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जिला परिषद चुनावों में नहीं इस्तेमाल होगा मार्कर पेन... स्याही पर सवाल के बाद महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने लिया फैसला

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने आगामी जिला परिषद चुनावों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए स्याही के लिए मार्कर पेन के इस्तेमाल पर रोक का निर्णय लिया है. विपक्षी शिवसेना के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मतदान प्रक्रिया में खामियों को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद आयोग ने स्याही विवाद की जांच के आदेश दिए हैं.

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स्याही पर सवाल के बाद महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने मार्कर का प्रयोग न करने का फैसला लिया है
स्याही पर सवाल के बाद महाराष्ट्र चुनाव आयोग ने मार्कर का प्रयोग न करने का फैसला लिया है

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने फैसला लिया है कि अब स्याही के लिए मार्कर पेन का इस्तेमाल नहीं होगा. आयोग ने ये फैसला आने वाले ज़िला परिषद चुनावों के लिए लिया है. चुनाव आयोग ने स्याही विवाद को लेकर जांच के आदेश दिए हैं. बता दें कि BMC चुनाव के दौरान सामने आया था कि वोटिंग के बाद लगाने वाली स्याही आसानी से मिट रही है.

क्या है स्याही विवाद?
बता दें कि वोटिंग के बाद मतदाताओं की उंगुली पर लगाई जाने वाली अमिट स्याही के मिटने की शिकायतों ने सियासी पारा गरमा दिया था. कल्याण से एमएनएस (MNS) उम्मीदवार उर्मिला तांबे ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाते हुए राज्य चुनाव आयोग (SEC) पर सत्ताधारी दल की मदद करने का गंभीर आरोप लगाया था. 

वोटिंग के बीच विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा किया था. उद्धव ठाकरे ने मतदान प्रक्रिया में खामियों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया था कि मतदान के बाद उंगली पर लगी स्याही भी आसानी से मिट जा रही है. इसके लिए चुनाव आयोग को जवाबदेह होना चाहिए.

उर्मिला तांबे की शिकायत के बाद जब मीडिया कर्मियों ने इसकी पड़ताल की, तो चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं. प्रयोग के दौरान देखा गया कि जैसे ही उंगुली पर लगे निशान पर एसीटोन लगाया गया, वह स्याही तुरंत मिट गई. एमएनएस उम्मीदवार का आरोप है कि चुनाव आयोग जानबूझकर ऐसी स्याही का उपयोग कर रहा है, जिससे फर्जी वोटिंग के जरिए सत्ता पक्ष को फायदा पहुंचाया जा सके.

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बीएमसी कमिश्नर भूषण गगरानी ने भी इस बात पर सहमति जताई है कि मार्कर पेन से लगाया गया निशान स्थायी नहीं है और इसे आसानी से साफ किया जा सकता है. हालांकि, चुनाव आयोग के जनसंपर्क अधिकारी (PRO) ने बचाव करते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों की यह पारंपरिक पद्धति है. उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2012 से ही चुनावों में मार्कर पेन का उपयोग हो रहा है और इस बार भी वही किया गया है.

राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर बोला हमला
वहीं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शुक्रवार को स्याही विवाद के बीच चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग “नागरिकों को गैसलाइट”  (भ्रमित) कर रहा है. साथ ही, महाराष्ट्र के निकाय चुनावों के नतीजों में बीजेपी की मजबूत बढ़त के बीच राहुल गांधी ने एक बार फिर ‘वोट चोरी’ का आरोप दोहराया. इन चुनावों की मतगणना फिलहाल जारी है.

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'चुनाव आयोग द्वारा नागरिकों को गैसलाइट करना यही दिखाता है कि हमारे लोकतंत्र में भरोसा कैसे खत्म हो गया है.वोट चोरी एक राष्ट्रविरोधी कृत्य है.'

उन्होंने एक खबर की कटिंग भी साझा की, जिसमें बताया गया था कि गुरुवार को बीएमसी चुनाव के मतदान के बाद मतदाताओं और विपक्षी नेताओं ने अमिट स्याही के निशान के जल्दी मिटने को लेकर चिंता जताई थी. खबर में यह भी कहा गया कि इस मामले में ‘शर्मिंदा’ चुनाव आयुक्त ने जांच कराने की बात कही है.

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विवाद पर चुनाव आयोग ने दिया था ये जवाब
महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने कहा है कि उंगली पर लगाई गई स्याही को मिटाने का प्रयास कर मतदाताओं में भ्रम पैदा करना एक प्रकार की गड़बड़ी है. इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति उंगली की स्याही मिटाकर दोबारा मतदान करने जाता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी. राज्य चुनाव आयोग ने यह भी साफ किया है कि उंगली की स्याही मिटाकर गड़बड़ी के प्रयास पर भी संबंधित मतदाता दोबारा मतदान नहीं कर सकता.

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि पहले से ही जरूरी सतर्कता बरती जा रही है. मतदाताओं के मतदान का रिकॉर्ड दर्ज किया जाता है, इसलिए केवल स्याही मिटाने से दोबारा मतदान संभव नहीं है. चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि सभी अधिकारियों को इस संबंध में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

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