Special Parliament Session Live Updates: संसद का विशेष सत्र आज गुरुवार से शुरू हो गया. बिल पेश होते सदन में हंगामा मच गया. सुबह से दोपहर तक की कार्रवाई में विपक्ष के कई नेताओं ने परिसीमन बिल पर विरोध जताया. अखिलेश यादव ने कहा कि हम महिला आरक्षण पर साथ हैं, लेकिन भाजपाई साजिश के खिलाफ. वहीं इससे पहले उनकी मुस्लिम महिलाओं के लिए सवाल पर अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है.
दोपहर बाद पीएम मोदी ने भी परिसीमन बिल पर अपनी बात रखी, उन्होंने कहा कि, महिला आरक्षण बिल से जुड़े संशोधनों पर कहा कि हमारे देश में जब जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है. उसका हाल बुरे से बुरा किया है. कभी माफी नहीं मिली. पीएम मोदी ने कहा कि मैं वादा और गारंटी देता हूं कि इस बिल में किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा, अनुपात भी नहीं बदलेगा.
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा- हमें महिला आरक्षण से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसमें परिसीमन को क्यों शामिल किया जा रहा है. परिसीमन से जुड़े कई मुद्दे हैं. इस पर लंबी चर्चा की जरूरत है, लेकिन वे इसे 2-3 दिनों में ही निपटा देना चाहते हैं, जो मुमकिन नहीं है. अगर सरकार सच में यह महिला आरक्षण चाहती है, तो वे इसे 2023 में ही कर सकते थे.
आप नेता संजय सिंह ने कहा कि लोकसभा की सीटों में 50% की बढ़ोतरी कैसे होगी, उन्हें इसका फॉर्मूला बताना चाहिए. अगर आप इसे 2011 की जनगणना के आधार पर कर रहे हैं, तो 2026 में जो जनगणना होने वाली है, उसको ध्यान में क्यों नहीं रख रहे, हम 33% आरक्षण का समर्थन करेंगे, बशर्ते यह 543 सीटों के आधार पर लागू किया जाए.
TDP सांसद बायरेड्डी शबरी ने कहा, 'मैं बड़े गर्व के साथ मैं ऐतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का समर्थन करती हूं. तेलुगु देशम पार्टी की ओर से इस कदम का स्वागत करती हूं.
अनित शाह ने कहा कि यह भी झूठ है कि सरकार जातीय जनगणना नहीं कराना चाहती. जनगणना दो हिस्सों में होती है पहले मकानों को इंगित किया जाता है. फिर निवासियों से पूछा जाता है. 850 का आंकड़ा कहां से आया, ये भी समझाता हूं. मानों 100 सीटें हैं जिसमें 33% आरक्षण देना है तो उसमें 50 सीटें बढ़ाते है तो सीटें 150 होती हैं. 850 राउंड ऑफ फिगर है, कल ये भी डिटेल में बताऊंगा.
अमित शाह ने कहा, कुल मिलाकर साउथ में संसद की कुल 543 सीटों में 129 सांसद आते हैं. यह बढ़कर 195 सीटों का हो जाएगा. मतलब उनकी शक्ति कम नहीं हो रही, बल्कि बढ़ रही है. मैं जिम्मेदारी के साथ यह कह रहा हूं.' अमित शाह ने केसी वेणुगोपाल पर निशाना साधा, बोले- ‘ वेणुगोपाल कह रहे हैं कि यह किसने कहा, मैं भारत का गृहमंत्री यह बात कह रहा हूं. कल उनको डिटेल जवाब दूंगा. बस कल सुनने के लिए बैठे. केजी के बच्चे को समझ आए इतनी सरलता से बताउंगा, बस धैर्य से सुनें.’
अमित शाह ने कहा कि 'कर्नाटक राज्य में 28 सीटें हैं ये बिल पारित होने के बाद कर्नाटक की संख्या 42 हो जाएगी और प्रतिशत 5.14 हो जाएगा. आंध्र प्रदेश में अभी 25 सीटें हैं उसका प्रतिशत 4.60% है. बिल पारित होने के बाद सीटें 38 हो जाएंगी. तेलंगाना में 17 सीटे हैं उसका 3,13% है. बाद में बढ़कर 26 हो जाएंगी. तमिलनाडु में 39 सांसद हैं उसका प्रतिशत 7.18% है. यह बढ़कर 59 सांसद हो जाएंगे. नए सदन में प्रतिशत 7.23 हो जाएगा. केरल में 20 सांसद हैं, 3.68% सांसद है. जो बढ़कर 30 सांसद हो जाएंगे.
प्रियंका गांधी ने भाषण में जो आरोप लगाए और सवाल उठाए, गृहमंत्री अमित शाह इसका जवाब देने के लिए उठे. उन्होंने कहा- 'पूरी चर्चा पर सभी सवालों का जवाब मैं कल दूंगा, लेकिन आज भी कुछ जवाब देने हैं, ताकि स्पष्टता बनी रहे. एक सबसे बड़ा नैरेटिव खड़ा किया जा रहा है कि ये जो 3 बिल हैं। वो आने से साउथ के राज्यों की क्षमता लोकसभा में कम हो जाएगी. मैं बिल को प्रैक्टिकली बता रहा हूं. इसे समझने की कोशिश कीजिए.
प्रियंका गांधी ने कहा, '543 में से महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं दे रहे. अगर पद खोने का डर नहीं तो कुछ लोग इसमें अपना पद खो दें. ताकि महिलाएं और ओबीसी वर्ग आ सके. ये आज ही कर दें, शुभ काम हो जाएगा काला टीका भी काम आ जाएगा.' ‘देश की महिलाओं के नाम पर देश के बुनियादी ढांचों से खिलवाड़ नहीं हो सकता। संसद को कमजोर करके सत्ता कायम रखने की साजिश हो रही है. यह आपकी हस्ती, पद और गरिमा के अनुकूल है. इसी में से एससी एसटी का जो दर्जा है एससीएसटी में महिलाओं का आरक्षण 33% हो जाएगा एक तिहाई आरक्षण हो जाए ओबीसी का भी उचित आरक्षण हो जाए. उन्होंने कहा कि यह आज ही पारित हो सकता है. शुभकाम भी हो जाएगा. बेवजह की प्रक्रिया से परिसीमन से देश का नुकसान भी नहीं होगा और काला टीका भी काम आ जाएगा. ’
प्रियंका गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह पर तंज कसते हुए कहा कि 'राजनीति में कुटिल होना अपनी जगह है लेकिन सत्ता बनाए रखने की महात्वांक्षाओं बनाए रखने के लिए देश में सही फैसले लेने चाहिए. पीएम पर बहुत दबाव है इंटरनेशनल प्रेशर है. इसलिए उन्होंने महिला आरक्षण मुद्दा उठाया.'
प्रियंका गांधा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तंज कसा- उन्होने कहा 'शाह जी हंस रहे हैं, पूरी प्लानिंग बना रखी है. चाणक्य आज जिंदा होते तो वो भी चौंक जाते. अचानक प्रदेशों में चुनाव के दौरान सदन की बैठक बुलाओ. प्रारूप सिर्फ एक दिन पहले सावर्जनिक करो. मीडिया में चर्चा कराओ कि मोदी जी महिला उत्थान के लिए बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं. सबको इनका साथ देना चाहिए. ये करके विपक्ष को धर्मसंकट में डाल दो. एक तरफ महिला आरक्षण दूसरी तरफ काट-छाट की आजादी.'
प्रियंका गांधी ने कहा, 'पीएम के खोखले आश्वासनों के बावजूद संसद में राज्यों की मौजूदगी बदल जाएगी. जिस तरह असम में उन्होंने मनचाही सीटों को काटा, नई सीमाएं बनाएं उसी तरह यह देश में करेंगे. 'परिसीमन आयोग में सरकार द्वारा चुने गए तीन लोग देश के लोकतंत्र को खत्म करेंगे. अगर ये बिल पास होता है देश में लोकतंत्र खत्म हो जाएगा. मौजूदा सरकार जनता की आंखों में धूल झोंक रही है. ये ओबीसी वर्ग का हक छीन रहे हैं, ताकि कुछ प्रदेशों की ताकत कम किया जा सके.
प्रियंका गांधी ने कहा- 2011 की जनगणना को परिसीमन का आधार बनाकर मोदी जी उनका हक छीनना चाहते हैं, कांग्रेस यह होने नहीं देगी. इस बिल में और भी कमी है कि संसद में 50% विस्तार का प्रस्ताव है लेकिन इस परिवर्तन के नियम क्या होंगे उसके बारे में कोई डिटेल नहीं है.
प्रियंका गांधी ने कहा- आपको इतनी जल्दबाजी क्यों है. आज पीएम महोदय ने भले हल्के में बोल दिया कि इस वर्ग उस वर्ग को बाद में देख लेंगे. कौन सा वर्ग पिछड़ा वर्ग. हम इनकी मांग कर रहे हैं इन्हें अपना हक मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पीएम किस बात से घबरा रहे हैं. इस बात से न कि जब नई जनगणना होगी तो ओबीसी के नए आंकड़ें निकलेंगे तो पता चलेगा कि यह वर्ग कितना मजबूत है.
प्रियंका गांधी ने कहा कि आज की चर्चा महिला आरक्षण पर नहीं है. मैंने इसका प्रारूप पढ़ा है. सबसे पहले इसमें लिखा है कि महिला आरक्षण 2029 तक लागू हो, हम सहमत हैं. दूसरा है कि सीटों की संख्या 850 तक बढ़ाई जाएगी. इसके लिए परिसीमन आयोग बनाया जाएगा जो 2011 की जनगणना को आधार बनाएगा. इसकी गहराई में जाएं तो इसमें राजनीति की बू आती है. 2023 के बिल में दो चीजें थी जो इसमें नहीं है. उसमें लिखा था कि नई जनगणना कराई जाएगी.
प्रियंका गांधी ने कहा कि वे कह रहे हैं कि उन्हें इसका श्रेय नहीं चाहिए. बार-बार बहकाने वाले पुरुषों को महिलाएं पहचान लेती हैं. सावधान हो जाइए नहीं तो पकड़े जाएंगे. 2023 में मोदी सरकार ने जब यह बिल पास किया तो हमने उसका समर्थन किया. आज भी उसमें कोई शक नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस इसका समर्थन नहीं करेगी. हम डटकर खड़े हैं.
प्रियंका गांधी ने कहा- बिल का प्रारूप देखिए, 'संसद में महिला आरक्षण 2029 तक लागू करना चाहिए. इसे लागू करने के लिए सीटों की संख्या 50 प्रतिशत बढ़ाई जानी चाहिए. इसके लिए परिसाीमन आयोग बनाया जाएगा. प्रियंका गांधी ने कहा- ऊपर-ऊपर से इस ड्राफ्ट में कोई समस्या नहीं है, लेकिन असल बात परिसीमन है और यह प्रतिनिधित्व का मुद्दा है.'
संसद में चल रहे विशेष सत्र के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने अपने कक्ष में वरिष्ठ मंत्रियों के साथ अहम बातचीत की. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे. बैठक में संसद के विशेष सत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है. वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और जी. रेड्डी भी प्रधानमंत्री से मिलने उनके कक्ष में पहुंचे.
जयराम रमेश बोले- असली मुद्दा महिलाओं का नहीं, बल्कि संविधान का है. उनका आरोप है कि सरकार व्यवस्था को अपने हिसाब से बदलना चाहती है. उनका दावा है कि इस मुद्दे पर लोकसभा में सरकार को कड़ी चुनौती मिलेगी और आगे की वोटिंग में तस्वीर साफ हो जाएगी.
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा- कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और सांसदों ने जो चिंताएं जताईं, उन्हें ‘तकनीकी बहानेबाजी’ कहकर खारिज कर दिया गया. इससे दक्षिण, पूर्वोत्तर और अन्य राज्यों के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज किया गया है. माना जा रहा है कि इसका जवाब लोग चुनाव में देंगे, खासकर तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल मेंय
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में अपनी जाति का जिक्र किया, लेकिन ओबीसी महिलाओं के लिए अलग आरक्षण (कोटा में कोटा) की मांग पर कुछ नहीं कहा, जिसे विपक्ष लंबे समय से उठा रहा है. उन्होंने यह भी माना कि स्थानीय निकायों में महिला आरक्षण से महिलाओं में जागरूकता बढ़ी है, लेकिन यह नहीं बताया कि इसकी शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय हुई थी.
वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी की स्पीच पर टिप्पणी की. उन्होंने X पर पोस्ट में लिखा, 'प्रधानमंत्री मोदी ने आज लोकसभा में सिर्फ 40 मिनट का भाषण दिया. लेकिन उन्होंने उस मुख्य मुद्दे—परिसीमन—पर कुछ नहीं कहा, जो इस विशेष सत्र का सबसे बड़ा विषय है.इस मुद्दे पर उठाई गई किसी भी चिंता का उन्होंने जवाब नहीं दिया.
प्रधानमंत्री ने बार-बार कहा कि सभी दल मिलकर इन बिलों को पास करें, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसा माहौल बनाने की कोशिश नहीं की, उन्होंने दावा किया कि सभी पार्टियों से बात की गई है, जबकि विपक्ष के नेता राहुल गांधी की सर्वदलीय बैठक की मांग को नजरअंदाज कर दिया गया. सरकार ने राज्यों से भी इस पर कोई चर्चा नहीं की, जबकि लोकसभा और विधानसभा दोनों के लिए परिसीमन की बात हो रही है. साथ ही, सरकार ने यह भी साफ नहीं किया कि परिसीमन कैसे होगा.
पीएम मोदी ने कहा कि- कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है. इसका अगर विरोध करेंगे तो स्वाभाविक है कि राजनीतिक लाभ मुझे होगा, अगर साथ चलेंगे तो किसी को भी नुकसान नहीं होगा. हमें क्रेडिट नहीं चाहिए जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने तैयार हूं. सबकी फोटो छपवा देंगे. ले लो जी क्रेडिट. सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं.
हम भ्रम में न रहें, मैं और तुम की बात नहीं कर रहा हूं मैं कि हम देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं. ये उनका हक है और हमने कई दशकों से उसको रोका है. आज उसका प्रायश्चित करके उस अपराध से मुक्ति पाने का अवसर है.
हम सब जानते हें कि कैसे चालाकी चतुराई की है. हम इसके पक्ष में ही हैं, लेकिन हर बार कोई न कोई टेक्निकल पूंछ लगाकर रोक दिया गया. लेकिन अब देश की नारी को नहीं समझा पाओगे.सदन में नंबर का खेल तो बाद में सामने आएगा. 3 दशक तक इसको फंसाकर रखा, जो करना था कर लिया। अब छोड़ दो न भाई। यहां कुछ लोगों को लगता है, इसमें कहीं न कहीं मोदी का राजनीतिक स्वार्थ है.
पीएम मोदी बोले- अगर आपको गारंटी चाहिए तो वो भी देता हूं. मैं कहना चाहूंगा कि यहां बैठकर हमें संविधान ने देश को टुकड़ों के रूप में सोचने का अधिकार ही नहीं दिया है. कश्मीर हो या कन्या कुमारी हम एक देश के रूप में ही इसे सोच सकते हैं. ये प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी. भूतकाल में जो सरकार रहीं, जो उस समय से अनुपात चला आ रहा है उसमें भी बदलाव नहीं होगा. पीएम मोदी ने कहा किअगर गांरटी शब्द चाहिए तो मैं वह शब्द भी उपयोग करता हूं, वादा की बात करते हो तो उसे भी इस्तेमाल करता हूं. तमिल में कोई शब्द हो तो मैं उसे भी कहता हूं, क्योंकि जब नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है.
पीएम मोदी ने कहा- पिछले दिनों जब हम 2023 में चर्चा कर रहे थे तब हर कोई कह रहा था कि इसे जल्दी करो. तब हमारे पास समय नहीं था. अब हम इसे 2029 में करने वाले हैं. इसलिए समय की मांग है कि हम और ज्यादा विलंब न करें. इस दौरान संविधान के जानकार लोगों से चचा्र की, सारा मंथन करते करते. यह सामने आया कि कुछ रास्ता निकालना होगा तब हम माता बहनों की शक्ति को जोड़ सकते हैं.
पीएम मोदी बोले- मैं अपील करने आया हूं कि इसको राजनीतिक तराजू से मत तौलिए. आज का यह अवसर एक साथ बैठकर एक दिशा में सोचकर विकसित भारत बनाने में खुले मन से स्वीकार करने का अवसर है. मैंने पहले भी कहा कि आज पूरा देश विशेषकर नारी शक्ति हमारे निर्णय तो देखेगी लेकिन उससे ज्यादा हमारी नीयत को देखेगी, इसलिए हमारी नीयत की खोट देश की नारी शक्ति कभी माफ नहीं करेगी.
पीएम मोदी ने अपनी स्पीच में विपक्ष को आइना दिखाया. उन्होंने कहा- 'हमारे देश में जब चुनाव आया है उसमें महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस जिसने विरोध किया है उसका हाल बुरा हुआ है. 2024 के चुनाव में ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि किसी ने विरोध नहीं किया. आज भी मैं कहता हूं कि हम साथ जाते हैं तो इतिहास गवाह है कि ये किसी एक के पक्ष में नहीं जाएगा, ये देश के लोकतंत्र के पक्ष में जाएगा. हम सब उसके हकदार रहेंगे. इसलिए जिन को इसमें राजनीति की बू आ रही है वो खुद के परिणामों को देख लें. इसी में फायदा है जो नुकसान हो रहा है उससे बच जाओगे. इसलिए इसे राजनैतिक रंग देने की जरूरत नहीं है.
पीएम मोदी बोले- जब मैं संगठन का एक कार्यकर्ता था तब चर्चा होती थी कि देखिए ये कैसे लोग हैं, पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, लेकिन क्योंकि उनमें उनको खुद का पद जाने का डर नहीं लगता है. हम सुरक्षित हैं इसलिए दे दो. इसलिए पंचायत में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए.
मैं एक और बात कहता हूं कि जिसने 30 साल पहले जिसने विरोध किया वह राजनीतिक गलियारों से नीचे नहीं गया, लेकिन ग्रास रूट पर आज वहीं बहनें वोकल हैं. लाखों बहनें जो काम कर चुकी हैं वे मुखरित हैं. वे कहती हैं कि हमें निर्णय प्रकि्रया में जोड़ो. जो संसद में होती है.
पीएम मोदी बोले- 'मैं यह मानता हूं कि विकसित भारत का मतलब सड़के रेल या संरचना से जुड़े आंकड़े नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब नीति निर्धारण में देश की आधी आबादी हिस्सा बने यह भी है. हम पहले ही देर कर चुके हैं. इसे सभी को स्वीकार मानना होगा. जब हम अकेले मिलते हैं, तो यह मानते हैं कि हां ये जरूरी है, लेकिन जो राजनैतिक दिशा में ही सोचते हैं मैं उनहें एक सलाह देना चाहता हूं मित्र के रूप में, जो उनके काम आएगी.
पीएम मोदी ने कहा कि, हमारा सौभाग्य है कि हमें देश की आधी आबादी को राष्ट्र निर्माण की नीति बनाने की प्रक्रिया में शामिल होने का सौभाग्य मिल रहा है. हम सभी सांसद इस अवसर को जाने न दें. हम भारतीय सब मिलकर के देश को नई दिशा देने जा रहे हैं. हमारी शासन वयवस्था को संवेदनशीलता से भरने का एक सार्थक प्रयास करने जा रहे हैं. इस मंथन से जो अमृत निकलेगा वो देश की राजनीति की भी दशा दिशा तय करेगा.
पीएम मोदी ने परिसीमन बिल पर लोकसभा में अपनी बात रखनी शुरू की है. उन्होंने कहा - राष्ट्र के जीवन में कुछ बड़े पल आते हैं उस समय समाज की मनोस्थिति एक मजबूत धरोहर तैयार कर देती हैं. मैं समझता हूं संसद के इतिहास में ये वैसे ही पल हैं। आवश्यकता यही थी कि 25 से 30 साल पहले जब ये विचार सामने आया. जरूरत महसूस हुई तब इसे लागू कर देते और आज तक इसे परिपक्वता तक पहुंचा देते. हम मदर ऑफ डेमोक्रेसी रहे हैं। हमारी हजार साल की विकास यात्रा रही है.
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा की रणनीति से इनकी मंशा पर सवाल खड़े हुए हैं. SIR के जरिए उनकी रणनीति का भंडाफोड़ हुआ है. जब पहली गिनती में विपक्ष वोट बचाने में सफल हुआ, तो भाजपा फॉर्म 7 लेकर आई और उसे बड़े पैमाने पर बांटना शुरू किया गया. इसे भी पकड़ लिया गया, जिससे यह सामने आया कि फॉर्म 7 का इस्तेमाल संदिग्ध तरीके से किया जा रहा था. चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दी गई, तो वोट कटना रुका, लेकिन फर्जी हस्ताक्षरों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस पूरे घटनाक्रम से भाजपा की मंशा पर सवाल खड़े हुए हैं.
अखिलेश यादव बोले- असल मुद्दा यह है कि भाजपा जनगणना को टालना चाहती है, खासकर जातीय जनगणना के कारण, क्योंकि अगर जातीय आंकड़े सामने आएंगे, तो आरक्षण की वास्तविक मांग और दबाव बढ़ेगा, जिसे भाजपा टालना चाहती है. यही वजह है कि महिला आरक्षण को परिसीमन और जनगणना से जोड़कर इसे लागू करने में देरी की जा रही है. इससे साफ संकेत मिलता है कि मंशा आरक्षण देने की नहीं, बल्कि उसे टालने की है.
अखिलेश यादव ने कहा- 'हम साफ तौर पर कहते हैं कि हम महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसके साथ कुछ गंभीर सवाल भी हैं। डॉ. राममनोहर लोहिया हमेशा महिलाओं को हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर हिस्सेदारी देने की बात करते थे. उनका मानना था कि अगर महिला जागरूक होती है, तो पूरा समाज जागरूक होता है. उत्तर प्रदेश में पंचायत स्तर पर महिलाओं को सबसे ज्यादा आरक्षण देने का काम समाजवादी पार्टी ने किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि भाजपा को इतनी जल्दबाजी क्यों है?'
अखिलेश यादवः भाजपा यह बताए कि 21 राज्यों में जहां उनकी सरकारें हैं, वहां कितनी महिलाएं मुख्यमंत्री हैं. दिल्ली में जो महिला नेतृत्व दिखाया जाता है, उसे भी “हाफ सीएम” कहा जाता है। सवाल यह है कि उनके पास वास्तविक अधिकार कितने हैं? देश की सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा करने वाली भाजपा अपने ही ढांचे में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दे पा रही है? पूरे देश में इनके विधायक चुने गए हैं, लेकिन 10 प्रतिशत से ऊपर महिला प्रतिनिधित्व नहीं पहुंच पा रहा. लोकसभा में भी उनकी संख्या क्या है, यह भी सवालों के घेरे में है.
अखिलेश यादव ने कहा कि, उत्तर प्रदेश में पंचायत में महिलाओं के लिए सबसे ज्यादा आरक्षण लागू करने का काम सपा ने किया है. हमारा सवाल है कि भाजपा को इतनी जल्दी क्यों है. सच ये है कि वे जनगणना को टालना चाहती है. जनगणना जातीय जनगणना की वजह से टालना चाहती है. क्योंकि वे आरक्षण देना नहीं चाहते हैं.
सपा नेता अखिलेश यादव ने परिसीमन बिल पर बीजेपी और सरकार की नीयत पर आरोप लगाए. उन्होंने कहा- सपा महिला आरक्षण के पक्ष हैं. डॉ. लोहिया हमेशा जेंडर जस्टिस और सोशल जस्टिस के पक्ष में रहे. हम भी उसी राह पर हैं. ये आरक्षण हमारे आह्वान को और मजबूत कर रहा है. अब भारतीय जनता पार्टी नारी को नारा बनाने की कोशिश कर रही है. जिन्होंने नारी को अपने संगठन में नहीं रखा वे उसके मान सम्मान को कैसे रखेंगे? पिछले कई साल से ये लोग सरकार में हैं, लेकिन हम दुनिया के आंकड़े देखें तो हम जेंडर इक्वालिटी में कहां खड़े हैं. इनकी खुद की सरकार को देखें तो इनकी 21 जगह सरकार है, लेकिन कितना महिला मुख्यमंत्री हैं.
तेजस्वी सूर्या ने सदन में सभी राज्यों का आंकड़ा भी सामने रखा और बताया कि परिसीमन के बाद किसकी कितनी सीटें बढ़ेंगी. उन्होने कहा कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन लागू नहीं किया जाएगा. सीएम एमके स्टालिन गलत जानकारी फैला रहे हैं. परिसीमन के जरिए तमिलनाडु से सांसदों की संख्या 39 से बढ़कर 59 हो सकती है. इससे तो तमिलनाडु का भी रिप्रेजेंटेशन बढ़ेगा.
बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने परिसीमन को लेकर कहा कि दक्षिण भारत में लोगों में बहुत बड़ा भ्रम फैलाया जा रहा है. पिछले तीन दिनों में हमने दक्षिण भारत में विपक्ष का विरोध अराजक होता जा रहा है और विपक्ष भ्रम भी फैला रहा है. परिसीमन कोई बैकडोर प्रोसेस नहीं है, ये संविधान के निर्धारित नियमों के आधार पर ही हो रहा है. तेजस्वी सूर्या ने कहा कि अगर लोकसभा सीटों को फ्रीज रखा जाता है और महिला आरक्षण को उसी रूप में लागू किया जाता है, तो इससे वोटों के असल वैल्यू का नुकसान हो जाएगा.
“महिला आरक्षण विधेयक 2023 में पारित किया गया था, जिसके प्रावधानों को 2026 के बाद होने वाली जनगणना और परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा. लोकसभा की सदस्य संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी, जिससे कुल सीटें बढ़कर 815 हो जाएंगी. इनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, जो सदन की कुल संख्या का एक-तिहाई है. किसी भी राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा और उनकी मौजूदा ताकत बरकरार रहेगी.”
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने परिसीमन बिल पर बोलना शुरू किया है. उन्होंने कहा- कानून मंत्री कि बात से ऐसा लग रहा था कि, पहली बार सदन में महिला आरक्षण पर चर्चा हो रही है. अपने भाषण में उन्होंने ऐसा ढांचा बनाने की कोशिश की. आज से ही 3 साल पहले गृह मंत्री ने ऐसी ही बातें की थीं. अगर दोनों की बातें सुनेंगे तो 90 प्रतिशत वही बातें हैं, जो आज कानून मंत्री ने कहीं. उस समय भी ऐसी ही बातें थीं. तब भी हमने यही कहा था कि हमारी पार्टी महिला आरक्षण के पक्ष में हैं, लेकिन इसे सरल कीजिए, ताकि जब पारित हो तभी लागू हो जाए. इसे परिसीमन के साथ न जोड़ें.
लोकसभा में तीनों बिलों पर चर्चा शुरू हुई है. वोटिंग में पक्ष में 251 वोट पड़ने के बाद ये चर्चा शुरू हुई है. अब भाजपा की तरफ से अुर्जन राम मेघवाल ने चर्चा की शुरुआत की. उन्होंने कहा- हमारे संविधान निर्माताओं ने संविधान को यह शक्ति दी है कि संशोधन करके लोकहित के फैसले ले सकते हैं. ये तीनों बिल, महिलाओं के लिए हैं.
लोकसभा में पेश किए गए तीनों बिलों पर 17 अप्रैल को शाम 4 बजे वोटिंग होगी. आज और कल इस पर चर्चा होगी. सदन में चर्चा के लिए घंटों को तय करने की बात हुई.संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार यहां सुनने और जवाब देने के लिए है. सरकार ने 12 घंटे चर्चा का समय तय किया है.
बिलों को पुर्नस्थापित करने के लिए ध्वनि मत से पास कराया जा रहा था. इस दौरान विपक्ष की मांग पर मत विभाजन किया गया. इसके लिए वोटिंग कराई गई. वोटिंग का फाइनल रिजल्ट आया है इसमें पक्ष में 251, विपक्ष में 185 वोट पड़े.
सदन में बिलों को पेश करने के लिए करने के लिए ध्वनि मत से पास कराने की कोशिश की गई. इसके बाद विपक्ष ने मत विभाजन मांगा. इसके बाद स्पीकर ने इसके लिए वोटिंग की अनुमति दी. पक्ष में 207, विपक्ष में 126 वोट पड़े हैं.

डीएमके सांसद टीआर बालू ने सदन में पेश तीनों बिलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि ये तीनों बिल ही सैंडविच बिल हैं, हम विरोध करते हैं. क्योंकि ये आपस में इंटरलिंक हैं. हमारी पार्टी इसका विरोध करती है. हमने काले झंडे दिखाए. इस पर स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि आप चाहे पीले झंडे दिखाओ या काले दिखाओ. इससे सदन को कोई फर्क नहीं पड़ता.
अमित शाह ने कहा कि, मुस्लिमों को धर्म के आधार पर आरक्षण गैर संवैधानिक है, इसका सवाल ही पैदा नहीं होता. अखिलेश यादव बोले कि आपने अनडेमोक्रेटिक बात कही है. धर्म की बात कही होगी. पूरा देश आधी आबादी को आरक्षण चाहता है. मैं जानना चाहता हूं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए क्या. अमित शाह ने कहा- समाजवादी पार्टी पूरी टिकटें मुस्लिम महिलाओं को दे दे, हमें कहां आपत्ति है.
सपा सांसद अखिलेश यादव ने कहा कि जनगणना क्यों नहीं करा रहे. आप धोखा देकर ये बिल लाना चाहते हैं. इस पर अमित शाह ने कहा- अध्यक्ष जी सदन की कार्रवाई को पूरा देश देख रहा हैय कुछ बयान ऐसे किए गए जो जनता में चिंता पैदा कर रहे हैं. अखिलेश पूछ रहे हैं जनगणना क्यों नहीं हो रही है। मैं देश को बताना चाहता हूं जनगणना जारी है. उन्होंने कहा कि हम जातीय जनगणना की मांग करेंगे. मैं बताना चाहता हूं कि सरकार इसका भी निर्णय ले चुकी है। और जाति के साथ ही यह जनगणना हो रही है.
लोकसभा में परिसीन बिल पेश होते ही हंगामा शुरू हो गया है. सपा सांसद धर्मेंद्र यादव ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि देश के संविधान में हम संसद को पावर इस बात की दी गई है कि संविधान की रक्षा करें, सुरक्षा करें, लेकिन सभापति जी आज ऐसे बिल आए हैं कि जो हमारे संविधान को ही तोड़-मरोड़ रहे हैं और इसका हम समाजवादी पार्टी के लोग पुरजोर विरोध करते हैं. सभापति जी जिस तरह से डिलिमिटेशन को जनगणना से पृथक किया जा रहा है. ये मैं समझता हूं कि ये संविधान की भावनाओं के पूरी तरह से विरोध में हैं. समाजवादियों से बड़ा महिलाओं का हितैषी इस देश की कोई पार्टी नहीं है. आज भी आपसे ज्यादा सदस्य हमारे पास हैं. इसलिए सभापति जी आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध है कि इस बिल को संविधान संशोधन बिल को परिसीमन बिल को केंद्र आज संशोधन बिल को वापस लिया जाए.
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में परिसीमन बिल पेश कर दिया है. बिल के लोकसभा में पेश करते ही कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने बिल का विरोध किया तो सदन में हंगामा शुरू हो गया.
लोकसभा के विशेष सत्र की कार्यवाही शुरू हो गई है. इस मौके पर सबसे पहले आशा भोसले के निधन पर शोक जताया.
टीडीपी सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि सदन में सरकार की तरफ़ से कहा जायेगा कि परिसीमन बिल से सभी राज्यो में लोकसभा और विधानसभा में 50 प्रतिशत सीट बढ़ाई जायेंगी.
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी संसद पहुंच गए हैं, यहां वे महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन पर केंद्रित विशेष सत्र में हिस्सा लेंगे.
पीएम मोदी ने X पर लिखा- 'आज से शुरू हो रही संसद की विशेष बैठक में हमारा देश नारी सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है. हमारी माताओं-बहनों का सम्मान राष्ट्र का सम्मान है और यही भावना लेकर हम इस दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रहे हैं.'
मल्लिकार्जुन खड़गे बोले- वे विधेयक के सिद्धांत के पक्ष में हैं, लेकिन सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्ति जताई. खड़गे ने आरोप लगाया कि ये प्रक्रिया राजनीति से प्रेरित है और विपक्ष को दबाने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने दोहराया कि विपक्ष महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, बल्कि इसके प्रस्तुतिकरण और लागू करने के तरीके पर सवाल उठा रहा है. खड़गे ने कहा कि हम संसद में एकजुट होकर लड़ेंगे. हमने तय किया है कि इस विधेयक और इसके संशोधनों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज उठाएंगे.
दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर विपक्ष की अहम बैठक हुई. इसमें करीब 20 दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक के बाद विपक्ष ने एकजुट रुख दिखाते हुए सरकार के तरीके पर गंभीर आपत्तियां जताईं. इस बैठक में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, UBT के संजय राउत, AAP के संजय सिंह, DMK के टी.आर. बालू, CPI की एनी राजा, IUML के ई.टी. मोहम्मद बशीर, के.सी. वेणुगोपाल और कपिल सिब्बल भी मौजूद रहे.
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव भी सहयोगियों के साथ पहुंचे. इसके अलावा टीएमसी सांसद सागरिका घोष, एनसीपी (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले, निलोत्पल बसु और एन.के. प्रेमचंद्रन भी चर्चा में शामिल हुए. कुछ नेता वर्चुअली भी जुड़े. इनमें उद्धव ठाकरे, हेमंत सोरेन और दीपांकर भट्टाचार्य शामिल रहे. बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष का साझा रुख स्पष्ट किया.
दक्षिण भारत के कई राज्यों को डर है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा होने से उनकी राष्ट्रीय स्तर पर ताकत कम हो सकती है. हालांकि, सरकार का कहना है कि सीटें घटेंगी नहीं, बल्कि सभी राज्यों की सीटें बढ़ेंगी, जिससे संतुलन बना रहेगा. फिर भी, क्षेत्रीय दल इसे अपने प्रभाव में संभावित कमी के रूप में देख रहे हैं. कुल मिलाकर, ये सिर्फ एक विधेयक नहीं, बल्कि आने वाले समय की राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम है. असल में, ये कहानी 2023 से शुरू होती है, जब संसद ने “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पारित किया था.
इस कानून में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान तो था, लेकिन इसे लागू करने के लिए पहले नई जनगणना और परिसीमन जरूरी बताया गया था. इसी कारण कई लोगों को लगा कि इस बदलाव को जमीन पर उतरने में काफी समय लग सकता है. लेकिन हर कहानी में एक दूसरा पक्ष भी होता है. जैसे ही ये विधेयक सामने आए, विपक्षी दलों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना है कि यह कदम पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले महिलाओं को आकर्षित करने की कोशिश है और इसे उन्होंने तुष्टिकरण की राजनीति बताया. अब सबकी नजरें उस विशेष संसद सत्र पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि ये प्रस्ताव कानून बनते हैं या नहीं.
संसद में पेश होने वाले परिसीमन विधेयक के विरोध में तमिलनाडु सीएम एमके स्टालिन ने काला झंडा लहराया है. उन्होंने बिल की प्रतियां भी जलाईं और कहा कि “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो. पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा.
महिला आरक्षण विधेयक सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि यह बीजेपी और उसके सहयोगियों के ताज़ा छल का एक "काला दस्तावेज़" है, जो दरअसल "चालाक लोगों की एक गुप्त योजना" है. इसके भीतर पिछड़े और दलित समाज की महिलाओं को स्थायी रूप से कमजोर करने की साजिश छिपी हुई है. उन्हें वास्तविक जनप्रतिनिधित्व से वंचित करने के लिए एक चक्रव्यूह रचा जा रहा है. यह विधेयक वर्चस्ववादी सोच रखने वालों की हार की हताशा और महिलाओं के प्रति उनके शोषणकारी-दमनकारी सामंती मानसिकता से जन्मा है. महिला आरक्षण विधेयक असल में एक "जनविरोधी दिखावा" भर है.
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुख्य मुद्दा आज महिलाओ को आरक्षण देना है. 33% रिजर्वेशन देने के बाद इतिहास हो जायेगा. बाकि मुद्दा उठा कर के महिला आरक्षण को हानि पहुंचा रहे हैं. Delimitation को लेकर दक्षिण भारत में भ्रम फ़ैलाने का कोशिश की जा रही है. ऐसा नहीं करना चाहिए. डीएमके कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री M. K. Stalin के निर्देश पर पूरे राज्य के जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे. तमिलनाडु में नारे लग रहे हैं. “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो.
तीनों विधेयक पास होते हैं तो 2029 के आम चुनाव से ही महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है. ये प्रस्ताव 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर आधारित हैं, जिसमें महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान था.
सबसे बड़ा प्रस्ताव- लोकसभा की सीटों को बढ़ाना. अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, लेकिन सरकार चाहती है कि इन्हें बढ़ाकर अधिकतम 850 किया जाए, ताकि बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके.
दूसरा अहम प्रस्ताव- सरकार ने सुझाव दिया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं की एक-तिहाई (33%) सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं, ताकि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ सके.
हालांकि उस कानून को लागू करने की शर्त ये थी कि पहले नई जनगणना और उसके बाद परिसीमन हो. उस समय चिंता जताई गई थी कि ये आरक्षण लागू होने में काफी समय (शायद एक दशक या उससे ज्यादा) लग सकता है. अब नए विधेयकों के जरिए सरकार उस प्रक्रिया को तेज करना चाहती है, ताकि 2029 के आम चुनाव तक महिलाओं को आरक्षण मिल सके.
डीएमके कार्यकर्ता आज सुबह 11 बजे मुख्यमंत्री M. K. Stalin के निर्देश पर पूरे राज्य के जिलों में विरोध प्रदर्शन करेंगे. तमिलनाडु में नारे लग रहे हैं. “फासीवादी बीजेपी का घमंड चूर-चूर हो. पहले भी जब तमिलनाडु में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रतिरोध की आग भड़की थी, तो उसकी तपिश दिल्ली तक पहुंची थी। वह आग तब ही शांत हुई, जब दिल्ली को झुकना पड़ा.
सीएम एमके स्टालिन ने कहा- आज मैंने एक बार फिर उस ‘काले कानून’ की प्रति जलाकर नई आग जलाई है, जो तमिलों को उनकी ही जमीन पर शरणार्थी बना देता है.यह आग अब पूरे द्रविड़ भूभाग में फैलेगी और बीजेपी के अहंकार को खत्म करेगी.उन्होंने कहा ‘तमिल हमारी मां है तमिल हमारी आत्मा की धधकती हुई चेतना है!’
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1. केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण तय करना है.
2. संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 जनसंख्या की नई परिभाषा, बढ़ती आबादी के मद्देनजर संसद में सदस्यों की संख्या को बढ़ाना इसका मकसद.
3. परिसीमन विधेयक 2026 लोकसभा और विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना है. सीटों का फिर से निर्धारण होगा.