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सजा माफी पर फैसले से पहले हाईकोर्ट पहुंचा रेपिस्ट नारायण साईं, रिहाई की लगाई गुहार

आसाराम बापू के बेटे नारायण साईं ने दुष्कर्म मामले में उम्रकैद की सजा के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में नई जमानत याचिका दाखिल की है. 12 साल जेल में बिताने के बाद उसने अपील लंबित रहने तक रिहाई की मांग की है. कोर्ट इस याचिका पर 26 फरवरी को सुनवाई करेगा.

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नारायण साईं आसाराम का बेटा है, जो पहले से ही जेल में है. (Photo: PTI)
नारायण साईं आसाराम का बेटा है, जो पहले से ही जेल में है. (Photo: PTI)

दुष्कर्म के दोषी और उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम के बेटे नारायण साईं ने गुजरात हाईकोर्ट में नई जमानत याचिका दायर की है. इस याचिका में उसने सजा माफी पर अंतिम फैसला होने तक जेल से रिहा किए जाने की मांग की है. हाईकोर्ट इस मामले पर 26 फरवरी को सुनवाई करेगा.

नारायण साईं ने याचिका में दलील दी है कि वह पिछले करीब 12 वर्षों से जेल में बंद है और उसकी अपील अब भी लंबित है. ऐसे में मानवीय आधार पर उसे जमानत दी जानी चाहिए. याचिका में यह भी कहा गया है कि लंबी कैद अवधि, पारिवारिक परिस्थितियां और अपील पर देरी, अस्थायी रिहाई का आधार बनती हैं. बचाव पक्ष का तर्क है कि अपील का अंतिम निपटारा होने तक जेल में रखना न्यायसंगत नहीं है.

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गौरतलब है कि साल 2019 में सूरत की एक सत्र अदालत ने नारायण साईं को 2013 के बहुचर्चित दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया था. सूरत की दो बहनों ने आरोप लगाया था कि 2002 से 2005 के बीच आश्रम में उसके साथ बार-बार बलात्कार किया गया, अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए गए और अन्य लड़कियों का भी यौन शोषण हुआ. अदालत ने IPC की धारा 376 और 377 के तहत नारायण साईं को उम्रकैद की सजा सुनाई थी और एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था. उसकी गिरफ्तारी दिसंबर 2013 में दिल्ली से हुई थी.

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कोर्ट से नारायण साईं की कई याचिकाएं खारिज

नारायण साईं इससे पहले भी कई बार राहत की कोशिश कर चुका है. गुजरात हाईकोर्ट ने उसकी सजा माफी और फर्लो यानी अस्थायी रिहाई से जुड़ी याचिकाएं पहले ही खारिज कर दी थीं. अप्रैल 2025 में फर्लो याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ कहा था कि अपराध की गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, जहां से सजा निलंबन से जुड़ा मामला फिर हाईकोर्ट पहुंचा.

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सरकार ने जमानत मांगने का किया विरोध

सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय का हवाला दिया है. वहीं पीड़ित पक्ष भी किसी तरह की राहत के खिलाफ अडिग है. अगर याचिका स्वीकार होती है तो यह लंबे कानूनी संघर्ष में अहम मोड़ होगा, वहीं खारिज होने की स्थिति में नारायण साईं की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

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