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आंदोलन पर किसान संगठनों में मतभेद? दर्शन पाल की टिकैत को नसीहत- जिम्मेदारी से बयान दें

कृषि कानूनों की समाप्ति के बाद से किसान संयुक्त मोर्चा में मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. किसान नेता दर्शन पाल ने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को जिम्मेदारी के साथ बयान देने की सलाह दे डाली.

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दर्शन पाल सिंह और राकेश टिकैत (फाइल फोटो) दर्शन पाल सिंह और राकेश टिकैत (फाइल फोटो)
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स्टोरी हाइलाइट्स
  • दर्शन पाल सिंह ने कहा, आंदोलन की एकता के लिए जिम्मेदारी से बयान दें टिकैत
  • पाल ने कहा- हम कमेटी के लिए 5 नामों पर चर्चा कर रहे; टिकैत बोले- जानकारी नहीं

कृषि कानूनों की समाप्ति के बाद से किसान आंदोलन की एकता को लेकर चर्चा होने लगी है. इस कयास को किसान नेता दर्शन पाल के बयान ने और हवा दे दी है. दरअसल, दर्शन पाल ने भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत को जिम्मेदारी के साथ बयान देने की सलाह दे डाली. 

दर्शन पाल सिंह ने कहा, राकेश टिकैत को जिम्मेदारी के साथ बयान देने की जरूरत है, ताकि आंदोलन में एकता बनी रहे. पाल ने कहा, हम केंद्र को कमेटी के लिए भेजे जाने वाले 5 नामों पर सहमति बना रहे हैं. 4 दिसंबर तक नाम तय कर लिए जाएंगे. वहीं, टिकैत ने कमेटी को लेकर कहा कि 5 नाम मांगे गए हैं, इसे लेकर हमें कोई जानकारी नहीं है.

'पहले केस वापस ले सरकार'
दर्शन पाल सिंह ने कहा, संयुक्त किसान मोर्चा के लिए सबसे अहम मुद्दा है कि आंदोलन खत्म होने से पहले किसानों पर दर्ज सभी केस वापस लिए जाएं. किसानों के साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की भी आज बैठक है. 

'मतभेद खत्म करने की जरूरत'
दर्शन पाल ने संयुक्त मोर्चा में मतभेद की बात को लेकर कहा, यह समय है कि किसान नेताओं को अपने मतभेद खत्म करने की जरूरत है. किसान नेताओं को एक बयान देने की जरूरत है. किसान नेताओं को मुद्दे पर एक तरफा बयान नहीं देना चाहिए. 

संयुक्त मोर्चा में मतभेद की खबरें
पिछले कुछ दिनों से संयुक्त मोर्चा में मतभेद की खबरें सामने आ रही हैं. बताया जा रहा है कि कुछ नेता बैक डोर से सरकार से बातचीत कर रहे हैं. कृषि कानूनों की वापसी के बाद से ये नेता आंदोलन खत्म करने के पक्ष में हैं. वहीं, इन नेताओं को राकेश टिकैत ने मंगलवार को चेतावनी भी दी थी. टिकैत ने कहा था, जो किसान नेता पहले घर जाएगा, वही पहले जेल जाएगा. 

5 लोगों की कमेटी के बारे में हमें जानकारी नहीं- टिकैत
बुधवार को टिकैत ने कहा, हमें इस बारे में जानकारी नहीं है कि 5 लोगों की कमेटी बनाने के लिए कहा गया है. टिकैत ने कहा, हमारे यहां सब कुछ शांत है सब कुछ नॉर्मल है. आज जो भी मीटिंग रहेगी, उसमें हमारे प्रतिनिधि जगतार सिंह बाजवा शामिल रहेंगे वहां एक मीटिंग हरियाणा की भी चल रही है. जब सारे नेता यहां पर हैं तो मीटिंग चलती रहनी चाहिए. यह लग रहा है कि किसी भी समय सरकार से बातचीत हो सकती है तो हमें भी डाटा तैयार करके रखना चाहिए. 

टिकैत ने 'दूसरे गुट' पर साधा निशाना
टिकैत ने कहा, जिन्हें चुनाव भी लड़ना है उन्हें भी मुकदमे का हलफनामा लगाना पड़ेगा और उनके पर्चे रद्द हो जाएंगे उन्हें भी तो अपनी पर्ची में मुकदमे के बारे में लिखना होगा. अगर कोई चुनाव लड़ेगा तो उन्हें लिखना पड़ेगा उनके खिलाफ कितने मुकदमे हैं. कोई भी यहां से नहीं जा रहा है यह सब कुछ अफवाह है. आज तक हमें कोई भी ऐसा आदमी नहीं मिला जो कह रहा हूं कि हमें घर जाना है. 

मंगलवार को राकेश टिकैत ने कहा था, जो चुनाव लड़ने के लिए ज्यादा उत्सुक हैं, वह जल्दी जाएगा. वही, जेल भी जाएगा. जब घर में भाई भाई का विचार नहीं मिलता तो यहां पर भी अगर विचार नहीं मिल रहे हैं तो उसमें क्या गड़बड़ है? कुछ लोगों को चुनावी रोग लग जाता है और मैं कहां एफिडेविट दूं कि मैं चुनाव नहीं लडूंगा. मेरी जुबान ही मेरा एफिडेविट है. मैं चुनाव नहीं लडूंगा. 

अगले महीने फाइनल मैच होगा- टिकैत
अभी 1 महीने में फाइनल मैच होगा जो लोग गांव में बैठे हैं उन्हें हमने कहा नहीं है. कुछ लोग फील्ड में रहेंगे, कुछ लोग खेलेंगे. कुछ लोग यहीं से मैच देखेंगे और कुछ लोग टीवी पर देखेंगे. यह तय है कि फाइनल मैच होगा और हम तो खेलने वाले ही रहेंगे. पर जितनी जल्दी मान जाए नहीं तो यहां पर सब कुछ होगा. बातचीत होगी और सब कुछ होगा सरकार जल्दी कर ले उन्हें भी तो चुनाव में जाना है. 

'पंजाब के ज्यादातर किसान संगठन घर जाना चाहते हैं'
उधर, जम्हूरी किसान सभा के सचिव कुलवंत सिंह संधू ने कहा, यह समय वापस जाने का है क्योंकि किसानों की उचित मांगों को मान लिया गया है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आंदोलन खत्म हो गया. हम इसे राज्यों में जारी रखेंगे. अभी हमारी सभी मांगों को नहीं माना गया है. लेकिन हमने कभी नहीं देखा कि 100% मांगे मानी गई हों. लेकिन ज्यादातर शर्तों को मान लिया गया है. जब उनसे पूछा गया कि क्या पंजाब के सभी 32 जत्थे वापस जाना चाहते हैं, तो संधू ने कहा, पंजाब के ज्यादातर किसान संगठन घर जाना चाहते हैं. 

 

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