scorecardresearch
 

आखिरी किसकी गलती... महरौली के मलबे में अपनों की तलाश रही गमगीन आंखें

दिल्ली के महरौली इलाके में शनिवार शाम एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई. मलबे से अब तक 11 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से दो को मृत घोषित कर दिया गया है.

Advertisement
X
महरौली में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत. (photo: ITG)
महरौली में भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत. (photo: ITG)

दक्षिण दिल्ली के महरौली इलाके में शनिवार 30 मई की शाम साढ़े 7 बजे एक पांच मंजिला रिहायशी और कमर्शियल इमारत अचानक ताश के पत्तों की तरह जमींदोज हो गई. इस भीषण हादसे के बाद दिल्ली दमकल विभाग और एनडीआरएफ (NDRF) की विशेष टीमों ने स्थानीय लोगों की मदद से मलबे में दबे नागरिकों को बाहर निकालने के लिए एक बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस इमारत में कोचिंग सेंटर था, साथ ही मेस, पेइंग गेस्ट हाउस और लोगों की रिहायश थी. हादसे के तुरंत बाद कुछ लोगों को निकाला गया था. मौके पर पहुंचे 102 एंबुलेंस के एक ड्राइवर ने बताया कि घटनास्थल से तीन लोगों को एंबुलेंस और पीसीआर से अस्पताल ले जाया गया था और जेसीबी आने की शुरुआत हो गई थीं. एंबुलेंस ड्राइवर ने बताया कि लोग अपनों को खोजने खो लिए पहुंच रहे थे और मलबे से दो लोगों मलबे से स्थानीय लोगों ने ही बाहर निकाला था.

रविवार दोपहर तक कुल ग्यारह लोगों को मलबा से निकाला गया था, जिन्हें से दो लोगों को अस्पताल में मृत घोषित किया गया, जबकि तीन की हालत बेहद गंभीर थी. वहां लोगों में नाराजगी देखने को मिली जो अपना को खोज रहे थे और राहत बचाव कार्य के बेहद धीमी रफ़्तार से चलने का आरोप लगा रहे थे.

इस इमारत के कोचिंग सेंटर में मेडिकल की पढ़ाई होती थी. अनुज कुमार ने हमें बताया कि उनके कई साथियों को फोन नहीं लग रहा है जो यहां अभी-भी में हो सकते हैं, लेकिन राहत बचाव कार्य की रफ़्तार बेहद धीमी है.

घटना स्थल पर एक पिता अपनी बेटी को खोज रहा था तो कई युवा लड़के अपने साथियों की तलाश में इंतजार में खड़े रहे.

रविवार को घटना स्थल पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी पहुंची और उन्होंने राहत व बचाव कार्य का जायजा लिया. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि अवैध निर्माण की जो शिकायत हैं, उसको लेकर जांच की जाएगी. कई स्थानीय लोग अवैध तरीके से इसी इमारत के निर्माण के आरोप लगा रहे थे.

नेहा अपनी दोस्त एकता को खोजते मिली. एकता मेडिकल की कोचिंग लेने के बाद इसी इमारत की मेस में खाना खाने आती थी. हादसे के वक्त एकता के साथ नेहा नहीं थी, लेकिन अब वो अपनी दोस्त को खोजते हुए हादसे की जगह उम्मीद का इंतजार कर रही हैं.

दिल्ली दमकल विभाग के साथ एनडीआरएफ की विशेष टीम सर्च और अभियान में जुटी है. एनडीआरएफ थर्मल इमेजिंग कैमरा विक्टिम लोकेटर कैमरा ईपीआर जैये आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हर सम्भव जीवितों की तलाश में जुटी है. स्निफर डॉग की मदद भी ली जा रही है, लेकिन ऐसे हादसों में शुरू के 6 घंटे गोल्डन आवर कहे जाते हैं, जिसमें जीवितों की संभावना ज्यादा होती है. हादसे को 12 घंटे से ज्यादा वक्त हो चुका है, लेकिन बचाव एजेंसियां हर उम्मीद से अभियान में जुटी है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement