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संविधान सदन में 28वें CSPOC सम्मेलन का उद्घाटन, प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र की ताकत बताई

संविधान सदन में राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय सम्मेलन CSPOC के 28वें संस्करण का भव्य उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. प्रधानमंत्री मोदी ने संसदीय संस्कृति में सुनने और धैर्य की महत्ता बताई और भारत के 75 सालों के लोकतांत्रिक सफर, डिजिटल विकास, वैक्सीन उत्पादन, और गरीबी उन्मूलन को रेखांकित किया.

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CSPOC बना अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (Photo: Youtube/ Narendra Modi)
CSPOC बना अब तक का सबसे बड़ा राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन (Photo: Youtube/ Narendra Modi)

दिल्ली में संविधान सदन के ऐतिहासिक परिसर में राष्ट्रमंडल देशों के संसदीय सम्मेलन CSPOC के 28वें संस्करण का भव्य उद्घाटन किया गया. इस सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया. तीन दिनों तक चलने वाला यह सम्मेलन 14 से 16 जनवरी 2026 के बीच आयोजित किया जा रहा है.

इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला कर रहे हैं. सम्मेलन का उद्देश्य लोकतांत्रिक परंपराओं, संसदीय मूल्यों और विधायी संस्थाओं के बीच सहयोग को मजबूत करना है.

CSPOC सम्मेलन के इतिहास में यह संस्करण विशेष खास रखता है क्योंकि इस बार सबसे अधिक राष्ट्रमंडल देशों और प्रतिनिधियों की सहभागिता हुई है, जिससे इसे अब तक का सबसे बड़ा और व्यापक सम्मेलन माना जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आपका दायित्व केवल बोलना नहीं, बल्कि सुनना भी होता है और यह सुनिश्चित करना होता है कि हर किसी को अपनी बात रखने का अवसर मिले. सभी स्पीकर्स में एक समान गुण होता है – धैर्य. वे शोरगुल और अत्यधिक उत्साह से भरे सदस्यों को भी मुस्कान के साथ संभालते हैं.

उन्होंने कहा, इस विशेष अवसर पर मैं आप सभी का हृदय से स्वागत करता हूं. आज आपके बीच उपस्थित होकर हमें गर्व का अनुभव हो रहा है. आप सभी जिस स्थान पर बैठे हैं, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण साक्षी रहा है. गुलामी के अंतिम वर्षों में, जब भारत की आज़ादी तय हो चुकी थी, इसी सेंट्रल हॉल में संविधान सभा की बैठकें हुई थीं और भारत के संविधान की रचना की गई थी.

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उन्होंने कहा, स्वतंत्रता के बाद 75 सालों तक यह भवन भारत की संसद रहा. इसी हॉल में देश के भविष्य से जुड़े अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए और महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं. अब लोकतंत्र को समर्पित इस स्थान को “संविधान सदन” का नाम दिया गया है. हाल ही में भारत के संविधान के लागू होने के 75 साल पूरे हुए हैं और ऐसे समय में आप सभी अतिथियों की उपस्थिति भारत के लोकतंत्र के लिए विशेष महत्व रखती है.

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प्रधानमंत्री ने कहा, यह चौथा अवसर है जब कॉमनवेल्थ स्पीकर्स और प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स का सम्मेलन भारत में आयोजित हो रहा है. इस बार सम्मेलन का विषय है – इफेक्टिव डिलीवरी इन पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी. जब भारत आज़ाद हुआ था, तब यह आशंका जताई गई थी कि इतनी विविधताओं वाला देश लोकतंत्र को संभाल नहीं पाएगा. लेकिन भारत ने इस विविधता को लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत बना दिया.

यह भी कहा गया था कि अगर लोकतंत्र किसी तरह टिक भी गया, तो भारत विकास नहीं कर पाएगा. लेकिन भारत ने सिद्ध किया कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं स्थिरता, गति और कौशल – तीनों प्रदान करती हैं.

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प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है. आज भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है. आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है. आज भारत स्टील उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है. आज भारत के पास दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है. आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा एविएशन मार्केट है. आज भारत का रेलवे नेटवर्क दुनिया में चौथे स्थान पर है. आज भारत का मेट्रो रेल नेटवर्क दुनिया में तीसरे स्थान पर है. आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है. और आज भारत चावल उत्पादन में दुनिया में दूसरे स्थान पर है.

भारत में लोकतंत्र का अर्थ केवल चुनाव नहीं है, बल्कि लास्ट माइल डिलीवरी है. लोक कल्याण की भावना के साथ हम बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक तक सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं. इसी भावना के कारण पिछले कुछ वर्षों में भारत में लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं.

भारत में लोकतंत्र इसलिए परिणाम देता है, क्योंकि यहां जनता सर्वोपरि है. जनता की आकांक्षाओं और सपनों को हमने अपनी प्राथमिकता बनाया है. इसी विश्वास और इसी भावना के साथ भारत आगे बढ़ रहा है.

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CSPOC का आयोजन

संविधान सदन में आयोजित इस सम्मेलन में राष्ट्रमंडल देशों के संसदाध्यक्ष, पीठासीन अधिकारी और वरिष्ठ संसदीय प्रतिनिधि शामिल हुए. तीन दिवसीय सम्मेलन में लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका, विधायी प्रक्रियाओं को मजबूत करना, संसदीय पारदर्शिता और वैश्विक स्तर पर लोकतंत्र को सशक्त बनाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा.

उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि लोकतंत्र केवल एक शासन प्रणाली नहीं, बल्कि साझा मूल्यों और जिम्मेदारियों का प्रतीक है..उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रमंडल देशों के बीच संसदीय सहयोग वैश्विक चुनौतियों के समाधान में अहम भूमिका निभा सकता है.

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