लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दूसरे दिन भारतीय जनता पार्टी की ओर से रविशंकर प्रसाद ने डिबेट की शुरुआत की. रविशंकर प्रसाद ने अविश्वास प्रस्ताव को एक व्यक्ति के अहम की संतुष्टि के लिए लाया गया प्रस्ताव बताया और कहा कि विपक्ष के नेता पद की एक गरिमा होती है. एलओपी को उसके अनुरूप आचरण करना चाहिए. उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता कभी प्रधानमंत्री के गले पड़ जाते हैं, तो कभी आंख मारने लगते हैं.
बीजेपी के सांसद और पूर्व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मुझे एक गाना याद आ रहा है- लड़का आंख मारे. उन्होंने कहा कि जब से संविधान आया, तब से 1977 तक विपक्ष का नेता नहीं था. जनता पार्टी की जब सरकार आई, तब विपक्ष का नेता बनाया गया था. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वाईबी चव्हाण का पीएम के तुरंत बाद भाषण हुआ था. यह परंपरा हमने शुरू की थी.
उन्होंने नेता विपक्ष को लेकर भी एक कोट पढ़ा और कहा कि वेणुगोपाल जी, राहुल गांधी कितना सुनते हैं मुझे पता नहीं है लेकिन ये पढ़ा दीजिए. इस पर वेणुगोपाल खड़े हो गए और यील्ड करने की मांग की. राहुल गांधी भी खड़े हुए और कहा कि मेरा नाम आया है तो बोलने का मौका दिया जाए. रविशंकर प्रसाद ने इस पर अपने पास बैठे सांसदों से कहा कि चिढ़ गया, चिढ़ गया. मैं चिढ़ा रहा था. इस पर रविशंकर प्रसाद के पास बैठे सदस्य ने कहा कि बात में दम है, इसलिए ही चिढ़ा.
राहुल गांधी बोले- मुझे बोलने नहीं दिया गया
राहुल गांधी ने कहा कि यह चर्चा लोकतंत्र और स्पीकर की भूमिका पर है. कई मौकों पर मेरा नाम लिया गया. हर समय हमें बोलने से रोका गया. आखिरी बार बोलते हुए मैंने प्रधानमंत्री की ओर से कॉम्प्रोमाइज का मुद्दा उठाया. सदन देश का प्रतिनिधित्व करता है. पहली बार विपक्ष के नेता को नहीं बोलने दिया गया.पीएम कॉम्प्रोमाइज्ड.
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इस पर रविशंकर प्रसाद ने तपाक से कहा- नेवर... नेवर... नेवर. पीएम मोदी का भारत कभी कॉम्प्रोमाइज्ड नहीं होगा. उन्होंने कहा कि इनको बेसिक समझदारी भी नहीं है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि स्पीकर ने कई बार चेयर घेरी गई, कागज फेंके गए... लेकिन वह मुस्कराते रहे.
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इंदिरा, राजीव, सोनिया गांधी भी रहे LOP- रविशंकर प्रसाद
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष के नेता इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी और सुषमा स्वराज भी रही हैं. उस परंपरा को देखिए. एलओपी को गरिमा जरूरी है. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हम हाउस में थे, जिस तरह से उधर के लोग प्रधानमंत्री की कुर्सी के पास आए थे, कुछ भी हो जाता. मेरा आरोप है कि विपक्ष के लोग, विशेष रूप से कांग्रेस और उससे भी विशेष राहुल गांधी इस संसद को अराजकता में बदलना चाहते हैं. यह नहीं होना चाहिए. ये संसद सर्वोच्च है.