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पूर्व IAS अधिकारी हर्ष मंदर के खिलाफ CBI जांच के आदेश, विदेशी चंदा से जुड़ा है मामला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर पूर्व IAS अधिकारी हर्ष मंदर के खिलाफ CBI जांच के आदेश दिए गए हैं. हर्ष मंदर पर एफसीआरए कानून के उल्लंघन का आरोप है. मंदर यूपीए शासन के दौरान सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य थे.

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पूर्व आईएएस हर्ष मंदर. (फाइल फोटो)
पूर्व आईएएस हर्ष मंदर. (फाइल फोटो)

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूर्व आईएएस अधिकारी हर्ष मंदर के खिलाफ सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं. हर्ष मंदर पर आरोप है कि विदेशों से जो चंदा लिया गया, उसमें एफसीआरए कानून का उल्लंघन हुआ है. मंदर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के करीबी रहे हैं. यूपीए सरकार के दौरान वे सलाहकार परिषद के सदस्य के तौर पर लंबे समय तक काम कर चुके हैं.

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बता दें कि 2021 में हर्ष मंदर के ठिकानों पर ईडी ने छापा मारा था. उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के केस में कार्रवाई की गई थी. हर्ष दो चिल्ड्रन होम चलाते हैं- उम्मीद अमन घर और खुशी रेनबो होम. इन दोनों ही चिल्ड्रन होम के फंड्स को लेकर विवाद है और आरोप ये भी लगा है कि यहां पर रह रहे बच्चों का इस्तेमाल 2020 में हुए CAA प्रदर्शन के दौरान किया गया था. इसी सिलसिले में नेशनल कमिशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स ने जांच के बाद दावा किया था कि हर्ष मंदर द्वारा चलाए जा रहे चिल्ड्रन होम से बच्चों को अलग-अलग विरोध प्रदर्शन में ले जाया जाता था. 

इनकम सोर्स को लेकर भी विवाद

दिल्ली पुलिस ने जांच के आधार पर हर्ष मंदर और उनके NGO के खिलाफ FIR दर्ज की थी. शिकायत में स्पष्ट कहा गया था कि चिल्ड्रन होम अपने फंड्स को लेकर कुछ भी साफ तौर पर नहीं बता पाया है. उनकी इनकम सोर्स को लेकर भी विवाद था. ऐसे में हर्ष पर धोखाधड़ी, जालसाजी का आरोप लगा है. दिल्ली पुलिस की उसी FIR के बाद ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज कर लिया था.

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अवमानना का मामला भी पहुंचा था सुप्रीम कोर्ट

हर्ष मंदर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला भी सामने आया था. उन पर दिल्ली दंगों के दौरान दिए गए कथित भड़काऊ बयान देन का आरोप लगा था. साल 2020 में मार्च में दिल्ली पुलिस के डीसीपी लीगल सेल ने एक्ट‍िविस्ट हर्ष मंदर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया था. दिल्ली पुलिस ने मंदर पर सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का आरोप लगाया था. हलफनामे में कहा गया था कि हर्ष मंदर ने सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ बयानबाजी की है, जो कोर्ट की अवमानना है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस अवमानना के मामले को बंद कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस मामले में सुनवाई का कोई मतलब नहीं है. दरअसल, हर्ष मंदर ने दंगों में भूमिका की जांच को लेकर कुछ नेताओं को आरोपी बनाने की मांग दिल्ली हाई कोर्ट से की थी.

 

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