देश में 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' को लेकर चर्चा तेज हो गई है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) ने एक ताजा रिपोर्ट जारी की है. इसमें बताया गया है कि अगर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं, तो इससे न सिर्फ सरकारी खजाने की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक सुविधा भी बढ़ेगी.
आर्थिक परिषद के सदस्य संजीव सान्याल और संयुक्त निदेशक सात्विक देव ने रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक साथ चुनाव होने से 5 साल के चक्र में चुनाव ड्यूटी में लगने वाले कर्मचारियों की संख्या में 26 लाख (लगभग 28%) की कमी आएगी.
रिपोर्ट में ये भी दावा किया गया है कि चुनाव प्रक्रिया में लगने वाले कुल वर्किंग डेज में करीब 1.04 करोड़ दिनों की भारी बचत हो सकती है.
रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि चुनाव ड्यूटी में तैनात होने वाले ज्यादातर स्टाफ टीचर होते हैं. ज्यादातर मतदान केंद्र स्कूलों में बनाए जाते हैं. जब बार-बार चुनाव नहीं होंगे, तो शिक्षकों को ड्यूटी पर कम जाना पड़ेगा. इससे स्कूलों में पढ़ाई का नुकसान कम होगा और बच्चों के सीखने के नतीजों में सुधार होगा.
निर्वाचन आयोग का मानना है कि एक साथ चुनाव कराने के लिए सुरक्षा के इंतजाम बहुत बड़े स्तर पर करने होंगे. हालांकि, अलग-अलग राज्यों के चुनावों के लिए बार-बार सुरक्षा बलों को भेजने की जरूरत खत्म हो जाएगी. सुरक्षा कर्मियों पर पड़ने वाले असर का पता भविष्य में ही चल पाएगा, लेकिन प्रशासनिक बोझ कम होना तय है.
संयुक्त संसदीय समिति का कार्यकाल बढ़ा
इस बीच, लोकसभा ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' विधेयक की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) का कार्यकाल बढ़ा दिया है. अब इस समिति को संसद के मानसून सत्र के आखिरी हफ्ते के पहले दिन अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी. समिति इस कानून के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है ताकि इसे लागू करने में कोई संवैधानिक अड़चन न आए.