प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में अपनी परंपरा को जारी रखते हुए कर्तव्य पथ पर एक आकर्षक बहुरंगी साफा पहनकर सबका ध्यान खींचा. पिछले एक दशक से अधिक समय से पीएम मोदी स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर क्षेत्र-प्रेरित, रंग-बिरंगे और अनोखे साफा (पगड़ी) पहनते आ रहे हैं जो हर बार समारोह का प्रमुख आकर्षण बन जाता है.
2026 के गणतंत्र दिवस पर पीएम मोदी का साफा न केवल रंगों से भरपूर था, जिसमें मुख्य रूप से लाल और पीले रंग का संयोजन था. साथ ही हरे और बैंगनी के हल्के छींटे थीं. ये टाई-एंड-डाई (बांधेज) शैली की पगड़ी थी, जिसमें सोने की जरी से बने सुंदर मोटिफ्स लगे थे. साफा राजस्थानी पारंपरिक अंदाज में बंधा था, जिसकी लंबी पूंछ कंधे पर लहराती हुई नजर आ रही थी.
पारंपरिक और आधुनिक शैली का संगम
पीएम मोदी ने गहरे नीले और सफेद रंग के कुर्ते-पायजामे के साथ पगड़ी पहनी और हल्के नीले रंग की नेहरू जैकेट के साथ अपने औपचारिक शैली और सांस्कृतिक प्रतीकवाद के विशिष्ट मिश्रण को बरकरार रखा. ये संयोजन उनके सिग्नेचर वाले औपचारिक और सांस्कृतिक प्रतीकात्मक स्टाइल को पूरा कर रहा था.
परेड के उत्सवपूर्ण माहौल के बीच प्रधानमंत्री का ये परिधान परंपरा और ऊर्जा का अनूठा मिश्रण पेश कर रहा था, जिसने कर्तव्य पथ पर मौजूद भीड़ का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.
पीएम मोदी का ये साफा न केवल फैशन का बयान था, बल्कि क्षेत्रीय परंपराओं और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके सम्मान को भी दर्शाता था. राजस्थानी बांधेज साफे के जीवंत रंगों ने कर्तव्य पथ पर जमा हजारों दर्शकों और पूरे देश के दर्शकों का दिल जीत लिया. हर साल की तरह इस बार भी उनका सिर का आभूषण सोशल मीडिया और मीडिया में छाया रहा, जहां लोग इसे 'ट्रेडमार्क' स्टाइल का हिस्सा बता रहे हैं.
शहीदों को श्रद्धांजलि
गणतंत्र दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने दिन की शुरुआत नेशनल वॉर मेमोरियल पर पुष्पांजलि अर्पित कर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देकर की. इसके बाद वे कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ सलामी मंच पर पहुंचे.
इसके बाद सुबह 10:30 बजे शुरू हुई 90 मिनट की गणतंत्र दिवस की परेड में भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और विकास यात्रा का प्रदर्शन किया गया. जिसमें नई इकाइयों, ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े प्रमुख हथियार सिस्टम के मॉडल और अन्य आकर्षण शामिल थे. इस वर्ष के समारोह में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का भी सम्मान किया गया.