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'PM मोदी की तारीफ करने पर कोई पछतावा नहीं', बोले SC के रिटायर जज एमआर शाह

जस्टिस एमआर शाह 15 मई को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हो गए हैं. उन्होंने आजतक के साथ विशेष बातचीत में अपने विचारों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कामकाजी संबंधों के बारे में बात की. इसके साथ ही उन्होंने मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के 'टाइगर शाह' नाम देने के बारे में भी बताया.

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जस्टिस एमआर शाह 15 मई को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए हैं. (फाइल फोटो)
जस्टिस एमआर शाह 15 मई को सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए हैं. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट के जज एमआर शाह सोमवार को रिटायर हो गए हैं. विदाई समारोह में मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने उन्हें 'टाइगर शाह' की संज्ञा दी है. आजतक के साथ विशेष बातचीत में जस्टिस एमआर शाह ने बताया कि कैसे उन्हें 'टाइगर शाह' कहा जाने लगा. इसके साथ ही उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने के सवाल पर भी बेबाकी से जवाब दिया. जस्टिस शाह ने कहा कि उन्हें इस बात का कोई पछतावा नहीं है.

जस्टिस शाह ने कहा- 'टाइगर शाह' नाम उन्हें सीजेआई चंद्रचूड़ ने दिया है. टाइगर नाम के पीछे 'सीजेआई चंद्रचूड़ का प्यार और स्नेह' छिपा है. उन्होंने कहा- CJI चंद्रचूड़ ने उन्हें यह नाम तब दिया था, जब वे 2-3 साल पहले रूस में एक सम्मेलन में थे. उन्होंने कहा- हम एक सम्मेलन के लिए रूस गए थे. तब सीजेआई ने कहा, कोई भी काम टाइगर को देगा, टाइगर कर देगा. यह उनका मेरे लिए प्यार और स्नेह और सम्मान है. बेंच के बारे में पूछे जाने पर जस्टिस शाह ने कहा- मुझे सबके साथ बैठने में मजा आता था, क्योंकि उनका स्वभाव ऐसा है.

'कुछ लोगों की आलोचना से परेशान नहीं होने वाला'

बता दें कि 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करने के बाद सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज एमआर शाह को एक बार सरकार समर्थक होने के लिए निशाना बनाया गया है. जस्टिस शाह ने कहा- वे प्रधानमंत्री की प्रशंसा करने के लिए अपने बयान पर कायम हैं और वह कुछ लोगों के आलोचना करने से परेशान होने वाले नहीं हैं.

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'जिनके पास कुछ नहीं, वे आलोचना करते हैं'

बता दें कि जस्टिस एमआर शाह ने 2018 में गुजरात हाई कोर्ट की हीरक जयंती मनाने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की थी और सबसे लोकप्रिय, प्रिय, जीवंत और दूरदर्शी नेता बताया था. इसी बयान को शाह से पूछा गया तो उन्होंने कहा- मेरा विवेक स्पष्ट है और मेरे निर्णय कभी व्यक्तिगत विचारों से प्रभावित नहीं हुए हैं. कोई भी यह दिखाने के लिए उदाहरण नहीं दे सकता है कि (बयान) ने न्यायिक पक्ष पर मेरे निर्णय लेने को प्रभावित किया है. जिनके पास करने के लिए कुछ नहीं है, वे जजों की आलोचना करते हैं.

जब जस्टिस शाह से पूछा गया कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है तो उन्होंने कहा- खेद की बात कहां है, मैंने क्या गलत कहा है?

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क्या पीएम के साथ कामकाजी संबंध रहे हैं?

क्या गुजरात हाई कोर्ट के जज के रूप में कार्यकाल के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके कामकाजी संबंध थे? उन्होंने कहा- न्यायिक पक्ष में एक साथ काम करने का कोई सवाल ही नहीं है. शाह ने कहा- एक जज के रूप में अपने पूरे करियर में उनके राजनेताओं के साथ गहरे संबंध नहीं रहे. उन्होंने बिना किसी भय, पक्षपात या दुर्भावना के एक जज के रूप में अपना कर्तव्य निभाया.

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शाह ने कहा, मैंने सरकार के खिलाफ कई फैसले पारित किए हैं. जब हम फैसले देते हैं तो इस बात पर विचार नहीं करते हैं कि सत्ता में कौन है. हमारे लिए देश हित सबसे पहले होता है.

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