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PM मोदी की मीटिंग में नहीं मिला बात रखने का मौका, अशोक गहलोत ने ट्विटर पर दे डाली सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच गुरुवार शाम बैठक हुई. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई मीटिंग में पीएम ने कोरोना से उपजे हालातों और वैक्सीनेशन प्रोग्राम की समीक्षा की.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शेयर किए सुझाव. (फाइल फोटो) राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शेयर किए सुझाव. (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • COVID के हालात का जायजा लेने हुई थी बैठक
  • मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक हुए थे शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की गुरुवार शाम एक बैठक हुई. कोविड से उपजे हालात और टीकाकरण अभियान को लेकर इस मीटिंग में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिल पाया. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया को ही अपना माध्यम बनाया और अपने सुझाव शेयर किए.  

वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सीएम गहलोत ने शिकायती लहजे में लिखा, ''आज प्रधानमंत्री जी ने कोविड की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा की. इसमें केवल 8 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को ही अपनी बात रखने का अवसर मिल सका. चर्चा में अवसर नहीं मिलने के कारण सोशल मीडिया के माध्यम से जनहित में कोविड प्रबंधन को लेकर अपने सुझाव साझा कर रहा हूं.''

CM गहलोत ने दिए ये 5 सुझाव:-

1. केंद्र सरकार ने फिलहाल कोविड वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज 60 साल से अधिक आयु के को-मोर्बिड व्यक्तियों को लगाने के निर्देश दिए हैं. चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, को-मोर्बिड की स्थिति हर आयु वर्ग में देखने को मिलती है, इसलिए प्रिकॉशन डोज सभी के लिए उपलब्ध हों.

2. दूसरी डोज के बाद प्रिकॉशन डोज के लिए 9 माह का अंतराल रखा गया है, जो काफी अधिक है. इसे 3 से 6 माह किया जाना उचित होगा, क्योंकि समय के साथ वैक्सीन का प्रभाव कम होने लगता है.

3. दुनिया के कई देशों में 2 साल की आयु तक के छोटे बच्चों को वैक्सीन लग रही है, लेकिन भारत में फिलहाल 15 से 18 साल तक के किशोर वर्ग का वैक्सीनेशन हो रहा है. चूंकि हमारे देश के बच्चों में पोषण से संबंधित समस्याएं पहले से ही हैं. ऐसे में इतने बड़े मुल्क में छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन जल्द शुरू होना जरूरी है.
 
4. अक्सर देखा जा रहा है कि लोगों में पोस्ट कोविड के रूप में अस्थमा, हार्ट, किडनी और ब्रेन स्ट्रोक से संबंधित तकलीफ एवं बीमारियां हो रही हैं. मुझे भी हार्ट ब्लॉकेज की समस्या होने के कारण एक स्टंट लगवाना पड़ा. बच्चों में भी पोस्ट कोविड की समस्याएं हो सकती हैं, जिसे मल्टी सिस्टम इन्फ्लेमेट्री सिंड्रोम इन चिल्ड्रन (एमएसआईसी) के रूप में जाना जाता है. इसमें मृत्यु दर बढ़ जाती है. इसे देखते हुए भी छोटे बच्चों का वैक्सीनेशन जल्द होना चाहिए.

5. दुनिया के विकसित राष्ट्रों में वैक्सीनेशन की गति काफी अधिक है, जबकि अल्प विकसित एवं गरीब देशों में इसका प्रतिशत अपेक्षाकृत काफी कम है तथा सुनने में आता है कि वे इस पर होने वाले व्यय को वहन नहीं कर पा रहे हैं. यह चिंताजनक है, क्योंकि किसी भी देश में यह महामारी रहने से पूरी दुनिया को खतरा बना रहेगा. उदाहरण के तौर पर पहली लहर का प्रभाव अधिक घातक नहीं था, लेकिन दूसरी लहर में डेल्टा वायरस पूरे विश्व के लिए घातक सिद्ध हुआ. इसमें लाखों लोगों की जान चली गई. यह वायरस भारत से दुनिया के दूसरे मुल्कों में पहुंचा. इसी तरह से दक्षिणी अफ्रीका से आया ओमिक्रॉन वायरस विश्वभर में फैल चुका है. ऐसे में अंतिम व्यक्ति तक वैक्सीनेशन सुनिश्चित करना आवश्यक है.

तीसरी लहर को लेकर नहीं है कोई अफरा-तफरी 

उधर, इस मीटिंग में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री को जानकारी दी कि राज्य में भी कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं, लेकिन इससे निपटने के लिए सरकार ने जो कार्य योजना बनाई है, उस वजह से कहीं भी किसी तरह का अफरा तफरी और भय का माहौल नहीं है. मुख्यमंत्री ने बताया कि 25 दिसंबर से अब तक कोविड-19 की वजह से राज्य भर में 34 मौतें हुई हैं, लेकिन इनमें से 24 वैसे लोग शामिल हैं जिनकी उम्र 60 वर्ष से ज्यादा थी. इसके अलावा, अन्य मृतक भी किसी न किसी को गंभीर बीमारी से ग्रसित थे. किसी भी व्यक्ति की मौत सिर्फ कोरोना की वजह से नहीं हुई है.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पीएम मोदी से बातचीत करते हेमंत सोरेन.

COVID-19 से निपटने के लिए की गई तैयारियों की जानकारी 

मुख्यमंत्री सोरेन ने इस बैठक में सरकार के द्वारा कोविड-19 से निपटने के लिए की गई तैयारियों को साझा किया. उन्होंने कहा कि कोरोना के शुरुआती चरण में यहां के अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में 2500 बेड थे, जो अब बढ़कर 25000 हो गए हैं. इसके अलावा, जिलों के के साथ प्रखंडों में भी पीएसए प्लांट लग चुके हैं, ताकि ऑक्सीजन की किल्लत मरीजों को नहीं हो.   ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल लगभग 31 हज़ार सक्रिय मामले हैं. वहीं, करीब 1100 संक्रमित अस्पतालों में भर्ती हैं. इनमें से मात्र 250 मरीजों को ही ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है.

 

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