भारत सरकार ने सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को निलंबित (abeyance) रखने के फैसले के बाद अब पाकिस्तान को बेदम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर की चिनाब घाटी में बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं के विकास को तेज कर दिया है. सरकार का कहना है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और पाकिस्तान को मिलने वाले फायदे को रोकने के लिए अपने पानी के हिस्से का पूरा इस्तेमाल करना चाहता है.
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर की जम्मू-कश्मीर की दो दिवसीय यात्रा के दौरान परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के प्रयासों पर जोर दिया. मंत्री ने चिनाब और उसकी सहायक नदियों पर चल रही प्रमुख परियोजनाओं- सालाल, सवालकोट, रतले तथा चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स (CVPP) द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा की.
तीन प्रमुख प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण
अधिकारियों ने बताया कि मनोहर लाल ने निर्माणाधीन तीन बड़े CVPP प्रोजेक्ट्स- पकल दुल (1,000 मेगावाट), किरू (624 मेगावाट) और क्वार (540 मेगावाट) का भी निरीक्षण किया. ये परियोजनाएं न केवल बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि चिनाब बेसिन में जल नियंत्रण के लिए अहम हैं.
NHPC के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर ने ऊर्जा मंत्री को टेक्निकल प्रोग्रेस (तकनीकी प्रगति) और निर्माण संबंधी चुनौतियों के बारे में भी जानकारी दी, जिसके बाद काम में तेजी लाने के साफ निर्देश जारी किए और संशोधित समय-सीमा का सख्ती से पालन हो.
मंत्री द्वारा निर्धारित समय-सीमा के अनुसार, पाकल दुल और किरू जलविद्युत परियोजनाओं को दिसंबर 2026 तक चालू किया जाना है, जबकि क्वार परियोजना मार्च 2028 तक पूरी होनी है.
अधिकारियों ने कहा कि ये समय-सीमाएं सरकार के उस इरादे को दर्शाती हैं, जिसके तहत बुनियादी ढांचे के विकास में तेजी लाई जानी है, जिसमें पहले भौगोलिक चुनौतियों, पर्यावरण संबंधी मंजूरी और सुरक्षा चिंताओं के कारण देरी हुई थी.
सिंधु जल संधि निलंबन से मिली गति
वहीं, सिंधु जल संधि को निलंबित रखने से जम्मू-कश्मीर में जलविद्युत विकास को नई गति मिली है. भारत हमेशा कहता रहा है कि उसकी परियोजनाएं संधि के प्रावधानों का पूरी तरह पालन करती हैं, लेकिन नीति-निर्माताओं का मानना है कि संधि ने पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के जल के इस्तेमाल पर अनुचित प्रतिबंध लगाए थे, जबकि ये नदियां भारतीय क्षेत्र से ही निकलती हैं.
अब संधि प्रभावी रूप से स्थगित होने से भारत रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने, क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति मजबूत करने और राष्ट्रीय हित में जल संसाधनों का उपयोग करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है.
स्थानीय लोगों से भी की बातचीत
परियोजना समीक्षा के अलावा मंत्री ने विभिन्न साइटों पर स्थानीय निवासियों, इंजीनियरों और मजदूरों से बातचीत की. उन्होंने भूमि अधिग्रहण, रोजगार, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और स्थानीय विकास से जुड़ी समस्याएं सुनीं और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ मिलकर उनका समाधान करने का आश्वासन दिया.
इलाके में विकास को मिलेगा बढ़ावा
मनोहर लाल खट्टर ने कठिन भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में काम जारी रखने वाले इंजीनियरों, तकनीशियनों और मजदूरों की सराहना की. उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं क्षेत्र के विकास और देश की दीर्घकालिक ऊर्जा रणनीति के लिए महत्वपूर्ण हैं.
बता दें कि चिनाब बेसिन परियोजनाएं पूरी होने के बाद राष्ट्रीय ग्रिड में स्वच्छ ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी. इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करेंगी और रोजगार सृजन तथा बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचे) में सुधार के माध्यम से जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास में सहयोग प्रदान करेंगी.
अधिकारियों का ये भी कहना है कि बढ़ी हुई जलविद्युत क्षमता उत्तरी भारत में बिजली की पीक पावर मांग पूरी करने और ग्रिड संचालन को स्थिर करने में मदद करेगा.