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झारखंड: नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म मामले में कोर्ट का फैसला, आरोपी को आजीवन कारावास

स्पेशल पोक्सो जज दिनेश कुमार के कोर्ट में सोमवार को पिता के द्वारा अपनी नाबालिक पुत्री के साथ दुष्कर्म करने वाले गढ़वा थाना क्षेत्र के खुर्द निवासी शेख इम्तेयाज को आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपये आर्थिक जुर्माना की सजा सुनाई गई है.

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झारखंड रेप केस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
झारखंड रेप केस (प्रतीकात्मक तस्वीर)

झारखंड (Jharkhand) के गढ़वा में सामने आए एक रेप केस में करीब दो साल बाद कोर्ट का फैसला आया है. एक शख्स ने अपनी नाबालिग बेटी का दुष्कर्म किया था. अदालत ने फैसला सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा और एक लाख के आर्थिक जुर्माने की सजा का ऐलान किया है. बच्ची के दादा के लिखित आवेदन पर मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी.

स्पेशल पोक्सो जज दिनेश कुमार के कोर्ट में सोमवार को पिता के द्वारा अपनी नाबालिक पुत्री के साथ दुष्कर्म करने वाले गढ़वा थाना क्षेत्र के खुर्द निवासी शेख इम्तेयाज को आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख रुपये आर्थिक जुर्माना की सजा सुनाई गई है. 

क्या है पूरा मामला?

गढ़वा थाना क्षेत्र स्थित संग्रह खुर्द के रहने वाले के दादा शेख एनुल्लाह के द्वारा लिखित आवेदन के आधार पर गढ़वा थाना कांड संख्या 197 ऑब्लिक 2023 दिनांक 15 मई 2023को एफआईआर दर्ज की गई है. इसमें आरोप लगाया गया है कि पीड़िता अपने घर में मायूस रहा करती थी. इस दौरान उन्होंने दादी को बताया और इसके बाद पीड़िता से उसके दादा ने पूछा. इसके बाद बच्ची ने बताया कि उसके पिता के द्वारा दुष्कर्म किया जाता था. कई बार ऐसा किया गया. लड़की ने ये भी बताया कि उसके पिता ने उसे डराया-धमकाया और कहा कि यह बात अगर किसी को बताई तो उसकी जीभ काट दी जाएगी.

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जब यह बात घर वालों ने आरोपी से पूछी, तो उसने गाली-गलौज कर मारपीट करने की धमकी दी. उसके बाद पिड़िता के दादा ने इस बात को लेकर अपने समाज में पंचायती की. मामले में प्राथमिक की दर्ज कर 20 मई 2023 को गढ़वा थाना के द्वारा अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इसके साथ ही उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 376 एबी 5 एम और 6 पॉक्सो एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया.

यह भी पढ़ें: झारखंड के गढ़वा में वज्रपात का कहर... मैट्रिक टॉपर सहित तीन की मौत, एक युवक घायल

कोर्ट के द्वारा कई धाराओं में संज्ञान लेकर आरोप तय करके त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियोजन पक्ष को सुबूत पेश करने के लिए तारीख तय की गई. लोक अभियोजक उमेश दीक्षित के द्वारा आठ चश्मदीदों का सुबूत पेश करवाया गया. 

वहीं, बचाव पक्ष की ओर से दो चश्मदीदों का भी सुबूत पेश किया गया. उपलब्ध दस्तावेज और साक्ष्य के आधार पर कोर्ट द्वारा आरोपी का बयान दर्ज कर बचाव पक्ष की तरफ से अधिवक्ता नित्यानंद दुबे को बहस करने का मौका दिया गया. लोक अभियोजक उमेश दीक्षित को भी पक्ष रखने का मौका दिया गया. इसके बाद दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए अभियुक्त को दोषी करार दिया गया. सजा के लिए सुनवाई के बाद अभियुक्त को आजीवन सश्रम कारावास और एक लाख आर्थिक जुर्माना के साथ सजा सुनाई गई.  

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