भारत ने बीते एक दशक में डिजिटली तेजी से विकास किया है. इस विकास के कई फायदे हैं तो इसके साथ ही ऑनलाइन होने वाले क्राइम में भी इजाफा हो रहा है. समय-समय पर देश के अलग-अलग हिस्सों से डिजिटल अरेस्ट से लेकर साइबर क्राइम की खबरें सामने आती रहती हैं. इन सब के बीच रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को मन की बात में साइबर क्राइम पर लोगों के लिए ख़ास सलाह दी है.
प्रधानमंत्री ने लोगों को चेतावनी दी है कि ओटीपी, आधार नंबर या बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए. उन्होंने बताया कि डिजिटल ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इसके चलते कई लोग, खासकर वरिष्ठ नागरिक, अपनी जीवन भर की कमाई खो बैठते हैं.
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी पर पहले भी व्यापक चर्चा हो चुकी है, लेकिन फिर भी जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है. उन्होंने सभी लोगों से आग्रह किया कि केवाईसी या री-केवाईसी की प्रक्रिया केवल बैंक शाखा, आधिकारिक ऐप या अधिकृत प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही पूरी करें. क्योंकि फर्जी कॉल, एसएमएस और लिंक के जरिए अपराधी लोगों को भ्रमित करके उनकी निजी जानकारी चुराने की कोशिश करते हैं. प्रधानमंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि कोई व्यक्ति खुद को उच्च अधिकारी बताकर जानकारी मांग सकता है, लेकिन ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी है.
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प्रधानमंत्री ने बताया कि आज पेंशन, सब्सिडी, बीमा और यूपीआई जैसी जरूरी सेवाएं सीधे बैंक खाते से जुड़ी हैं. इसलिए बैंक समय-समय पर री-केवाईसी करते हैं ताकि खातों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में आरबीआई ने फाइनेंशियल लिटरेसी वीक मनाया, जो पूरे साल चलने वाला अभियान है. उन्होंने लोगों से आरबीआई की सलाह मानने और समय-समय पर केवाईसी अपडेट करते रहने की अपील की.
पीएम मोदी ने कहा कि समय-समय पर बैंक पासवर्ड बदलना भी जरूरी है, जैसे मौसम के अनुसार भोजन और कपड़े बदलते हैं. उनका संदेश था कि सही केवाईसी प्रक्रिया अपनाने और सतर्कता बरतने से ही हमारा बैंक खाता सुरक्षित रह सकता है. इसलिए हर व्यक्ति को जागरूक रहना और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के लिए सावधानी बरतनी चाहिए.