दिल्ली कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. जस्टिस दीपांकर दत्त और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने शुक्रवार को लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित कमेटी के खिलाफ दाखिल की गई जस्टिस वर्मा की याचिका खारिज कर दी.
यशवंत वर्मा ने लोकसभा स्पीकर के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किया गया था और जजेस (इन्क्वायरी) एक्ट, 1968 के तहत जांच कमेटी बनाई गई थी.
जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित कमेटी को चुनौती दी थी. इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर जस्टिस वर्मा अपने अधिकारों के हनन को साबित कर सके तो ऐसी सूरत में ही SC आर्टिकल 32 के तहत दखल दे सकती है.
जस्टिस वर्मा ने दी ये दलील
दरअसल, कुछ दिन पहले जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग का प्रस्ताव लाया गया था. प्रस्ताव स्वीकार किए जाने के बाद जस्टिस वर्मा को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रक्रिया के अनुरूप एक कमेटी गठित की थी. इस कमेटी के सामने जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपना बचाव किया था.
जस्टिस वर्मा ने दलील दी थी कि जब अधिकारियों ने घटनास्थल को सुरक्षित नहीं किया, तो उन्हें महाभियोग का सामना क्यों करना चाहिए. वह मौके पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति नहीं थे. उन्होंने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए.
पुलिस की भूमिका पर सवाल
उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिस साइट को सील करने में असफल रही. पुलिस और फायर ब्रिगेड, दोनों ही घटनास्थल पर मौजूद थे. लेकिन उन्होंने जरूरी कार्रवाई नहीं की. शुरुआत में मौके से किसी भी तरह की बरामदगी नहीं हुई थी. अब यह कहा जा रहा कि वहां कैश मिला. ऐसी स्थिति में घटनास्थल की सुरक्षा में चूक के लिए उनको जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
इसके बाद जस्टिस वर्मा ने अपने खिलाफ महाभियोग और संसद की ओर से कमेटी बनाए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. अब अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी.