मणिपुर के त्रोंग्लाओबी गांव में दो मासूम बच्चों की नृशंस हत्या के बाद पूरे राज्य में शोक और आक्रोश का माहौल है. पीड़ित परिवार ने अधिकारियों से त्वरित न्याय और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की है. बच्चों की दादी ओइनाम ओंगबी लोइदांग ने बेहद भावुक अपील करते हुए किसी भी तरह के मुआवजे को साफ तौर पर ठुकरा दिया.
उन्होंने कहा, 'मुझे पैसे नहीं चाहिए. पैसे से मेरे पोता-पोती नहीं लौटेंगे.' रोते हुए उन्होंने सवाल उठाया, 'उनकी क्या गलती थी? वे इतने छोटे थे कि दुनिया को समझ भी नहीं पाए थे.'
इंफाल के राज मेडिसिटी में मीडिया से बात करते हुए लोइदांग ने कहा कि इस जघन्य हत्या के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें पांच दिन के अंदर गिरफ्तार किया जाए. उनका यह बयान स्थानीय लोगों में बढ़ते गुस्से और असुरक्षा की भावना को दर्शाता है.
उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा जा रहा है कि राज्य में हालात सामान्य हो रहे हैं. लोइदांग ने कहा, 'अगर शांति लौट रही है तो ऐसा क्रूर अपराध कैसे हो सकता है? यह हिंसा कब खत्म होगी? अगला शिकार कौन होगा?'
इस दर्दनाक घटना का सबसे ज्यादा असर बच्चों की मां पर पड़ा है, जो इस समय गहरे मानसिक सदमे में हैं. परिवार के अनुसार, उन्हें अपने बच्चों की मौत की जानकारी आज सुबह एक न्यूज रिपोर्ट के जरिए मिली. तब से उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही है. लोइदांग ने बताया, 'वह बार-बार बेहोश हो रही हैं और हमसे अपने बच्चों को वापस लाने की जिद कर रही हैं. वह उन्हें देखना चाहती हैं और हमसे नाराज हैं कि हमने उन्हें पहले क्यों नहीं बताया.'
परिवार ने कहा कि उनकी इस हालत को देखना बेहद मुश्किल है और वे समझ नहीं पा रहे कि उन्हें कैसे संभालें.
इस घटना के बाद पूरे मणिपुर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है. कई सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके.
बता दें कि हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर में उग्रवादी संगठन भी सक्रिय हो गए हैं. बिष्णुपुर जिले के त्रोंग्लाओबी गांव में कुकी उग्रवादियों ने 6 और 7 अप्रैल की रात करीब एक बजे एक घर पर बम से हमला कर दिया. इस हमले में पांच साल के एक बच्चे और छह माह की एक बच्ची की जान चली गई. जिस समय बम हमला हुआ, महिला अपने दोनों बच्चों के साथ घर में सो रही थी.