिए सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण कानून 1984 बनाया गया है. इस कानून के तहत अगर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाता है तो उसे 5 साल तक की कैद या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.

- सार्वजनिक संपत्ति क्या होगी? इसका जिक्र भी कानून में है. कोई भी ऐसा भवन या संपत्ति सार्वजनिक होगी जिसका इस्तेमाल पानी, बिजली या एनर्जी के उत्पादन और वितरण में किया जाता है. इसके साथ ही कोई ऑयल इंस्टॉलेशन, सीवेज वर्क, माइन्स, फैक्ट्री या सार्वजनिक परिवहन के साधन, टेलीकॉम से जुड़ी संपत्ति भी सार्वजनिक मानी जाती है.

- इस कानून में आग लगाकर या विस्फोट के जरिए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले के लिए और सख्त सजा का प्रावधान है. कानून के अनुसार, ऐसा करने वाले को 10 साल की कैद या जुर्माना लगाया जा सकता है.

नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी आरोपी की ही होगी

- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामले में 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और दो कमेटी बनाई. पहली कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस केटी थॉमस थे तो दूसरी के सीनियर एडवोकेट फली नरीमन. 2009 में इन दोनों कमेटियों के सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने एक गाइडलाइन बनाई.

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की सारी जिम्मेदारी आरोपी पर होगी. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रूफ ऑफ बर्डन आरोपी पर होगा. इसका मतलब ये हुआ कि अदालत ये मानकर चलेगी कि नुकसान आरोपी ने किया है. इसके बाद आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना होगा. 

- कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर कोई प्रदर्शन बुलाया जाता है और वो हिंसक होता है, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है तो नुकसान की भरपाई आरोपी से की जाएगी. नुकसान का आकलन अदालतें भी कर सकती हैं या कोई उचित प्रक्रिया अपनाई जा सकती है.

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लेकिन क्या ऐसा होता है?

- सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में कार्रवाई बहुत ज्यादा नहीं हो पाती. उसकी एक वजह ये है कि ऐसे मामलों में आरोपी का पता लगा पाना मुश्किल हो जाता है. क्योंकि आमतौर पर जब भी कोई हिंसक प्रदर्शन होता है जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, उसका कोई चेहरा नहीं होता है. 

- सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता बताते हैं कि अगर विरोधियों के ऊपर FIR दर्ज भी हो जाए तो व्यक्तिगत तौर पर सबूत जुटा पाना मुश्किल होता है. इसके अलावा ऐसे मामलों में आरोपी को सजा देना या जुर्माना लगाना भी काफी मुश्किल है.

-  विराग गुप्ता बताते हैं कि कुछ राज्यों ने भीड़ कि हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के मामलों में नए कानून बनाने की पहल की है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में कानून है कि सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान होने पर वसूली आरोपी से की जाएगी, लेकिन इस पर अमल करना बहुत मुश्किल है.

- उन्होंने ये भी कहा कि रेलवे ने प्रदर्शनकारियों को आजीवन रेलवे में नौकरी नहीं देने फैसला लिया है, लेकिन ये पहले से ही कानून है. उन्होंने बताया कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज हो जाए तो उन्हें सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है. 

- वहीं, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि 2020 में सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने पर 4,524 मामले दर्ज किए गए थे. इनमें 6,009 लोगों को गिरफ्तार किया गया था. इनमें से 868 को ही दोषी साबित किया जा सका. आंकड़े बताते हैं कि 2020 के अंत तक सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के 22 हजार से ज्यादा मामले अदालतों में लंबित हैं.

 

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