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नारायण राणे और शिवसेना के कैसे बिगड़े रिश्ते? आज क्यों हैं दोनों दुश्मन

बीजेपी और शिवसेना के बीच खटास की बात तो काफी पुरानी है. साल 2017 में जब मुंबई नगर पालिका के चुनाव हुए थे, उस दौरान बीजेपी और शिवसेना का झगड़ा चरम पर पहुंच गया था. ये वह दौर था जब बीजेपी और शिवसेना साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार चला रहे थे.

नारायण राणे (फाइल फोटो) नारायण राणे (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • नारायण राणे की गिरफ्तारी से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल
  • फडणवीस बोले- नारायण राणे को संयम बरतना चाहिए था

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे की बीजेपी की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान रायगढ़ में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लेकर दिए गए बयान के बाद अब विवाद बढ़ गया है. बयान को लेकर राणे के खिलाफ चार अलग-अलग थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई. जिसके बाद अब उन्हें हिरासत में ले लिया गया है. 

नारायण राणे की गिरफ्तार को लेकर अब बीजेपी बनाम शिवसेना जैसी स्थिति का अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि इससे पहले भी ऐसा कई बार हो चुका है जब दोनों ही सरकारें आमने सामने आयीं. इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत मामले में बिहार सरकार बनाम महाराष्ट्र सरकार देखने को मिल चुका है. 

हालांकि बीजेपी और शिवसेना की तकरार के अलावा नारायण राणे बनाम शिवसेना भी देखने को मिला. राणे एक लंबे समय से शिवसेना विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं. हालांकि माना जाता है कि यह तकरार उस रोज और बढ़ गई जब नारायण राणे को केंद्र की कैबिनेट में भी शामिल कर लिया गया.    


नया नहीं है बीजेपी VS शिवसेना होना

वहीं बात करें बीजेपी और शिवसेना के बीच खटास की बात तो काफी पुरानी है. साल 2017 में जब मुंबई नगर पालिका के चुनाव हुए थे, उस दौरान बीजेपी और शिवसेना का झगड़ा चरम पर पहुंच गया था. ये वह दौर था जब बीजेपी और शिवसेना साथ मिलकर महाराष्ट्र में सरकार चला रहे थे. लेकिन इसके बाद शिवसेना ने साल 2018 में यह ऐलान भी कर दिया था कि इसके बाद हम कोई भी चुनाव गठबंधन में नहीं लड़ेंगे. बावजूद इसके सिर्फ एक साल के अंदर बीजेपी के साथ मिलकर शिवसेना ने दो चुनाव लड़े.

ऐसे में जो हुआ उसे पूरा देश जानता है. एक बड़ी तकरार के बाद महराष्ट्र अघाड़ी जैसा एक्सपेरिमेंट सभी के सामने था. तीन ऐसी पार्टियां एकसाथ आयीं जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था. ऐसे में अब बीजेपी नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नारायण राणे के बयान से इत्तेफाक नहीं रखने की बात भी कह दी और राणे पर हो रही कार्रवाई की निंदा भी कर दी. अब यह साफ है कि राणे के बीजेपी में जाने और उन्हें कैबिनेट में हिस्सा बनाने के बाद से बीजेपी और शिवसेना के बीच रिश्ता सबसे निचले स्तर पर है, यह माना जा सकता है.  

क्या बोले शरद पवार

इसी बीच एक ख़ास बात यह भी देखने को मिल रही है कि शरद पवार का इस पर कहना है कि मैं नारायण राणे को इतनी तवज्जो नहीं देना चाहता. अब इसपर जहां एक तरफ पवार, राणे को तवज्जो नहीं देना चाहते वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार ने इतनी बड़ी कार्रवाई की है. वहीं महाराष्ट्र की राजनीति में बीजेपी पुरजोर कोशिश में है कि वो वापसी कर ले. आगामी महानगर के चुनावों बीजेपी की कोशिश रहेगी कि वो अपना कब्जा जमा सके. ऐसे में जाहिर है वो यह संदेश देना चाहेगी कि शिवसेना ने महाराष्ट्र में सरकार बना कर गलती की है.
  
राणे की गिरफ्तारी के मामले में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट कर कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा केंद्रीय मंत्री नारायण राणे जी की गिरफ़्तारी संवैधानिक मूल्यों का हनन है. इस तरह की कार्यवाही से ना तो हम डरेंगे, ना दबेंगे. भाजपा को जन-आशीर्वाद यात्रा में मिल रहे अपार समर्थन से ये लोग परेशान हैं. हम लोकतांत्रिक ढंग से लड़ते रहेंगे, यात्रा जारी रहेंगी.


 

क्या कहा था राणे ने?

केंद्रीय मंत्री नारायण राणे (Union Minister Narayan Rane) ने जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान दावा किया था कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ये भूल गए थे कि देश कब आजाद हुआ था. उन्होंने ये भी दावा किया था साल भूलने के बाद उन्होंने अपने सहयोगी से पूछा था. 

इस पर राणे ने कहा था, 'ये शर्मनाक है कि मुख्यमंत्री को ये नहीं पता कि हमें आजाद हुए कितने साल हो गए. अपने भाषण के दौरान उन्होंने पीछे मुड़कर अपने सहयोगी से पूछा था. अगर मैं वहा होता तो उन्हें जोरदार थप्पड़ मारता.'



 

 

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