अमेरिका और इज़रायल के हमलों के चलते ईरान में तनाव बढ़ गया है. भारतीय नौसेना ने स्थिति को देखते हुए खुद को हाई अलर्ट पर रखा है. 1 मार्च को दिल्ली में देर रात हुई कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मीटिंग में सीडीएस जनरल अनिल चौहान शामिल हुए. साउथ ब्लॉक मुख्यालय में नौसेना और वायु सेना स्थिति की लगातार निगरानी कर रहे हैं.
अगर जरूरत पड़ी, तो नौसेना संघर्ष क्षेत्र में फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए ऑपरेशन शुरू करने में पूरी तरह सक्षम है.
भारत अपनी समुद्री सीमाओं और नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है.
साउथ ब्लॉक से निगरानी
रक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के साउथ ब्लॉक मुख्यालय में नौसेना और वायु सेना चौबीसों घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. हालिया घटनाक्रमों के बाद, भारतीय नौसेना किसी भी अनहोनी या आपातकाल से निपटने के लिए कमर कस चुकी है. भारत सरकार भी इस स्थिति को लेकर गंभीर है, जिसका प्रमाण 1 मार्च की देर रात हुई उच्च स्तरीय सुरक्षा बैठक में सीडीएस जनरल अनिल चौहान की उपस्थिति से मिलता है. नौसेना हर मुमकिन खतरे को भांपते हुए अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत कर रही है.
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'ऑपरेशन संकल्प'
भारतीय नौसेना का 'ऑपरेशन संकल्प' भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने के लिए उसकी प्रतिबद्धता का सबूत है. बहरीन में आईएनएस सूरत तैनात है, जबकि अदन की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में कई विध्वंसक और फ्रिगेट तैनात किए गए हैं. ये युद्धपोत न सिर्फ कार्गो जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि समुद्री डकैती विरोधी अभियानों को भी सफलतापूर्वक अंजाम दे रहे हैं. होरमुज जलडमरूमध्य से भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने में यह ऑपरेशन बहुत अहम रहा है.
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नौसेना की तैयारी के आंकड़े
नौसेना के पास 5,000 से ज्यादा कर्मियों और 21 युद्धपोतों का मजबूत बेड़ा है, जो किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है. नौसेना ने अब तक 900 घंटे की समुद्री निगरानी उड़ानें भरी हैं, जो समुद्री क्षेत्र में उभरते खतरों को संबोधित करने की उसकी क्षमता को दर्शाता है. जैसे-जैसे पश्चिम एशिया में स्थिति बदल रही है, भारतीय नौसेना पूरी तरह सतर्क बनी हुई है. किसी भी तरह की चुनौती या आपातकालीन स्थिति के लिए नौसेना का बेड़ा पूरी तरह तैयार है.