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खालिस्तानी संगठनों का कच्चा चिट्ठा निकालने कनाडा पहुंची NIA टीम, भगोड़ा पन्नू समेत कई निशाने पर

NIA का तीन सदस्यीय जांच दल, चार दिनों के विदेशी दौरे पर शुक्रवार को कनाडा पहुंच गया. यह दल भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे खालिस्तानी संगठनों की फंडिंग के स्रोत का पता लगाएगा.

खालिस्तानी संगठनों की फंडिंग के स्त्रोत का पता लगाएगा एनआईए खालिस्तानी संगठनों की फंडिंग के स्त्रोत का पता लगाएगा एनआईए
स्टोरी हाइलाइट्स
  • गुरपटवंत पन्नू सहित कई खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ जांच तेज
  • खालिस्तानी संगठनों की फंडिंग के स्रोत का पता लगाएगा एनआईए
  • 4 दिन की विदेश यात्रा पर शुक्रवार को कनाडा पहुंचा जांच दल

भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे खालिस्तानी संगठन (Khalistani groups) अब राष्ट्रीय जांच ब्यूरो (NIA) के रडार पर हैं. NIA का तीन सदस्यीय जांच दल चार दिनों के दौरे पर शुक्रवार को कनाडा पहुंच गया. यह दल खालिस्तानी संगठनों की फंडिंग के स्त्रोत का पता लगाएगा. एनआईए, कनाडा के अलावा जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन आ रही आर्थिक मदद का पता भी लगाएगा.

एनआईए अधिकारियों का दल पता लगाएगा कि हर साल ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी, 84 के सिख विरोधी दंगों, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और यहां तक कि किसान आंदोलन की आड़ लेकर भी समाज को बांटने, बरगलाने और राष्ट्र विरोधी प्रचार करने का काम कर रहे खालिस्तानी संगठनों को कहां-कहां से आर्थिक मदद मिल रही है?

एनआईए की टीम सिख फॉर जस्टिस (SFJ), बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI), खालिस्तान टाइगर फोर्स (KTF)और खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (KZF) जैसे खालिस्तानी आतंकवादी संगठनों की गतिविधियों की जांच को लेकर कनाडा सरकार के अधिकारियों से बातचीत करेगी.

सूत्रों के मुताबिक एनआईए के अधिकारी भारत विरोधी गतिविधियों संबंधी जानकारी के आदान-प्रदान के लिए परस्पर कानूनी सहायता संधि (Mutual Legal Assistance Treaty) को लागू करवाने की मांग करेंगे.

गौरतलब है कि एनआईए के पास पहले से ही खालिस्तानी आतंकवादियों को जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया,अमेरिका और ब्रिटेन से मिल रही आर्थिक मदद की पुख्ता जानकारी और तथ्य मौजूद हैं.

सिख्स फॉर जस्टिस बार-बार देता है पैसों का लालच

10 जुलाई 2019 को यूएपीए कानून के तहत सिख फॉर जस्टिस (SFJ) नाम के खालिस्तानी संगठन को आतंकवादी संगठन करार दिया गया था. इसके बाद से SFJ, स्वतंत्रता दिवस के मौकों पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए बाकायदा इनाम घोषित करता आया है. इस संगठन के कर्ताधर्ता गुरपटवंत पन्नू ने लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराने के लिए 2.5 लाख डॉलर यानी करीब 1.85 करोड रुपए के ईनाम की घोषणा भी की थी. पन्नू ने कृषि कानूनों के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों को भी  84 के सिख विरोधी दंगों के साथ जोड़ने की कोशिश की थी. वह कई साल से रेफरेंडम 2020 करवाकर खालिस्तान बनाने का दावा करता आ रहा है.

एनआईए ने 1 जुलाई 2020 को गुरपतवंत सिंह पन्नू और आठ दूसरे आतंकवादियों को आतंकवादी घोषित किया था. एनआईए की विशेष अदालत पन्नू को 2 अगस्त 2021 को भगोड़ा अपराधी भी करार दे चुकी है.

उधर एनआईए टीम के विदेश दौरे से अब भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त खालिस्तानी आतंकवादियों पर जांच का शिकंजा कसने की उम्मीद बंधी है. गुरपटवन्त सिंह पन्नू और 8 दूसरे खालिस्तानी आतंकवादी कई मामलों में वांछित हैं. पन्नू अमेरिका में बैठकर लोगों से खालिस्तान के नाम पर धन की उगाही करता है जिसका इस्तेमाल भारत विरोधी प्रचार और आतंक फैलाने की गतिविधियों पर किया जाता है.

पन्नू पिछले हफ्ते लंदन में आयोजित कर चुका है खालिस्तान रेफरेंडम

खालिस्तान रेफरेंडम के नाम पर भारत में सिखों को भड़काने में नाकाम रहा गुरपटवंत सिंह पन्नू अब विदेशों में रहकर रेफरेंडम करवा रहा है. 31 अक्टूबर 2021 को लंदन के वेस्टमिंस्टर में रेफरेंडम आयोजित किया गया जिसमें गिनती के लोग पहुंचे थे.

 

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