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ईरान पर US-इजरायल की एयरस्ट्राइक... PM मोदी के दौरे की टाइमिंग पर विपक्ष ने उठाए सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के 48 घंटे बाद ईरान पर हमलों को लेकर भारत में सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस ने पीएम मोदी की यात्रा के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत अपनी पारंपरिक तटस्थ विदेश नीति से भटक गया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ. (Photo: PTI)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ. (Photo: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा समाप्त होने के महज 48 घंटे के भीतर अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक बड़े संयुक्त सैन्य अभियान की शुरुआत कर दी. दोनों देशों ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर शनिवार को मिसाइलों और हवाई हमलों की बौछार की. अमेरिका और इजरायल के लड़ाकू विमानों ने ईरान में 30 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया. इस हमले के टाइमिंग को लेकर भारत की राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है.

प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी इस यात्रा के दौरान नेसेट (इजरायल की संसद) को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत 'पूरे विश्वास और दृढ़ता के साथ' इजरायल के साथ खड़ा है. पीएम मोदी के इसी बयान और यात्रा के समय को लेकर कांग्रेस ने उन पर तीखा हमला बोला है. कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश ने पीएम मोदी की इजरायल यात्रा को 'नैतिक कायरता' का उदाहरण बताया.

जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दो दिन बाद ही अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला शुरू कर दिया, जिसकी आशंका पिछले कुछ महीनों से सैन्य तैयारी को देखते हुए थी. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने इजरायल जाकर भारत की तटस्थ विदेश नीति की परंपरा को कमजोर किया ​है. कांग्रेस ने इन हमलों की निंदा करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी ईरान के साथ कूटनीति का ढोंग करने का आरोप लगाया.

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कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने भी पीएम मोदी के इजरायल दौरे की निंदा की. उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, 'मोदी के मित्र बेंजामिन नेतन्याहू ने अब भारत के पुराने मित्र ईरान पर हमला बोल दिया है. मोदी के इजरायल दौरे से लौटने के महज दो दिन बाद यह घटना घटी है. रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने के बारे में इतनी बयानबाजी करने के बाद, मोदी ने अपनी इजरायल यात्रा का इस्तेमाल इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए क्यों नहीं किया? या इससे भी बुरा, क्या वह इस युद्ध का समर्थन करते हैं?'

इस बीच, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी एक्स पर पोस्ट कर कहा कि मिडिल ईस्ट में रह रहे हर भारतीय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और सरकार को तुरंत सक्रिय कदम उठाने चाहिए. फिलहाल भारत सरकार की ओर से किसी भी तरह के इवैक्यूएशन ऑपरेशन की घोषणा नहीं की गई है, जबकि ईरान की जवाबी कार्रवाई में पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है.

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा और हमलों के समय पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री का विमान हवा में होता और उसी समय हमला हो जाता तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते थे. ओवैसी ने आरोप लगाया कि इजरायल ने भारत को भरोसे में लिए बिना ईरान पर हमला बोल दिया. उन्होंने कहा कि इससे भारत को कोई लाभ नहीं हो रहा. 

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वहीं, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया है. बीजेपी प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस को नकारात्मक राजनीति करने वाला दल बताते हुए कहा कि यह एक मजबूत सरकार है, जो देश और नागरिकों के हित में हर जरूरी फैसला लेगी. उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी से संवेदनशील मुद्दों पर बचकानी टिप्पणियां करने से बचने की अपील की. बता दें कि पीएम मोदी 25 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंचे थे. नेसेट में दिए गए अपने भाषण में उन्होंने 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले में मारे गए इजरायली नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की. उन्होंने कहा था कि भारत इजरायल के दर्द को समझता है और उसके साथ मजबूती से खड़ा है. 

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