भारतीय नौसेना कासा लकड़ी से बना पारंपरिक नौकायन जहाज INSV कौंडिन्य इन दिनों अपने पहले सफर पर है. ये जहाज गुजरात के पोरबंदर से ओमान के मस्कट की ओर बढ़ रहा है और अब लगभग आधा सफर तय कर चुका है.
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान जहाज पर मौजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजय सान्याल लगातार अपडेट साझा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में खराब मौसम की वजह से रफ्तार धीमी रही, लेकिन अब जहाज फिर से सही दिशा में आगे बढ़ रहा है.
करीब एक हफ्ते की यात्रा के बाद जहाज पर ताजा खाने-पीने का सामान खत्म हो गया है. इसके बाद अब चालक दल ने सूखे खाने पर निर्भर होने लगा है. संजय सान्याल ने बताया कि अब नाश्ते में गुजराती थेपला और आम का अचार खाया जा रहा है. उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब समझ आता है कि थेपला क्यों बनाया गया था.
बताया समुद्र की स्थिति का अपडेट
संजय सान्याल के मुताबिक, समुद्र की स्थिति लगातार बदल रही है. सोमवार, पांच जनवरी को उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया कि यात्रा के आठवें दिन कई घंटों तक हवा बिल्कुल नहीं चली और समुद्र एकदम शांत रहा, जिसकी वजह से जहाज धारा के साथ धीरे-धीरे दक्षिण-पश्चिम की ओर बहता रहा. हालांकि सुबह के वक्त हल्की उत्तर-पूर्वी हवा चली, जिससे जहाज 1.5 से 2 नॉट की रफ्तार से आगे बढ़ सका.
उन्होंने यह भी बताया कि रात को चांद का नजारा बेहद खूबसूरत था और चांदनी इतनी तेज थी कि सूरज निकलने जैसा एहसास हो रहा था. तेज धूप और हवा की कमी के कारण कई चालक दल के सदस्य गर्मी से बचने के लिए जहाज के डेक के नीचे आराम कर रहे हैं. उम्मीद है कि मंगलवार शाम तक जहाज अपनी यात्रा का आधा रास्ता पार कर लेगा.
इससे एक दिन पहले, 4 जनवरी को भी संजय सान्याल ने बताया था कि उत्तर-पूर्वी तेज हवाओं के थमने के बाद कुछ समय के लिए समुद्र बिल्कुल शांत हो गया था. उस दौरान जहाज लगभग स्थिर सा लग रहा था, लेकिन इसी दौरान चालक दल को सफाई, मरम्मत और अन्य जरूरी काम करने का मौका मिल गया. बाद में हल्की हवा चली, जिससे रात भर जहाज करीब दो नॉट की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ता रहा.
क्यों लगा ज्यादा वक्त
यात्रा की शुरुआत हालांकि आसान नहीं थी. पोरबंदर से रवाना होने के बाद पहले 48 घंटों में जहाज को प्रतिकूल हवाओं का सामना करना पड़ा. इसके बाद समुद्री धाराएं बार-बार जहाज को रास्ते से भटका रही थीं. समुद्र की स्थिति कई बार इतनी खराब रही कि जहाज 50 डिग्री तक झूल गया, जबकि चालक दल को इसके लिए पहले से अच्छी ट्रेनिंग दी गई थी.
क्यों खास है INSV कौंडिन्य?
INSV कौंडिन्य को पांचवीं सदी की उस जहाज निर्माण तकनीक से बनाया गया है, जिसमें न तो इंजन का इस्तेमाल होता है और न ही लोहे की कीलें लगाई जाती हैं. ये पूरी तरह हवा, पाल और समुद्री धाराओं के सहारे चलता है. ये जहाज अजंता की गुफाओं में बने चित्रों में दिखाए गए प्राचीन जहाजों से प्रेरित है और भारत की पुरानी 'सिले हुए जहाज' की परंपरा को फिर से जीवित करता है.
इस यात्रा का मकसद भारत और ओमान के बीच उस प्राचीन समुद्री रास्ते को दोबारा समझना है, जिसके जरिए कभी मसाले, कपड़े और संस्कृति का आदान-प्रदान होता था. जब कौंडिन्य अपने इस पहले सफर पर रवाना हुआ था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी जहाज को बनाने वाले कारीगरों, डिजाइनरों और भारतीय नौसेना को बधाई दी थी. उन्होंने चालक दल को सुरक्षित और यादगार यात्रा के लिए शुभकामनाएं दी थीं और इसे भारत की समृद्ध समुद्री विरासत का उत्सव बताया था. ये अभियान भारत के प्राचीन समुद्री इतिहास को फिर से जानने और समझने की एक अहम कोशिश माना जा रहा है.