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'इतिहास बदलने की क्षमता रखती हैं किताबें...', राष्ट्रपति ने प्रगति मैदान में किया 'पुस्तकालय महोत्सव 2023' का उद्घाटन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रगति मैदान में शनिवार को 'पुस्तकालय महोत्सव 2023' का उद्घाटन किया. राष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालय सभ्यताओं के बीच सेतु का काम करते हैं. प्राचीन और मध्यकाल में कई देशों के लोग भारत से पुस्तकें ले जाते थे, उनका अनुवाद करते थे और ज्ञान प्राप्त करते थे. असल में किताबें और पुस्तकालय मानवता की साझी विरासत हैं.

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राष्ट्रपति ने प्रगति मैदान में किया 'पुस्तकालय महोत्सव 2023' का उद्घाटन
राष्ट्रपति ने प्रगति मैदान में किया 'पुस्तकालय महोत्सव 2023' का उद्घाटन

भारत की राष्ट्रपति  द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार को नई दिल्ली में 'पुस्तकालय महोत्सव' का उद्घाटन किया. इस महोत्सव का आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा पुस्तकालयों के विकास और डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने और पढ़ने की संस्कृति को विकसित करने के उद्देश्य से किया गया है. इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालयों का विकास समाज और संस्कृति के विकास से संबंधित है.

यह सभ्यताओं की प्रगति का माप भी है. उन्होंने कहा कि इतिहास ऐसे संदर्भों से भरा पड़ा है, जिसमें आक्रमणकारियों ने पुस्तकालयों को नष्ट करना जरूरी समझा. इससे पता चलता है कि पुस्तकालयों को किसी देश या समाज की सामूहिक चेतना और बुद्धि का प्रतीक माना गया है. उन्होंने बताया कि आधुनिक युग में ऐसी घटनाएं नहीं होती हैं लेकिन दुर्लभ पांडुलिपियों और पुस्तकों के गायब होने की घटनाएं होती हैं. उन्होंने कहा कि दुर्लभ पुस्तकों और पांडुलिपियों को वापस लाने का प्रयास किया जा सकता है.

'मानवता की साझी विरासत हैं किताबें'
राष्ट्रपति ने कहा कि पुस्तकालय सभ्यताओं के बीच सेतु का काम करते हैं. प्राचीन और मध्यकाल में कई देशों के लोग भारत से पुस्तकें ले जाते थे, उनका अनुवाद करते थे और ज्ञान प्राप्त करते थे. असल में किताबें और पुस्तकालय मानवता की साझी विरासत हैं. राष्ट्रपति ने कहा कि एक छोटी सी किताब विश्व इतिहास की दिशा बदलने की क्षमता रखती है.

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उन्होंने गांधीजी की आत्मकथा का जिक्र किया, जहां उन्होंने जॉन रस्किन की किताब 'अनटू दिस लास्ट' के उनके जीवन पर बड़े सकारात्मक प्रभाव का जिक्र किया है. उन्होंने कहा कि किताबों में धरती की सुगंध और आकाश की विशालता समाहित होती है.

इस मौके पर भारतीय कानून और न्याय मंत्री और अर्जुन राम मेघवाल और संस्कृति व विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी व संस्कृति सचिव गोविंद मोहन भी मौजूद रहे. इस मौके पर अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि पुस्तकालय महोत्सव 21वीं सदी में भारत को दुनिया की ज्ञान महाशक्ति बनाने के लक्ष्य की दिशा में एक कदम है.

पुस्तकों के डिजिटलीकरण है उद्देश्य
मीनाक्षी लेखी ने कहा कि, “पुस्तकालय महोत्सव 2023' ज्ञान की विविधता का जश्न मनाकर और पढ़ने की आदतों को प्रोत्साहित करता है. सीखने की प्यास को बढ़ावा देता है और पूरे देश में प्रगति के लिए प्रेरित करता है.” केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय की संयुक्त सचिव, मुग्धा सिन्हा के अनुसार, “महोत्सव का उद्देश्य पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण पर एक संवाद शुरू करना और भारत में पढ़ने की संस्कृति के पुनरुत्थान को प्रज्वलित करना है. कार्य-उन्मुख नीतियों की वकालत की सुविधा प्रदान करके, महोत्सव गांव और सामुदायिक स्तर पर भी मॉडल पुस्तकालय विकसित करना चाहता है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि ज्ञान देश के हर कोने तक पहुंचे.

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