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पंजाब में नशे के खिलाफ आर-पार की जंग, केजरीवाल और CM मान ने एंट्री ड्रग कैंपेन के दूसरे चरण का किया शुभारंभ

पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए आम आदमी पार्टी की सरकार ने अब जनता को इस लड़ाई का सीधा हिस्सा बनाया है. फगवाड़ा से शुरू हुए इस मिशन में 'पिंडा दे पहरेदार' कमेटियां और नई मोबाइल ऐप के जरिए ड्रग तस्करों पर नकेल कसी जाएगी.

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पंजाब में एंट्री ड्रग कैंपेन का दूसरा चरण शुरू. (photo: ITG)
पंजाब में एंट्री ड्रग कैंपेन का दूसरा चरण शुरू. (photo: ITG)

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फागवारा में युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान के दूसरे चरण का शुभारंभ किया. इस चरण में स्थानीय गांवों में 'पिंडा दे पहरेदार' समितियों का गठन किया गया है जो नशाखोरी के खिलाफ काम करेंगी. 9 से 25 जनवरी तक पदयात्राएं और जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी. साथ ही सरकार ने मोबाइल ऐप और मिस्ड कॉल नंबर भी जारी किया है, ताकि नागरिक नशे से जुड़ी सूचनाएं आसानी से अधिकारियों को दे सकें.

अधिकारियों ने बताया कि इस कैंपेन का उद्देश्य स्थानीय भागीदारी और नई टेक्नोलॉजी उपायों के जरिए से नशाखोरी के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करना है. ये अभियान सामुदायिक रणनीतियों और पुनर्वास की कोशिशों को बढ़ाने पर केंद्रित होगा.

'एकजुट हुआ पंजाब'

इस कैंपेन के उद्घाटन के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'पंजाब अब सिर्फ लड़ नहीं रहा है; ये नशाखोरी को पूरी तरह से खत्म करने के लिए एकजुट हो रहा है. युद्ध नशे के विरुद्ध' का दूसरा चरण आज से शुरू हो रहा है.'

उन्होंने कहा कि पहले चरण में बड़ी सफलता मिली है और अब समुदाय आधारित रणनीति से नशे को पूरी तरह खत्म किया जाएगा.

केजरीवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि कई राज्यों में नशा व्यापक है, लेकिन वहां की सरकारें उदासीन हैं. उन्होंने पंजाब के अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि शिरोमणि अकाली दल के शासन में नशा घर-घर तक पहुंच गया था और कांग्रेस की पांच साल की सरकार में भी स्थिति नहीं सुधरी. AAP सरकार बनने के बाद धमकियों के बावजूद कार्रवाई की गई.

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पहले चरण में कैंपेन को मिली बड़ी सफलता

उन्होंने दावा किया, 'पिछले एक साल में नशा तस्करों के खिलाफ 28,000 मामले दर्ज किए गए, 42,000 तस्कर गिरफ्तार हुए और उनकी संपत्तियां ध्वस्त की गईं. ये अभियान बड़ी सफलता साबित हुआ है.'

पिंडा दे पहरेदार का गठन

दूसरे चरण की प्रमुख पहल के तहत है, जिसके तहत 'पिंडा दे पहरेदार' (गांव के रक्षक समितियां) का गठन किया गया है. गांव के रक्षक समितियों में हर गांव में 10 सदस्यीय समिति बनाई जाएगी जो स्थानीय स्तर पर नशे के खिलाफ अभियान का नेतृत्व करेगी. ये समितियां सीमावर्ती इलाकों में रक्षा समितियों की तर्ज पर काम करेंगी और नशे की रोकथाम, रिपोर्टिंग तथा संसाधन समन्वय का जिम्मा संभालेंगी.

आयोजित की जाएंगी पदयात्राएं

इसके अलावा 9 से 25 जनवरी तक इन समितियों द्वारा रोजाना पदयात्राएं और जागरूकता रैलियां आयोजित की जाएंगी, ताकि नशे के खिलाफ संदेश हर घर तक पहुंचे. ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में व्यापक जन जागरूकता पैदा करना इस चरण का मुख्य उद्देश्य है.

इसका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी दोनों समुदायों में अभियान के लिए व्यापक जन जागरूकता और समर्थन जुटाना है.

अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मान सरकार ने एक समर्पित मोबाइल ऐप और मिस्ड कॉल नंबर जारी किया है. इसके जरिए आम नागरिक सीधे नशे से जुड़ी सूचनाएं अधिकारियों तक पहुंचा सकेंगे. इससे रिपोर्टिंग और हस्तक्षेप को सुलभ बनाने के लिए डिजाइन किया गया है.

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इस पहल में युवा को करेंगे शामिल

वहीं, पिछले हफ्ते दूसरे चरण की घोषणा करते हुए राज्य मंत्री तरुण प्रीत सिंह सोंद ने कहा कि पुनर्वासित युवाओं को अभियान में शामिल किया जाएगा. ये युवा दूसरों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा देंगे और घर-घर जाकर नशे के खतरे के बारे में जागरूक करेंगे.

जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम पंजाब

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्देश पर पहले चरण की सफलता के बाद दूसरे चरण की शुरुआत की गई है, ताकि पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जा सके. राज्य सरकार जीरो टॉलरेंस नीति पर कायम है और पहले चरण में हजारों नशा तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

उन्होंने बताया कि पिछले साल शुरू किए गए इस अभियान में तीन सूत्रीय रणनीति- प्रवर्तन, नशा मुक्ति और रोकथाम अपनाई गई थी. अधिकारियों का कहना है कि दूसरे चरण की भी नशे के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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