लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बाद शनिवार को तिरुवनंतपुरम से सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया. थरूर ने कहा कि रिजिजू ने भी माना कि उन्हें कोई महिला विरोधी नहीं कह सकता. थरूर ने 'एक्स' पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें विपक्षी सांसद लोकसभा के भीतर रिजिजू के साथ नजर आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि जब रिजिजू ने विपक्ष को 'महिला विरोधी' कहने की वजह समझाई, तब उनसे कहा गया कि यह आरोप उन पर लागू नहीं होता, जिसे मंत्री ने स्वीकार किया.
महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर थरूर की क्या है राय?
थरूर ने इस मौके पर महिलाओं की भागीदारी को लेकर अपना पक्ष भी दोहराया. उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज का आधा हिस्सा हैं और उन्हें संसद सहित हर संस्था में पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ना खतरनाक हो सकता है और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा सकता है.
विधेयक गिरने के बाद सियासी घमासान
यह बयान ऐसे समय आया है, जब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका. इस विधेयक में 2029 से संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू करने का प्रस्ताव था. साथ ही 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रावधान भी शामिल था. शुक्रवार को हुए मतदान में 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 ने विरोध में वोट दिया, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक 352 मत नहीं मिलने के कारण यह प्रस्ताव गिर गया.
कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने
विधेयक के गिरने के बाद कांग्रेस ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की उस कोशिश की हार बताया, जिसमें महिला आरक्षण को परिसीमन से जोड़ा गया था. कांग्रेस ने इसे संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत करार दिया.
वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने इसे 'काला दिन' बताया. किरेन रिजिजू ने कहा कि जिन दलों ने इस विधेयक को रोका है, उन्हें देश की महिलाओं के गुस्से का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि यह कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर ऐसा दाग है, जिसे वे कभी मिटा नहीं पाएंगे.