कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर बंगाल सरकार ने कथित रूप से अवैध तरीके से भर्ती किए गए 842 कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. दरअसल, कई लोगों को स्कूलों में अलग-अलग पदों पर नियुक्त किया गया था. बंगाल में चल रही शिक्षा भर्ती घोटाले की जांच के बीच कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्कूल सेवा आयोग की नौकरी के ग्रुप सी पद से 842 कर्मचारियों को बर्खास्त करने का आदेश दिया था.
कोर्ट के आदेश के बाद पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग ने इन कर्मचारियों के नामों का खुलासा करते हुए उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया है. इस बीच यह जानकारी सामने आई है कि जिन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला गया है, उनमें से कई लोग या तो राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी में सीधे तौर पर शामिल थे या फिर किसी टीएमसी नेता के करीबी थे.
ऐसा ही एक मामला तुम्पा मेटे का है, जिन्हें कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया. वह टीएमसी से हुगली जिला परिषद की निर्वाचित सदस्य हैं. वहीं उनके पति मृत्युंजय मेटे तृणमूल कांग्रेस से निर्वाचित पंचायत सदस्य हैं. 2018 में तुम्पा मेटे को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग द्वारा भर्ती किया गया था और उन्हें हुगली जिले के श्रीरामपुर नेताजी बॉयज हाई स्कूल में क्लर्क रखा गया था.
'नौकरी के लिए किसी को पैसा नहीं दिया'
आजतक/इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए तुम्पा मेटे के पति मृत्युंजय मेटे ने कहा, "हमें नौकरी की जरूरत थी क्योंकि हम मध्यवर्गीय परिवार से हैं. मैंने अपनी पत्नी की नौकरी के लिए कभी भी किसी को कोई पैसा नहीं दिया. उनकी पत्नी को एसएससी परीक्षा के माध्यम से नौकरी मिली थी. अगर ओएमआर शीट में कुछ भी गलत है, तो उच्च माध्यमिक शिक्षा बोर्ड इसके बारे में बता सकता है. हम इसके बारे में कुछ नहीं जानते."
तुम्पा मेटे के पति ने आगे कहा, "चूंकि हम दोनों तृणमूल कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए नौकरी जाने से समाज में हमारी इज्जत पर बात आएगी. पांच साल उस स्कूल में काम करने के बाद पता नहीं अचानक क्या हो गया. अब विपक्ष हमारे खिलाफ दुष्प्रचार करेगा, यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है."
लोगों के लिए ईमानदारी से काम किया: तुम्पा मेटे
हुगली जिला परिषद की टीएमसी सदस्य तुम्पा मेटे, जिनकी नौकरी चली गई है, पिछले शुक्रवार से बहुत परेशान हैं. उन्होंने कहा, "मैंने 2016 में परीक्षा दी थी. फिर नौकरी ज्वाइन की. मुझे मीडिया से पता चला कि इस नौकरी के घोटाले में बहुत पैसों का लेन-देन हुआ है. लेकिन मैंने लोगों के लिए ईमानदारी से काम किया है. इसलिए मुझे लगता है मेरी पार्टी मेरा साथ देगी."
तृणमूल और भ्रष्टाचार अब पर्यायवाची: बीजेपी
उधर, मामले पर बीजेपी की तरफसे भी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें टीएमसी पर निशाना साधा गया है. श्रीरामपुर के संगठनात्मक जिलाध्यक्ष मोहन अदक ने कहा, "जिस तरह से पूरे राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में भ्रष्टाचार हुआ, उससे तृणमूल इनकार नहीं कर सकती. हाईकोर्ट द्वारा दिया गया फैसला तार्किक और महत्वपूर्ण है. तृणमूल और भ्रष्टाचार अब पर्यायवाची हैं."
रिपोर्ट: राजेश साहा
(हुगली से भोला साहा के इनपुट के साथ)